Hindi NewsBihar NewsAll difficulties in land reforms in Bihar will resolved documents written in Kaithi script will be translated
बिहार में भूमि सुधार की हर दिक्कत होगी दूर; कैथी लिपि वाले दस्तावेजों का अनुवाद होगा

बिहार में भूमि सुधार की हर दिक्कत होगी दूर; कैथी लिपि वाले दस्तावेजों का अनुवाद होगा

संक्षेप:

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य के कई रैयतों के भूमि दस्तावेज कैथी लिपि में होने से परेशानी हो रही है। इसे दूर करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग कैथी लिपि विशेषज्ञों का पैनल बनाएगा। 

Jan 20, 2026 05:52 pm ISTsandeep लाइव हिन्दुस्तान
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राज्य में भूमि से जुड़े मामलों में लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या को दूर करने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाने की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे रैयत हैं, जिनके भूमि संबंधी पुराने दस्तावेज कैथी लिपि में लिखे हुए हैं। इस लिपि को पढ़ने और समझने वाले विशेषज्ञों की कमी के कारण आम लोगों को दाखिल-खारिज, भूमि सर्वेक्षण, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से कैथी लिपि विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जा रहा है।

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इन विशेषज्ञों को विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे पुराने दस्तावेजों का सटीक और प्रमाणिक अनुवाद कर सकें। सरकार का उद्देश्य है कि इन सेवाओं को कम दर पर उपलब्ध कराया जाए, जिससे आम रैयतों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में आज भी जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात, जैसे खतियान, रसीद और बंदोबस्ती दस्तावेज कैथी लिपि में हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और आधुनिक सर्वेक्षण प्रणाली के दौर में इन दस्तावेजों का अनुवाद न होने से कई मामलों में विवाद, देरी और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं।

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डिप्टी सीएम ने कहा कि कैथी लिपि विशेषज्ञों की व्यवस्था से भूमि सर्वेक्षण सहित राजस्व से जुड़े अन्य कार्य अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेंगे। इससे न केवल रैयतों को राहत मिलेगी, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली में भी सुधार आएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार रैयतों के अधिकारों की रक्षा और भूमि व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा और जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी।