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बिहार के इन 10 शहरों में सांस लेना मुश्किल, हवा सबसे ज्यादा जहरीली; क्या है वजह

बिहार के इन 10 शहरों में सांस लेना मुश्किल, हवा सबसे ज्यादा जहरीली; क्या है वजह

संक्षेप:

खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

Jan 14, 2026 08:00 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान, नीरज कमल, पटना
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बिहार के छोटे शहरों में हवा लगातार खराब रह रही है। राज्य के 10 शहरों की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 की मात्रा बढ़ी रहती है। जिन छोटे शहरों की हवा ज्यादा जहरीली है, उनमें आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल है। मंगलवार की सुबह भी आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक रहा। इस बीच पटना में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

आईआईटी बीएचयू के अध्ययन के अनुसार खुले नाले से अमोनिया गैस निकल रही है। यह वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड(एसओ2) से मिलकर पीएम 2.5 बन रहा है। पीएम2.5 यानी महीन धूलकण। दोनों गैस के आपस में मिलने से महीन कण बन रहे हैं। इसके कारण पीएम2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी हुई पायी जा रही है। पटना के वायु प्रदूषण में कमी जरूर आयी है, लेकिन पीएम2.5 अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। ऐसी ही स्थिति सूबे के अन्य छोटे शहरों की भी है।

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खुले नालों को बंद करना होगा

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डीके शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पटना के खुले नाले से निकल रही अमोनिया गैस से भी पीएम 2.5 बढ़ रहा है। अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। शहरों के खुले नालों को बंद करने से ही पीएम2.5 में कमी आएगी। हालांकि कई खुले नालों को बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजा जाएगी।

खुले नाले में आर्गेनिक मेटेरियल होते हैं। गंदगी और कचरा के कारण अमोनिया गैस निकलती है। शहर के वायु में पहले से ही वाहनों से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड मौजूद रहता है। दोनों के मिलने से भी पीएम2.5 बन रहा है। धूप निकलने पर अमोनिया हवा में प्रवेश कर जाता है।

अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लगेंगे

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी बीएचयू को पटना में वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने को लेकर समझौता किया था। अध्ययन के लिए एक साल का समय निर्धारित था, जो अब पूरा हो चुका है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने का समय और लगेगा।

आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के खुले नाले का सैंपल लेकर उसकी जांच की थी। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नाले से निकलने वाली अमोनिया गैस के कारण भी वायु में पीएम2.5 की मात्रा बढ़ रही है।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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