अब एक्स-रे के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर, बिहार में AI मशीनों ने संभाला मोर्चा; मिनटों में मिलेगी रिपोर्ट

हिन्दुस्तान, पूर्णिया
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पूर्णिया में टीबी निवारण के लिए AI तकनीक वाली अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग शुरू हुआ है। ये मशीनें इतनी छोटी हैं कि मोबाइल हेल्थ टीम इन्हें लेकर गाँवों में घर-घर जाकर जांच कर रही है। 321 गाँवों में चल रहे इस अभियान से अब तक सैकड़ों लोगों….

No more running around for X-rays—AI machines have taken charge in Bihar.

Bihar News: बिहार का पूर्णिया जिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहा है। केंद्र सरकार के 'टीबी मुक्त भारत' अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में तकनीक का ऐसा इस्तेमाल हो रहा है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल थी। अब जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को एक्स-रे कराने के लिए शहर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस 'अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे' मशीनों के आने से टीबी की जांच की गति कई गुना तेज हो गई है और रिपोर्ट भी मिनटों में मिल रही है।

डॉक्टर के हाथ में समा गई पूरी मशीन

इस नई पहल की सबसे बड़ी खूबी इन मशीनों का आकार है। ये मशीनें इतनी छोटी और हल्की हैं कि डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी इन्हें अपने हाथ में लेकर किसी भी गाँव या तंग गली में पहुँच सकते हैं। जिला पदाधिकारी डॉ. तनवीर हैदर ने बताया कि जिले में अब ऐसी तीन आधुनिक मशीनें उपलब्ध हो गई हैं। ये मशीनें न केवल फोटो खींचती हैं, बल्कि इनमें लगा AI सिस्टम तुरंत फेफड़ों के संक्रमण का विश्लेषण कर यह बता देता है कि मरीज में टीबी के लक्षण हैं या नहीं। इससे उन मरीजों की पहचान आसान हो गई है जो अस्पताल पहुँचने में असमर्थ थे।

321 गाँवों में चल रहा विशेष अभियान

जिले में चल रहे 100 दिनों के विशेष अभियान के तहत 321 गाँवों को चिन्हित किया गया है। अब तक 66 गाँवों में सघन जांच अभियान पूरा कर लिया गया है। मोबाइल हेल्थ टीम इन पोर्टेबल मशीनों को लेकर हर घर तक पहुँच रही है। डीपीए राजेश शर्मा के अनुसार, इस अभियान में अब तक 648 लोगों का एक्स-रे और 928 लोगों की अन्य जांचें की जा चुकी हैं। अप्रैल महीने की रिपोर्ट बताती है कि 948 लोगों की स्क्रीनिंग कर टीबी के नए मरीजों की तलाश तेज कर दी गई है। खास बात यह है कि टीबी के साथ-साथ मरीजों का ब्लड शुगर और बीपी भी चेक किया जा रहा है, क्योंकि मधुमेह रोगियों में टीबी का खतरा ज्यादा होता है।

सरकार केवल जांच और दवा पर ही नहीं, बल्कि मरीजों के खानपान पर भी ध्यान दे रही है। अभियान के दौरान अब तक 177 टीबी मरीजों को पोषण आहार के फूड पैकेट दिए जा चुके हैं। कुल मिलाकर 2,600 से अधिक लोगों को फूड बास्केट देने का लक्ष्य रखा गया है ताकि उनकी इम्युनिटी बढ़ सके और वे जल्द स्वस्थ हो सकें। पूर्णिया की यह हाई-टेक मुहिम उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो गरीबी या जानकारी के अभाव में अपनी बीमारी को छिपाए बैठे थे।

Jayendra Pandey

लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। वर्तमान में वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'हिन्दुस्तान' की बिहार टीम के लिए राजनीति, क्राइम और जनसरोकार से जुड़ी बड़ी खबरों को बेहद आक्रामकता और गहराई के साथ कवर कर रहे हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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