
वेतन के साथ पेंशन पर कुशवाहा के बाद नीतीश मिश्रा की सफाई, बोले- भ्रामक है RTI की जानकारी
नीतीश मिश्रा ने कहा कि हाल ही में विभिन्न मीडिया चैनल्स और सोशल मीडिया पर एक आरटीआई (RTI) के जवाब को आधार बनाकर यह सूचना प्रसारित की गई कि वर्तमान में मैं पूर्व विधायक का पेंशन प्राप्त कर रहा हूँ। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह पूरी तरह भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित है।
बिहार में इन दिनों कुछ विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन और पेंशन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। दरअसल एक RTI के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बिहार के कुछ बड़े नेताओं ने एक साथ पेंशन औऱ वेतन का लाभ लिया है। कुछ समय पहले इस सूची में शामिल उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी सफाई पेश की थी और कहा था कि ऐसी बातें तथ्यों से बिल्कुल ही परे हैं। अब इस लिस्ट में शामिल पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी अपनी बात एक्स पर रखी है।
नीतीश मिश्रा ने भी साफ किया है कुछ मीडिया चैनल्स और सोशल मीडिया पर आरटीआई के माध्यम से अधूरी जानकारी दी जा रही है। नीतीश मिश्रा ने एक्स पर लिखा, 'विभिन्न मीडिया चैनल्स और सोशल मीडिया में पेंशन संबंधी आरटीआई (RTI) के माध्यम से अधूरी जानकारी प्रसारित होने के संबंध में वस्तुस्थिति की जानकारी-:
हाल ही में विभिन्न मीडिया चैनल्स और सोशल मीडिया पर एक आरटीआई (RTI) के जवाब को आधार बनाकर यह सूचना प्रसारित की गई कि वर्तमान में मैं पूर्व विधायक का पेंशन प्राप्त कर रहा हूँ। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह पूरी तरह भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित है।
मैंने स्वयं इस मामले में वरीय कोषागार पदाधिकारी से विस्तृत जानकारी माँगी थी। उसके जवाब में 8 दिसम्बर 2025 को प्राप्त पत्र में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज है कि मुझे पूर्व विधायक पेंशन 22 सितंबर 2015 से 8 नवंबर 2015 (मात्र डेढ़ माह) तक मिला जिसके बाद पेंशन भुगतान बंद कर दिया गया। उक्त अवधि में मैं विधायक नहीं था। इसके बाद किसी भी प्रकार की पेंशन राशि का भुगतान मुझे नहीं किया गया है।
ध्यातव्य है कि कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ वेतन और पेंशन ले ही नहीं सकता, यह पूरी तरह असंभव है। फिर भी विभिन्न मीडिया चैनल्स और सोशल मीडिया के माध्यम से बिना किसी तथ्यों की जानकारी लिए और बिना मेरा पक्ष जाने इस विषय में भ्रम फैलाया गया और मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया जो न सिर्फ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है बल्कि किसी भी तरह न्यायोचित नहीं है।
मेरे लिए पारदर्शिता और सत्य हमेशा सर्वोपरि रहे हैं। किसी भी भ्रम या गलत सूचना की स्थिति में मैं स्वयं आगे आकर पूर्ण तथ्यों के साथ अपनी बात रखने में विश्वास करता हूँ। मैं आग्रह करता हूँ कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पूर्ण सत्यता और तथ्यों की जानकारी अवश्य जांच लें।
(इस संबंध में मेरे द्वारा वरीय कोषागार पदाधिकारी से माँगी गई जानकारी का पत्र तथा दिनांक 8 दिसम्बर 2025 को वरीय कोषागार पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र आप सबों की जानकारी हेतु साझा कर रहा हूँ।)
उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा था
आपको बता दें कि इस मुद्दे पर रालोमो सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने भी एक्स पर अपनी बात रखी थी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था, बिहार विधानसभा/विधान परिषद के कुछ पूर्व सदस्यों के द्वारा पेंशन लेने के बारे मीडिया में अत्यंत ही बेबुनियाद और तथ्य से परे खबरें प्रकाशित/प्रसारित की जा रही है। सूचना के अधिकार के तहत दी गई एक अधूरी जानकारी को खबर का आधार बनाया गया है।
उक्त सूची में मेरा नाम भी शामिल है। अतएव मैं अपने बारे में सच्चाई से अवगत करवाना चाहता हूं, जो इस प्रकार है :-उक्त पत्र में पेंशन शुरू किए जाने की तारीख बताई गई है। तब से लेकर अबतक कब, किसने और कितनी पेंशन की राशि ली, इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया है। मैं अपने बारे में बताना चाहता हूं कि शुरुआत से लेकर अबतक, जब किसी सदन का सदस्य नहीं रहा हूं। सिर्फ उस कालावधि में मैंने पेंशन ली है।
सदन में रहते हुए सिर्फ वहां से मैंने वेतन लिया है। उस अवधि में पेंशन लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। जाहिर है आज मैं राज्यसभा का सदस्य हूं। अतः राज्यसभा से वेतन ले रहा हूं। विधानसभा/विधानपरिषद से पेंशन नहीं ले रहा हूं। प्रावधान भी यही है कि आप एक साथ किसी सदन का वेतन और किसी से पेंशन नहीं ले सकते हैं। इस नियम का मैं भी शत-प्रतिशत पालन कर रहा हूं।'





