दिल्ली पहुंची बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर की गूंज, इंसाफ के लिए जंतर-मंतर पर डटा परिवार
चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर केस की गूंज अब दिल्ली मेें भी सुनाई दे रही है। भरत तिवारी के परिजन दिल्ली पहुंच गए हैं और न्याय की आस लेकर जंतर-मंतर पर डट गए हैं। बता दें कि भरत तिवारी के परिजन इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं और दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

बिहार में भोजपुर जिले के बहुचर्चित भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले में न्याय की लड़ाई देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने शनिवार को वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।चंदन तिवारी ने कहा कि लंबे समय से न्याय की उम्मीद में उनका परिवार संघर्ष कर रहा है।
अब जंतर-मंतर से उठने वाली आवाज सरकार और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से 12 जुलाई रविवार को वहां शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार को देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी। धरना-प्रदर्शन का आयोजन परशुराम दल की ओर से किया जा रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर शर्मा ने दिल्ली पुलिस एवं प्रशासन को पहले ही पत्र भेजकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना की जानकारी दी है।
पत्र में संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक होगा और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन किया जाएगा। धरना में भरत तिवारी के भाई चन्दन तिवारी सहित शुभचिंतक शामिल होंगे। परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और न्याय की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।
भरत तिवारी के माता-पिता का बयान दर्ज
इधर इस मामले में शनिवार को न्यायिक आयोग के अध्यक्ष के समक्ष भरत भूषण तिवारी के माता-पिता का बयान दर्ज किया गया। दोनों ने न्यायिक आयोग के अध्यक्ष रिटायर जज विनोद कुमार सिन्हा को एनकाउंटर की आंखोंदेखी सुनाई। बयान दर्ज करने के बाद आयोग के अध्यक्ष एनकाउंटर और इससे जुड़े सारे घटनाक्रमों की कड़ी जोड़ रहे हैं। बयान दर्ज कराने के लिए भरत भूषण तिवारी के माता-पिता को सोमवार को आयोग बुलाया गया था। इसके लिए बाकायदा समन दिया गया था। दोनों कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच आरा स्थित आयोग के कार्यालय पहुंचे थे। हालांकि आयोग के समन के बाद भी भरत भूषण तिवारी के भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी बयान दर्ज कराने नहीं पहुंच सके। दोनों का बयान दर्ज कराने के लिए अलग से समय की मांग की गयी है। इधर, गवाही देने के बाद भरत भूषण तिवारी के माता-पिता ने मीडिया से भी बातचीत की।
मां आशा देवी ने बताया कि उन्होंने आयोग के अध्यक्ष के समक्ष एनकाउंटर का पूरा सच रखा है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी अध्यक्ष को दी है। भरत भूषण तिवारी का मोबाइल वापस कराने और हत्या के आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की मांग भी की है। वहीं पिता काशी नाथ तिवारी ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष को बताया कि घटना के दिन शाहपुर थाने की पुलिस की ओर से उन्हें सुबह से शाम तक थाने में कैद कर रखा गया था। उसी दौरान पुलिस की ओर से उनके बेटे भरत भूषण तिवारी को मार डाला गया। आयोग के अध्यक्ष की उपस्थिति में दोनों का बयान रिकार्ड किया गया है। तेजी से चल रही कार्रवाई को लेकर माता-पिता ने संतोष जाहिर किया है। कहा कि अब न्याय की उम्मीद जगी है, लेकिन गिरफ्तारी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
अब इस मामले में आगामी सोमवार 13 जुलाई को न्यायिक आयोग के समक्ष गवाहों का बयान दर्ज किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सोमवार को प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जायेंगे। इधर, इस मामले में आरा की अदालत में भी गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। उसके तहत बुधवार को भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी, भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी, जबकि शुक्रवार को बिलौटी गांव में बसाये गये जवइनिया गांव की चार विस्थापित महिलाओं का बयान कलमबंद किया गया था। इधर, शनिवार को भरत भूषण तिवारी के माता-पिता का बयान दर्ज कराये जाने को लेकर न्यायिक आयोग के कार्यालय की सुरक्षा सख्त कर दी गई थी। इंस्पेक्टर स्तर के एक अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात किया गया था।
आयोग कार्यालय परिसर में हर आने-जाने वाले की निगरानी की जा रही थी। बता दें कि 17 जून को बिलौटी गांव में उसी गांव के काशी नाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था। एनकाउंटर के समय भरत भूषण तिवारी अपने फेसबुक पर लाइव था। उसमें देखा जा रहा था कि भरत भूषण तिवारी की ओर से हथियार फेंक दिया गया था। उसके बाद फेसबुक लाइव बंद हो गया था। आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की ओर से हथियार फेंके जाने के बाद पुलिस की ओर से उसे गोली मार दी गयी थी। घटना के बाद से ही काफी बवाल मचा हुआ है।
भरत भूषण तिवारी के परिजनों की ओर से उसे फर्जी मुठभेड़ बताया जा रहा है। उस मामले में भरत तिवारी की मां आशा देवी के बयान पर मुठभेड़ में शामिल जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश शर्मा और थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद पटना उच्च न्यायालय के रिटायर जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है।


