
23 साल बाद सप्रीम कोर्ट से बिहार की महिला को इंसाफ, सीजेआई की गंभीर टिप्पणी जान लीजिए
मामला 21 मार्च, 2002 का है, जब बख्तियारपुर स्टेशन पर भारी भीड़ के कारण भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से एक यात्री विजय सिंह ट्रेन से गिर गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में पत्नी संयोगिता देवी ने मुआवजे का दावा किया था।
इंसाफ के लिए भटकती बिहार की एक महिला को 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। सर्वोच्च न्यायालय ने रेल हादसे में पति की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महिला को रेलवे से करीब 9 लाख रुपये मुआवजा दिलाया। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले में रेलवे की ओर से दाखिल हलफनामे को रिकार्ड पर लेते हुए टिप्पणी की कि हम एक गरीब व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं और कुछ नहीं। कोर्ट के आदेश पर रेलवे ने उक्त मिला को मुआवेज की 9 लाख की राशि का भुगतान कर दिया है।
दरअसल, यह मामला 21 मार्च, 2002 का है, जब बख्तियारपुर स्टेशन पर भारी भीड़ के कारण भागलपुर-दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से एक यात्री विजय सिंह ट्रेन से गिर गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में पत्नी संयोगिता देवी ने मुआवजे का दावा किया था। रेलवे ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन की मदद से विधवा संयोगिता का पता लगाकर उनको मुआवजे की रकम का भुगतान कर दिया गया है। रेलवे ने बताया कि स्थानीय पुलिस की मदद से अपीलकर्ता के निवास से पैन, आधार कार्ड और बैंक विवरण एकत्र करने के लिए एक कर्मचारी भेजा गया था। इसके बाद महिला ने 10 नवंबर, 2025 को स्पीड पोस्ट से अपने बैंक खाते की जानकारी मुहैया करा दी।
पता करने का था आदेश
शीर्ष अदालत ने रेलवे को सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि विधवा को रेलवे द्वारा उचित मुआवजा मिले। कोर्ट ने नालंदा के एसएसपी और बख्तियारपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी को भी निर्देश दिया था कि वे महिला का पता लगाए और उसके दावे की स्वीकृति और अवार्ड की गई राशि प्राप्त करने के उसके अधिकार के बारे में सूचित करें। आदेश का पालन करते हुए रेलवे ने महिला को मुआवजे की राशि उपलब्ध करा दिया है।





