
...जब धर्मेंद्र ने खाई सरसों का साग और मक्के की रोटी, बिहार से रहा खास कनेक्शन
Dharmendra Deol: धर्मेंद्र के निधन की सूचना मिलते ही सोमवार देर शाम फारबिसगंज स्थित गुरुद्वारा में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के पुरुष और महिलाएं जुटे। गुरुद्वारा परिसर में शांत वातावरण के बीच धर्मेंद्र की आत्मा की शांति के लिए अरदास की गई और सभी ने माथा टेककर श्रद्धांजलि अर्पित की।
Dharmendra Deol: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन की खबर ने जहां पूरे देश की आंखें नम कीं, वहीं फारबिसगंज का सिख समुदाय भी शोकाकुल हो उठा। वर्ष 1970 में ‘डागडर बाबू’ फिल्म की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र करीब चार से पांच दिनों तक यहां के सिख परिवार जोगिंदर आहूजा के पुत्र देशराज आहूजा के घर ठहरे थे और उन्होंने स्व. सरदार सुजान सिंह के घर भी खाना खाया था। उनकी स्मृतियां आज भी इन परिवारों ने संजोकर रखी हैं।
स्व. देशराज आहूजा के पौत्र और जोगिंदर आहूजा के पुत्र अंशु आहूजा बताते हैं कि उनकी दादी स्व. चन्नी देवी ने अपने हाथों से तैयार धर्मेंद्र को सरसों का साग और मक्के की रोटी खिलाई थी। सफेद एंबेसडर कार में पर्दा लगाकर आने वाले धर्मेंद्र, पद्मा खन्ना और जया भादुरी की यादें आज भी इन परिवारों और आसपास के सिख समुदाय में ताजा हैं।
धर्मेंद्र के निधन की सूचना मिलते ही सोमवार देर शाम फारबिसगंज स्थित गुरुद्वारा में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के पुरुष और महिलाएं जुटे। गुरुद्वारा परिसर में शांत वातावरण के बीच धर्मेंद्र की आत्मा की शांति के लिए अरदास की गई और सभी ने माथा टेककर श्रद्धांजलि अर्पित की। “जो बोले सो निहाल…, सत श्री अकाल” की गूंज के साथ श्रद्धांजलि सभा भावनाओं से भर उठी।
इस मौके पर रणजीत कौर, जसमीत कौर, लता बुद्धि राजा, जसवीर आहूजा, दीप कौर, रिंकी आहूजा, मोनिका आहूजा, मनीषा और अमरजीत कौर ने बताया कि भले उन्होंने धर्मेंद्र को देखा नहीं था, लेकिन उनके परिवार और शहर में धर्मेंद्र के ठहरने की कहानियां पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं। यही कारण है कि धर्मेंद्र के जाने से यहां के सिख समुदाय को ऐसा अहसास हो रहा है, मानो परिवार का कोई अपना बिछड़ गया हो।
मील का पत्थर साबित होती ‘डाग्दर बाबू’
रेणु के छोटे बेटे व सृजनधर्मी दक्षिणेश्वर प्रसाद राय पप्पू कहते हैं कि यदि ‘डाग्दर बाबू’ रिलीज हो गयी होती तो वह फिल्म जगत में मील का पत्थर साबित होती। इस फिल्म में आरडी बर्मन का मधुर संगीत के साथ-साथ किशोर, लता व आशा दीदी स्वर के लाजवाब गीत सुनने को मिलता। धर्मेंद्र, जया, उत्पल दत्त, पद्मा खन्ना, मोहन चोटी, राज खासला, काली बनर्जी जैसे दिग्गज इस फिल्म से जुड़े थे। लेकिन इसका हश्र इतना बुरा होगा, कभी सोचा न था। बहरहाल धर्मेन्द्र के निधन से रेणु जनपद के लोग दोहरी पीड़ा झेल रहे हैं। पहले ‘डाग्दर बाबू’ फिल्म का दशकों से इंतजार और अब धर्मेन्द्र के निधन का दुखद खबर। सच कहें तो ही-मेन के निधन से उनके चहेते सदमे में हैं।





