निशांत कुमार ध्यान दें! बिहार में PHC के 80% डॉक्टर नहीं जानते CPR का तरीका, हार्ट अटैक में क्या करें?
बिहार के पीएचसी और सदर अस्पतालों के चिकित्सक बारी-बारी से प्रशिक्षण लेने आईजीआईएमएस पहुंच रहे हैं। पता चला है कि पीएचसी के 80 फीसदी डॉक्टरों को सीपीआर का सही तरीका नहीं आता।

Bihar News: दिल का दौरा पड़ने पर तीन मिनट के भीतर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने से व्यक्ति की जान सकती है। इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि पिछले छह माह के दौरान प्रशिक्षण के लिए पहुंचे 300 डॉक्टरों में से 80 फीसदी को सीपीआर देना ही नहीं आता।
राज्यभर के पीएचसी और सदर अस्पतालों के चिकित्सक बारी-बारी से प्रशिक्षण लेने आईजीआईएमएस पहुंच रहे हैं। पीएचसी के डॉक्टरों में इस प्रक्रिया की समझ न होने के कारण प्रशिक्षण कार्यक्रम का हर दो महीने पर कराने का निर्णय लिया गया है। आईजीआईएमएस में एनईएलएस (नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट) स्किल सेंटर स्थापित है, जहां चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में बताया जाता है कि सीपीआर कब, कितनी देर और किस प्रकार देना चाहिए। दुर्घटना या हृदयगति रुकने की स्थिति में समय पर और सही तरीके से सीपीआर देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
बुनियादी जीवन रक्षक प्रणाली की जानकारी से भी अनभिज्ञ
जब चिकित्सकों से बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) यानी बुनियादी जीवन रक्षक प्रणाली के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि लगभग 50 फीसदी चिकित्सकों को इसकी भी पर्याप्त जानकारी नहीं है। डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, मरीज के बेहोश होने और सांस नहीं लेने की स्थिति की पहचान बीएलएस का पहला चरण है। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर सीपीआर शुरू की जाती है। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी केवल चिकित्सकों ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी होनी चाहिए।
सीपीआर देने की सही प्रक्रिया
● हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले मरीज को समतल पर लिटाएं
● कंधे हिलाकर देखें कि होश में है या नहीं।
● होश में न होने पर छाती के बीचों-बीच एक हाथ की हथेली रखें।
● दूसरे हाथ को पहले हाथ के ऊपर रखें और दोनों की उंगलियों को आपस में फंसा लें।
● कोहनियों को सीधा रखते हुए छाती को दो इंच तक दबाएं।
● रोगी का सिर थोड़ा पीछे झुकाएं और नाक को उंगलियों से बंद करें
● मुंह उसके मुंह पर लगाकर दो बार हवा दें
● 30 बार छाती दबाने, दो बार सांस देने की प्रक्रिया दोहराते रहें, जब तक व्यक्ति सांस लेना शुरू न कर दे या प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीएचसी और सदर अस्पतालों में गंभीर मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। प्रशिक्षण में पाया गया कि काफी चिकित्सकों को सीपीआर की पूरी जानकारी नहीं है। इसीलिए प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित होगा। -डॉ. संजीव कुमार, नोडल अधिकारी, नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट, बिहार शाखा


