50 रुपए फीस, 5 साल की वैलिडिटी; बिहार में जमीन मजबूत करने का कांग्रेस का नया फार्मूला समझिए

Jayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार कांग्रेस ने 'सृजन साथी' अभियान शुरू किया है, जिसके तहत मात्र 50 रुपए की फीस देकर 5 साल के लिए पार्टी से जुड़ा जा सकता है। बीपीसीसी ऐप के जरिए होने वाले इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष नेतृत्व से सीधे जोड़ना है। इसमें महिलाओं और पिछड़े वर्गों के.…

50 रुपए फीस, 5 साल की वैलिडिटी; बिहार में जमीन मजबूत करने का कांग्रेस का नया फार्मूला समझिए

Bihar News: बिहार की राजनीति में हाशिए पर चल रही कांग्रेस ने अब 'डिजिटल' और 'जमीनी' कनेक्ट का एक अनोखा मेल तैयार किया है। सदाकत आश्रम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने 'सृजन साथी' जनसंपर्क अभियान की घोषणा की। इस अभियान का सबसे दिलचस्प पहलू इसकी फीस और सदस्यता की अवधि है। कांग्रेस का मानना है कि यह '50 रुपए वाला फार्मूला' पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आम जनता के बीच की खाई को पाटने का काम करेगा।

क्या है 50 रुपए का गणित?

कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए पार्टी से जुड़ना बेहद आसान और सस्ता बना दिया है। अब कोई भी व्यक्ति मात्र 50 रुपए की फीस देकर 'सृजन साथी' के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है। खास बात यह है कि एक बार रजिस्ट्रेशन कराने के बाद इसकी वैलिडिटी पूरे 5 साल तक रहेगी। पार्टी का तर्क है कि मात्र 10 रुपए प्रति वर्ष के औसत खर्च पर कोई भी व्यक्ति कांग्रेस की विचारधारा और उसके संगठनात्मक पदों से सीधे जुड़ सकेगा।

डिजिटल होगा रजिस्ट्रेशन

इस अभियान को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए कांग्रेस ने बीपीसीसी (BPCC) ऐप का सहारा लिया है, जिसके जरिए जमीनी कार्यकर्ता अब सीधे शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में रह सकेंगे। रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य शर्त यह है कि व्यक्ति को बिहार का पंजीकृत मतदाता होना चाहिए। इसके साथ ही, कांग्रेस ने इस डिजिटल ड्राइव में सामाजिक संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा है, इसमें महिलाओं, ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC), अल्पसंख्यक, एससी-एसटी (SC-ST) और दिव्यांगों के लिए पंजीकरण में आरक्षण की पुख्ता व्यवस्था की गई है ताकि हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

संगठन को संजीवनी देने की कोशिश

पार्टी के भीतर अक्सर यह शिकायत रहती थी कि जमीनी कार्यकर्ताओं की बात आलाकमान तक नहीं पहुँचती। 'सृजन साथी' अभियान इसी गैप को भरने के लिए लाया गया है। राजेश राम ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य लक्ष्य पार्टी के संगठनात्मक पदों को सीधे आम जनता और कार्यकर्ताओं से जोड़ना है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि चुनावों के दौरान बूथ स्तर पर कांग्रेस की स्थिति भी मजबूत होगी।

इसके सियासी मायने क्या होंगे?

एक्स्पर्ट्स का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम 'क्राउड फंडिंग' और 'मास मोबिलाइजेशन' का एक बेहतरीन उदाहरण है। 50 रुपए जैसी छोटी रकम देकर लोग जुड़ाव महसूस करेंगे और 5 साल की लंबी अवधि उन्हें पार्टी के प्रति वफादार बनाए रखने में मदद करेगी। ऐसे समय में जब भाजपा और राजद जैसे दल अपने कैडर को डिजिटल रूप से सक्रिय कर चुके हैं, कांग्रेस का यह 'सृजन साथी' फार्मूला बिहार में कितना 'सृजन' कर पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। वर्तमान में वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'हिन्दुस्तान' की बिहार टीम के लिए राजनीति, क्राइम और जनसरोकार से जुड़ी बड़ी खबरों को बेहद आक्रामकता और गहराई के साथ कवर कर रहे हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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