4 हजार पिस्टल, राइफल की 1.2 लाख गोलियां; बिहार पुलिस 43 करोड़ खर्च कर ताकत बढ़ाएगी
ईशापुर राइफल फैक्ट्री से 9 एमएम बोर की चार हजार ऑटोमेटिक पिस्टल की खरीद होगी। वहीं, पुणे के खड़की स्थित गोली फैक्ट्री से एसएलआर में इस्तेमाल होने वाली 7.62 एमएम बोर की 60 हजार गोलियां खरीदी जाएंगी। कुल मिलाकर 4 हजार पिस्टल और 1 लाख 20 हजार गोलियों की खरीद होगी।

बिहार पुलिस एसएलआर और इंसास राइफल की एक लाख 20 हजार गोलियां खरीदेगी। इसके साथ ही 42.28 करोड़ की राशि से चार हजार नई 9 एमएम पिस्टल की भी खरीदारी होगी। इसके लिए गृह विभाग ने पुलिस महकमे को 43 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। हथियार खरीद के लिए इस राशि की अग्रिम निकासी की भी मंजूरी दे दी गई है। गृह विभाग आरक्षी शाखा के संयुक्त सचिव कमल नयन ने पत्र जारी किया है। इस खरीद के बाद बिहाल पुलिस अपराधियों से निपटने और कानून का राज स्थापित करने में अधिक सक्षम होगी।
बताया गया है कि ईशापुर राइफल फैक्ट्री से 9 एमएम बोर की चार हजार ऑटोमेटिक पिस्टल की खरीद होगी। वहीं, पुणे के खड़की स्थित गोली फैक्ट्री से एसएलआर में इस्तेमाल होने वाली 7.62 एमएम बोर की 60 हजार गोलियां खरीदी जाएंगी। इस पर 62 लाख 97 हजार 600 रुपये खर्च आएगा। इस पर जीएसटी भी देय होगा। इसके अलावा, वरणगांव स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से इंसास राइफल में इस्तेमाल होने वाली 5.56 एमएम बोर की 60 हजार गोलियों की खरीदारी होगी। इस पर 39.64 लाख रुपये खर्च होंगे।
आवंटित राशि की निकासी एवं व्ययन की जिम्मेवारी सहायक पुलिस महानिरीक्षक (निरीक्षण) को दी गई है। निकासी सचिवालय कोषागार की से जाएगी। एक माह में इसका व्यय कर लेने के लिए कहा गया है। इससे संबंधित तैयारी विभाग की ओर से की जा रही है। बताया गया है कि समय से हथियारों की खरीद का काम पूरा कर लिया जाएगा।
लक्ष्याभ्यास में खत्म होगा पुरानी गोलियों का स्टॉक
बिहार पुलिस के सभी अधिकारी से लेकर जवान तक को हर साल वार्षिक लक्ष्याभ्यास में शामिल होना है। साल के शुरुआत जनवरी से लेकर मार्च-अप्रैल तक सभी जिलों में लक्ष्याभ्यास किया जाता है। इसमें प्रत्येक पुलिस कर्मियों को कम से कम 10 गोलियां फायर करनी होती है। मुजफ्फरपुर में आठ अप्रैल तक लक्ष्याभ्यास होना है। झपहां स्थित सीआरपीएफ के फायरिंग बट पर जिले के करीब 2500 पुलिस कर्मी निशाना साधेंगे। इसमें मुजफ्फरपुर जिले की 25000 गोलियां खत्म होंगी।
इसी तरह अन्य जिलों में भी लक्ष्याभ्यास के दौरान फायरिंग की जाएगी। बताया गया कि इसमें गोलियों के पुराने स्टॉक खत्म होंगी, जिसकी पूर्ति के लिए नई गोलियों की खरीदारी से होगी।
बिहार पुलिस में अभी अधूनिकीकरण की जरूरत है। हथियारों की उपलब्धता के साथ उनकी ट्रेनिंग की आवश्यकता है ताकि उपद्रवी तत्वों से निपटा जा सके। राज्य में कानून व्यवस्था की बहाली बड़ा मामला है। विपक्षी दल अक्सर बिहार पुलिस की कार्यशैल पर सवाल उठाते रहते हैं।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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