Ayodhya Verdict Live Updates, Ram Mandir case, Ayodhya verdict date, अयोध्या विवाद, अयोध्या फ़ैसला आज - Hindustan DA Image
12 नबम्बर, 2019|11:52|IST

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अयोध्या
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा समाप्त किया

70 साल बाद अयोध्या जमीन विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने सर्वसम्मति से शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज की।

और पढ़े9 नवंबर 2019
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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं इकबाल अंसारी, जानें क्या कहा

उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी। संविधान पीठ ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह सरकारी जमीन है।

और पढ़े9 नवंबर 2019
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अयोध्या फैसले का सभी मिलकर सम्मान करें: MP CM कमलनाथ

अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सभी को मिलकर फैसले का सम्मान करना चाहिए और किसी प्रकार के उत्साह, जश्न या विरोध का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

और पढ़े9 नवंबर 2019
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला- अयोध्या की विवादित जमीन रामलला को, मस्जिद के लिए वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कह दिया कि अयोध्या की विवादित ढांचे वाली जमीन पर मंदिर बनेगा।

और पढ़े9 नवंबर 2019
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अयोध्या के फैसले में 5 में से एक जज ने जोड़े थे 116 पन्ने, जानिए इसमें क्या है खास

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संविधानिक पीठ ने दशकों पुराने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसके तहत विवादित जमीन को जहां रामलला के मंदिर के लिए सौंप दिया गया है

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी नहीं, जानिए क्या है और विकल्प

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को आयोध्या भूमि विवाद पर अपने फैसले में कहा कि हिंदुओं की इस बात का स्पष्ट सबूत हैं कि हिंदू मान्यता के अनुसार राम का जन्म विवादित स्थान पर हुआ था।

और पढ़े9 नवंबर 2019
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'बाबरी मस्जिद' और 'राम मंदिर' को लेकर SC ने फैसले में क्या कहा, जानें सब कुछ

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को आयोध्या जमीन विवाद मामले इस बात को माना कि ढांचा गिराना कानून व्यवस्था का उल्लंघन था। कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता।

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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, खाली जमीन पर बाबरी मस्जिद का नहीं हुआ था निर्माण

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि हिंदू मानते हैं कि भगवान राम विवादित स्थान पर पैदा हुए थे। उन्होंने यह बात खचाखच भरे अदालत कक्ष में अयोध्या भूमि विवाद का एकमत फैसला पढ़ते हुए कही।

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फैसले के बाद अयोध्या बेंच के जजों को डिनर पर ले गए CJI रंजन गोगोई

अयोध्या पर फैसला सुनाने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पीठ के अन्य जजों को शनिवार रात डिनर के लिए लेकर गए। पांच जजों की पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस ए नजीर, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ शामिल थे।

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अयोध्या फैसला: मस्जिद के नीचे था एक मंदिर, ASI से पहले यूपी पुरातत्व विभाग ने दिए थे सुबूत

अयोध्या में विवादित स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की खुदाई से पहले उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग ने 1990 से 1992 के बीच अपने सर्वेक्षण में यह तथ्य खोज निकाले थे कि मस्जिद विवादित स्थल पर मंदिर के अवशेष पर बनाई गई थी। यही तथ्य उच्चतम न्यायालय में अहम आधार साबित हुए।

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यूपी में नौ से 11 नवंबर तक स्कूल कॉलेज बंद

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर एक नोटिस के माध्यम से शुक्रवार शाम जानकारी दी गई कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ शनिवार सुबह साढ़े दस बजे इस मामले में फैसला सुनायेगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कल नौ नवंबर से 11 नवंबर तक प्रदेश के सभी स्कूल कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने की घोषणा की।

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अयोध्या विवाद: 1528 को बाबरी मस्जिद का निर्माण

अयोध्या विवाद करीब साढ़े चार सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। राम मंदिर और बा‍बरी मस्जिद को लेकर दो समुदायों के बीच यह विवाद 1528 से चला आ रहा है। माना जाता है कि मुगल बादशाह बाबर के कमांडर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। इसके बाद महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर शामियाना तानने की अनुमति मांगी थी।

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अयोध्या केस ब्रिटिश शासकों ने 1859 में दी थी प्रार्थना करने की अनुमति

अयोध्या में 1859 में ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिन्दुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी थी। इससे पहले अयोध्या विवाद में पहली बार हिंसा 1853 में हुई और कुछ सालों में ही मामला गहरा गया था।

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1885 में पहली बार जिला अदालत में पहुंचा था अयोध्या विवाद का मामला

अयोध्या विवाद में पहली बार हिंसा 1853 में हुई और कुछ सालों में ही मामला गहरा गया। 1885 में विवाद पहली बार जिला न्यायालय पहुंचा। निर्मोही अखाड़े के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मस्जिद परिसर में मंदिर बनवाने की अपील की पर कोर्ट ने मांग खारिज कर दी।

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अयोध्या विवाद: 1886 में फैजाबाद कोर्ट ने पहली बार सुनाया था फैसला

1885 में अयोध्या मामला पहली बार कोर्ट पहुंचा। महंत रघुवर दास ने फैजाबाद की अदालत में मुकदमा दर्ज कर विवादित ढांचे में पूजा की इजाजत मांगी। इसके बाद 1886 में फैजाबाद कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मस्जिद हिंदुओं के पवित्र स्थल पर बनी है।

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अयोध्या केस: 1949 में केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं

अयोध्या मामला साल दर साल आगे बढ़ता गया और फिर साल 1949 में विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं। इसके बाद रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की। इधर निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।

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अयोध्या विवाद: पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए 1950 में याचिका दायर

अयोध्या में पहली बार 1950 रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की। जबकि इससे पहले साल 1949 में विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं। जबकि 1934 फिर दंगे हुए और मस्जिद की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश सरकार ने दीवार और गुंबदों को फिर से बनवाया।

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अयोध्या विवाद: 1959 निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की

अयोध्या विवाद मामला साल दर साल बढ़ता गया। इसके बाद 1959 निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की। अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट 9 नवंबर यानि शनिवार को अपना फैसला सुनाएगा।

1959
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अयोध्या विवाद: 1981 वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की

अयोध्या विवाद में उस समय नया मोड़ आ गया जब साल 1981 में उत्तरप्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया। जबकि इससे पहले 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।

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अयोध्या विवाद: 1 फरवरी 1986 को हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश

अयोध्या विवाद मामला कोर्ट में पहुंच जाने के बाद 1 फरवरी 1986 को स्थानीय अदालत ने सरकार को हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश दिया। जबकि इससे पहले निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर कोर्ट में याचिका दायर कर चुका था। कुछ साल बाद उत्तरप्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की।

1 फरवरी 1986
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अयोध्या विवाद: 14 अगस्त 1986 को HC ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

अयोध्या विवाद मामले में स्थानीय अदालत के हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश के बाद जब मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच तो 14 अगस्त 1986 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित ढांचे के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

14 अगस्त 1986
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अयोध्या विवाद: 6 दिसम्बर 1992 जब बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाया गया

अयोध्या मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब 6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाया गया। बाबरी मस्जिद पर कारसेवकों की भीड़ भड़की। कारसेवकों ने इसके स्थान पर एक मेक-शिफ्ट मंदिर का निर्माण किया। इसने देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगों को जन्म दिया। मस्जिद के विध्वंस के 10 दिन बाद, प्रधान मंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस और सांप्रदायिक दंगों के लिए अग्रणी परिस्थितियों पर ध्यान देने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम एस लिब्रहान के नेतृत्व में एक समिति बनाई।

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अयोध्या विवाद: 3 अप्रैल 1993 को अधिग्रहण कानून बना

अयोध्या में विवादित क्षेत्र में केंद्र द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए 3 अप्रैल 1993 को 'अयोध्या में निश्चित क्षेत्र अधिग्रहण कानून बना। कई रिट याचिकाएं दायर की गईं जिनमें एक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस्माइल फारूकी द्वारा दायर याचिका शामिल थी। द्र सरकार द्वारा भूमि के अधिग्रहण की सुविधा के लिए, अयोध्या अधिनियम, 1993 में कुछ क्षेत्रों का अधिग्रहण किया।

3 अप्रैल 1993
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अयोध्या विवाद: 24 अक्टूबर 1994 को कोर्ट ने कहा मस्जिद इस्लाम से जुड़ा हुआ नहीं है

अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक इस्माइल फारूकी मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ा हुआ नहीं है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने 3: 2 के बहुमत से कुछ क्षेत्रों के अधिग्रहण की संवैधानिकता को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मस्जिद में नमाज की पेशकश इस्लाम के लिए अभिन्न नहीं थी जब तक कि मस्जिद का इस्लाम में कोई विशेष महत्व नहीं था।

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अयोध्या विवाद: अप्रैल 2002 में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू हुई

अयोध्या में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर अप्रैल 2002 में सुनवाई शुरू हुई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अयोध्या शीर्षक विवाद की सुनवाई शुरू की। इसके बाद अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को आदेश दिया वह यह निर्धारित करने के लिए कि मस्जिद के नीचे कोई मंदिर है, उस जगह की खुदाई करें।

अप्रैल 2002
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अयोध्या विवाद: 30 सितम्बर 2010 को हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया

अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन तरीकों से भूमि का विभाजन किया। सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला विराजमान को एक-एक तिहाई जमीन दी। फैसले में पास के राम चबूतरा और सीता रसोई भी निर्मोही अखाड़े को गया। आपको बता दें कि यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति एसयू खान और न्यायमूर्ति डीवी शर्मा की बेंच ने सुनाया था।

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अयोध्या विवाद: 9 मई 2011 सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई

अयोध्या जमीन विवाद को लेकर दिए गए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को उच्चतम न्यायालय ने फैसले पर रोक लगाई। बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन तरीकों से भूमि का विभाजन किया था। हाई कोर्ट ने न्यायालय ने 2:1 बहुमत से विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।

9 मई 2011
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अयोध्या विवाद: 26 फरवरी 2016 सुब्रमण्यम स्वामी ने SC में याचिका दायर की

अयोध्या जमीन विवाद को लेकर हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाद 26 फरवरी 2016 को सुब्रमण्यम स्वामी ने उच्चतम न्यायलय में याचिका दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने की मांग की।

26 फरवरी 2016
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अयोध्या विवाद: 21 मार्च 2017 को अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया

अयोध्या जमीन विवाद मामले पर पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान निकालने का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की प्रकिया की शुरुआत चार सप्ताह में शुरू होनी चाहिए और आठ सप्ताह के अंदर इसे पूरा कर लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार फैज़ाबाद में मध्यस्थों को सभी सुविधाएं प्रदान करें।

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अयोध्या विवाद: 7 अगस्त 2017 को तीन सदस्यीय पीठ का गठन

अयोध्या जमीन विवाद को लेकर संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त 2017 को तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया जो 1994 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इसके अगले दिन उत्तर प्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है।

7 अगस्त 2017
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अयोध्या विवाद: 11 सितम्बर 2017 को दो अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के आदेश

उच्चतम न्यायालय ने 11 सितम्बर 2017 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि दस दिनों के अंदर दो अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करें जो अयोध्या विवादिस्त स्थल की यथास्थिति की निगरानी करे। इसके अलावा कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर और भी कई बातें कहीं।

11 सितम्बर 2017
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अयोध्या विवाद: 14 मार्च 2018 को सभी अंतरिम याचिकाएं खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती देते हुए 32 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने 1 दिसम्बर 2017 सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की। इसके बाद 8 फरवरी 2018 से सिविल याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई शुरू की। सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने स्वामी की याचिका सहित सभी अंतरिम याचिकाओं को खारिज किया।

14 मार्च 2018
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अयोध्या विवाद: 6 जुलाई 2018 को यूपी सरकार ने कोर्ट ने दलील दी

इसी बीच राजीव धवन ने 6 अप्रैल 2018 को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार के मुद्दे को बड़े पीठ के पास भेजने का आग्रह किया। जबकि 6 जुलाई 2018 को यूपी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि कुछ मुस्लिम समूह 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार की मांग कर सुनवाई में विलंब करना चाहते हैं।

6 जुलाई 2018
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अयोध्या विवाद: 27 सितम्बर 2018 को संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इनकार

उच्चतम न्यायालय ने 27 सितम्बर 2018 को मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को तीन सदस्यीय नयी पीठ में होगी। इसके बाद 29 अक्टूबर 2018 को उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हफ्ते में तय की। इस पीठ को फैसला लेना था कि मामले की सुनवाई कब होगी।

27 सितम्बर 2018
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अयोध्या विवाद: 12 नवम्बर 2018 को हिंदू महासभा की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई इसी बीच 12 नवम्बर 2018 को अखिल भारत हिंदू महासभा की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से उच्चतम न्यायालय ने इंकार कर दिया। इसके बाद 4 जनवरी 2019 को उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मालिकाना हक मामले में सुनवाई की तारीख तय करने के लिए उसके द्वारा गठित उपयुक्त पीठ दस जनवरी को फैसला सुनाएगी।

12 नवम्बर 2018
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अयोध्या विवाद: 8 जनवरी 2019 को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन

उच्चतम न्यायालय ने 8 जनवरी 2019 को मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया जिसकी अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने की और इसमें न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ को शामिल किया गया।

8 जनवरी 2019
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अयोध्या विवाद: 10 जनवरी 2019 को न्यायमूर्ति यू यू ललित ने खुद किया अलग

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल ही रही थी कि न्यायमूर्ति यू यू ललित ने मामले से खुद को अलग कर लिया। जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई 29 जनवरी को नयी पीठ के समक्ष तय की।

10 जनवरी 2019
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अयोध्या विवाद: 25 जनवरी 2019 को संविधान पीठ का पुनर्गठन

उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का पुनर्गठन किया। नयी पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर शामिल थे।

25 जनवरी 2019
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अयोध्या विवाद: 6 मार्च 2019 मध्यस्थता को लेकर फैसला सुरक्षित

उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता का सुझाव दिया और फैसले के लिए पांच मार्च की तारीख तय की जिसमें तय किया जाता कि मामले को अदालत की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ के पास भेजा जाए अथवा नहीं। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा कि क्या जमीन विवाद को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है या नहीं।

6 मार्च 2019
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अयोध्या विवाद: 8 मार्च 2019 को तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति गठित

अयोध्या मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या भूमि के मालिकाना हक से जुड़े विवाद के सर्वमान्य समाधान की संभावना तलाशने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ. एम. आई. कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति गठित की। इस समिति के अन्य सदस्यों में आध्यत्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल थे।

8 मार्च 2019
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अयोध्या विवाद: 10 मई 2019 को मध्यस्थता समिति को 15 अगस्त तक का समय

अयोध्या मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई 2019 को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया। तीन-सदस्यीय मध्यस्थता समिति के प्रमुख न्यायमूर्ति एफ.एम.आई. कलीफुल्ला ने मध्यस्थता प्रयासों में अब तक हुई प्रगति पर अदालत में रिपोर्ट पेश करते हुए और समय देने की मांग की जिसके बाद अदालत ने समय बढ़ाने का आदेश दे दिया।

10 मई 2019
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अयोध्या विवाद: 2 अगस्त 2019 को 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 2 अगस्त 2019 को कहा कि अयोध्या भूमि विवाद पर छह अगस्त से रोजाना सुनवाई होगी। मध्यस्थता को लेकर बनाई गई तीन सदस्यीय पैनल से कोई नतीजा नहीं निकल सका। मध्यस्थता पैनल की तरफ से गुरुवार को सौंपी गई रिपोर्ट के एक दिन बाद चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए इस पर रोजाना सुनवाई का फैसला किया।

2 अगस्त 2019
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अयोध्या विवाद: 16 अक्ट्रबर को मामले की सुनवाई पूरी

अयोध्या मामले में 6 अगस्त 2019 से रोजाना सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया था। उन्होंने कहा कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है। इसी तरह से एक दिन अलग-अलग पक्षों के वकील कोर्ट के सामने अपनी दलील देते रहे। पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन में सुप्रीम कोर्ट की इस पांच सदस्यी बेंच ने 16 अक्ट्रबर को इस मामले की सुनवाई पूरी की।

16 अक्ट्रबर 2019