क्या है E100 ईंधन? आम जनता को क्या फायदा? कहां तक पहुंचा एथेनॉल का सफर? जानिए सबकुछ
भारत इस समय क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी यानी साफ-सुथरे ईंधन की तरफ बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सड़कों पर E20 की कामयाबी के बाद अब सरकार और कंपनियों का पूरा ध्यान एक नए E100 ईंधन पर है।

भारत इस समय क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी यानी साफ-सुथरे ईंधन की तरफ बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सड़कों पर E20 (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) की कामयाबी के बाद अब सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों का पूरा ध्यान एक नए E100 ईंधन पर है। नीति निर्माताओं से लेकर कार बनाने वाली कंपनियों के बीच इस समय E100 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। इसे भारत के भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। यह न सिर्फ पॉल्यूशन को कम करेगा बल्कि पेट्रोल-डीजल पर हमारी निर्भरता को भी खत्म कर देगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है। साथ ही इससे आम जनता को क्या फायदा होने वाला है।
आखिर क्या होता है यह E100 ईंधन?
सरल शब्दों में कहें तो E100 का मतलब है लगभग 100 पर्सेंट शुद्ध एथेनॉल ईंधन। भारत में इंडियन ऑयल (IndianOil) द्वारा पेश किए गए 'एथेनॉल 100' में लगभग 93 से 93.5 पर्सेंट शुद्ध एथेनॉल होता है। इसमें सुरक्षा और गाड़ी की परफॉर्मेंस को स्थिर रखने के लिए 5 पर्सेंट पेट्रोल और कुछ को-सॉल्वेंट मिलाए जाते हैं। यह ईंधन खास तौर पर 'फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स' (FFVs) के लिए तैयार किया गया है। ये ऐसी गाड़ियां होती हैं जो अलग-अलग मात्रा वाले एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर बिना किसी दिक्कत के आसानी से दौड़ सकती हैं।
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क्यों वरदान है E100 ईंधन?
भारत के लिए E100 ईंधन का आना किसी बड़े आर्थिक बदलाव से कम नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 पर्सेंट कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। इस पर हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है। दुनिया भर में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें अक्सर ऊपर-नीचे होती रहती हैं। ऐसे में एथेनॉल का घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत का यह बड़ा खर्च बचेगा और हम ईंधन के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
कहां तक पहुंचा एथेनॉल का सफर?
भारत ने एथेनॉल ब्लेंडिंग के मामले में पिछले कुछ सालों में बहुत ही कमाल की तरक्की की है। पूरे देश में E20 पेट्रोल को सफलतापूर्वक रोलआउट करना एक मील का पत्थर साबित हुआ है। अब सरकार अगले फेज पर काम कर रही है, जिसके तहत एथेनॉल की मात्रा को लगातार बढ़ाते हुए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले समय में ऐसी गाड़ियां सड़कों पर आम हो जाएंगी जो बेहद आराम से E85 और E100 जैसे हाई-एथेनॉल मिक्स पर चल सकेंगी।
भारत में कहां मिल रहा है?
भारत में इस सफर की शुरुआत साल 2024 में ही हो गई थी। तब इंडियन ऑयल ने दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के करीब 183 पेट्रोल पंपों पर E100 ईंधन की बिक्री शुरू की थी। अगर पूरी दुनिया की बात करें तो ब्राजील एकमात्र ऐसा देश है जहां E100 ईंधन का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर खुलेआम किया जाता है। स्वीडन जैसे देश E85 का उपयोग कर रहे हैं। जबकि अधिकांश यूरोपीय देश अभी भी E5 से E10 जैसे कम एथेनॉल वाले ईंधन पर ही निर्भर हैं।
क्या हैं चुनौतियां और मौके?
पेट्रोल से E100 पर शिफ्ट होना कार कंपनियों के लिए एक बड़ा तकनीकी चैलेंज भी है। चूंकि एथेनॉल सामान्य पेट्रोल की तुलना में ज्यादा कोरोसिव होता है, इसलिए कंपनियों को ऐसे इंजन बनाने होंगे जो इस ईंधन को लंबे समय तक झेल सकें। हालांकि, इसमें अवसर भी बहुत बड़े हैं। हाई-एथेनॉल पर चलने वाले इंजन बेहतर परफॉर्मेंस और टॉर्क दे सकते हैं। साथ ही भविष्य में घरेलू स्तर पर बनने के कारण यह ईंधन आम काफी सस्ता भी साबित हो सकता है।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumarदेश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।
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