छंटनी! 1,00,000 लोगों को नौकरी से निकालने जा रही यह कार कंपनी, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

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फॉक्सवैगन अपने इतिहास का सबसे बड़ा संकट झेल रही है। कंपनी ने मैनेजमेंट और यूनियनों के साथ मिलकर इस दशक के अंत तक करीब 1,00,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है।

volkswagen is set to cut 100000 jobs by the end of this decade
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जर्मनी की दिग्गज कार कंपनी फॉक्सवैगन अपने इतिहास का सबसे बड़ा संकट झेल रही है। कंपनी ने मैनेजमेंट और यूनियनों के साथ मिलकर इस दशक के अंत तक करीब 1,00,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है। कंपनी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पहले से तय 50,000 नौकरियों की कटौती के अलावा अब 50,000 और पद खत्म किए जाएंगे। इस कड़े कदम से फॉक्सवैगन के कुल ग्लोबल वर्कफोर्स में से लगभग 15 पर्सेंट लोगों पर सीधी गाज गिरेगी। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इतने बड़े फैसले का आपकी गाड़ी और कंपनी की सर्विस पर क्या असर पड़ने वाला है।

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क्या है जॉब कट की बड़ी वजह?

कंपनी की हालत खराब होने के पीछे अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सुस्त पड़ती मांग और सबसे बढ़कर चीन की तरफ से मिल रही कड़ी चुनौती को मुख्य वजह बताया जा रहा है। फॉक्सवैगन ग्रुप के अंदर ऑडी और पोर्शे जैसे 10 बड़े कार ब्रांड आते हैं। कंपनी का मानना है कि आज के आर्थिक हालातों को देखते हुए वर्कफोर्स का साइज घटाना बेहद जरूरी हो चुका था। ऑटो सेक्टर में नौकरियों की इतनी बड़ी कटौती साल 2009 के उस दौर से भी कहीं ज्यादा बड़ी है, जब जनरल मोटर्स ने दिवालिया होने के बाद 50,000 नौकरियां खत्म की थीं।

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स्थानीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

नौकरियों में कटौती के साथ-साथ कंपनी जर्मनी में अपने चार मुख्य प्लांट्स हैनोवर, एमडेन, ज्विकाऊ और नेकारसुल्म के भविष्य को लेकर भी कोई गारंटी नहीं दे पा रही है। अगर कंपनी जर्मनी में अपने ये कारखाने बंद करती है, तो यह उसके इतिहास में पहली बार होगा कि अपने ही देश में कोई बड़ा प्लांट बंद करना पड़ रहा है। ज्विकाऊ प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि अगर कारखाने बंद होते हैं तो इसका सीधा बुरा असर पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था, कलपुर्जे बनाने वाले सप्लायर्स और आम लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा।

मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच लंबी खींचतान

इस बड़े फैसले को मंजूरी दिलाने के लिए कंपनी के मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच काफी लंबी और खींचतान भरी बातचीत हुई है। शुरुआत में जब 1,00,000 नौकरियों की बात मीडिया में लीक हुई, तो यूनियनों ने मैनेजमेंट पर काफी गुस्सा जताया और इसे बकवास करार दिया था। हालांकि, बाद में फॉक्सवैगन के सीईओ ओलिवर ब्लूमे ने बताया कि बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस फ्यूचर प्लान को मंजूरी दे दी है। यूनियन नेताओं का कहना है कि उन्होंने बातचीत के जरिए एक बीच का रास्ता निकाला है ताकि हालात और न बिगड़े। हालांकि, उन्होंने किसी भी प्लांट को पूरी तरह से बंद होने से बचाने का दावा किया है।

आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फॉक्सवैगन की गाड़ी चलाने वाले ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा। फिलहाल कंपनी अपना पूरा ध्यान खर्च घटाने, अपनी संरचना को आसान बनाने और बिजनेस को दोबारा पटरी पर लाने में लगा रही है। इतनी बड़ी छंटनी के बाद आने वाले दिनों में नई गाड़ियों की डिलीवरी, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सर्विसिंग में कुछ बदलाव या देरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वे ग्राहकों को किसी परेशानी से बचाते हुए अपने ब्रांड्स को भविष्य के हिसाब से और मजबूत बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

Ashutosh Kumar

लेखक के बारे में

Ashutosh Kumar

देश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।

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