यूपी में गाड़ी चलाते समय रहना होगा ज्यादा अलर्ट, चालान के नए सिस्टम से बच पाना नामुमकिन

Kumar Prashant Singh लाइव हिन्दुस्तान
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चालान का नया ऑटोमेटेड सिस्टम सड़क पर कार या बाइक चलाने वालों पर हर वक्त पैनी नजर रखने वाला है। यह सिस्टम वैलिड डॉक्यूमेंट्स के बिना चल रही गाड़ियों की ऑटोमैटिकली पहचान कर लेगा। 

यूपी में गाड़ी चलाते समय रहना होगा ज्यादा अलर्ट, चालान के नए सिस्टम से बच पाना नामुमकिन

ड्राइव करते हैं और यूपी में रहते हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। चालान का नया ऑटोमेटेड सिस्टम सड़क पर कार या बाइक चलाने वालों पर हर वक्त पैनी नजर रखने वाला है। उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) के फ्रेमवर्क पर डिवेलप किया हुआ एक ऑटोमेटेड ई-डिटेक्शन सिस्टम को लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद टेक्नोलॉजी के जरिए ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करवाना है।

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ऑटोमैटिकली पकड़ में आएंगी बिना वैलिड डॉक्यूमेंट्स वाली गाड़ियां

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दयाशंकर सिंह (स्वतंत्र प्रभार) ने इसके शुरुआत की घोषणा करते हुए कहा कि यह सिस्टम वैलिड डॉक्यूमेंट्स के बिना चल रही गाड़ियों की ऑटोमैटिकली पहचान कर लेगा और बिना इंसानी हस्तक्षेप के ई-चालान जारी करेगा। इस पहल का मकसद रोड सेफ्टी में सुधार करना, नियमों का पालन करने को बढ़ावा देना और एनफोर्समेंट को तेज और अधिक ट्रांसपेरेंट बनाना है।

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लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

शुरुआती रोलआउट में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने NIC लखनऊ को ई-डिटेक्शन मॉड्यूल को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इटौंजा टॉल प्लाजा और बाराबंकी-अहमदपुर टॉल प्लाजा पर शुरू करने का निर्देश दिया है। ट्रायल के पास होने के बाद, इस सिस्टम को धीरे-धीरे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिसमें अधिक टोल प्लाजा और हाइवे कॉरिडोर शामिल होंगे।

ट्रांसपोर्ट और नॉन-ट्रांसपोर्ट गाड़ियों की चेकिंग

पहले फेज में यह सिस्टम ट्रांसपोर्ट वीइकल्स की चेकिंग पर फोकस करेगा। इसमें फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस वैलिडिटी, पॉल्यूशन सर्टिफिकेश (PUCC), हाई सिक्योरिटी रेजिस्ट्रेशन प्लेट्स और रेजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन शामिल होगा। वहीं, नॉन-ट्रांसपोर्ट वीइकल्स के लिए यह सिस्टम रेजिस्ट्रेशन वैलिडिटी, इंश्योरेंस, PUCC, HSRP और डिक्लेयर्ड नॉन-यूसेज स्टेटस (जहां लागू) को वेरिफाइ करेगा।

कैसे काम करता है सिस्टम?

ई-डिटेक्शन सिस्टम टोल प्लाजा पर लगे हाई-रिजॉलूशन कैमरों का यूज करके गाड़ियों की नंबर प्लेट और FASTag की जानकारी को रियल टाइम में स्कैन करता है। इस डेटा की वैलिडिटी को कन्फर्म करने के लिए इसे तुरंत VAHAN जैसे नैशनल डेटाबेस से क्रॉस-चेक किया जाता है। इसमें अगर किसी वीइकल का इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, PUCC, परमिट या रजिस्ट्रेशन खत्म हो चुका है या खो गया है, तो सिस्टम ऑटोमैटिकली एक ई-चालान तैयार करता है, जो सीधे वीइकल ओनर के रेजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाता है।

इन स्टेट्स में पहले से यूज हो रहा सिस्टम

ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात जैसे राज्य, साथ ही दिल्ली-एनसीआर, पहले से ही इसी तरह की ई-डिटेक्शन सिस्टम को लागू कर रहे हैं या उनकी टेस्टिंग कर रहे हैं। NHAI और IHMCL ने वीइकल मूवमेंट डेटा को सही और आसानी से शेयर करने के लिए API डिवेलप किए हैं और अभी दिल्ली-एनसीआर में इसका टेस्ट चल रहा है।

(Photo: mathrubhumi)

Kumar Prashant Singh

लेखक के बारे में

Kumar Prashant Singh

प्रशांत को पत्रकारिता से जुड़े 13 साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रशांत ने करियर की शुरुआत टीवी न्यूज चैनल से की थी। इन्होंने टीवी चैनल के प्रोग्रामिंग, आउटपुट और प्रोमो डिपार्टमेंट में काम किया है। करीब 8 साल से यह डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं। प्रशांत अब डिजिटल मीडिया का जाना-माना नाम बन चुके हैं। इनकी टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल में खास रुचि है। इन्हें गैजेट्स और गाड़ियों के बारे में लिखना और पढ़ना काफी पसंद है। इनकी गैजेट्स और ऑटोमोबाइल की खबरें पाठकों को काफी पसंद आती हैं। साथ ही इनके रिव्यू पाठकों को नया गैजेट लेने या नई गाड़ी खरीदने में काफी मदद करते हैं। प्रशांत ने मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से की है। खाली समय में प्रशांत वेब सीरीज और मूवी देखते हैं। ड्राइविंग का काफी शौक है और मौका मिलते ही प्रशांत पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं। साथ ही फोन से अच्छे फोटो-वीडियो कैप्चर करना भी इनको काफी पसंद है। प्रशांत लाइव हिन्दुस्तान में बतौर डिप्टी चीफ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इससे पहले प्रशांत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में टेक सेक्शन के लिए लिखा करते थे।

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