इन राज्यों के लोग खरीद रहे हर 5 में से 2 इलेक्ट्रिक कारें, हथिया ली 35% मार्केट

Jan 21, 2026 12:50 am ISTSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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2025 में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु ने मिलकर भारत की कुल इलेक्ट्रिक कार बिक्री में 30 से 35 फीसदी तक की हिस्सेदारी हासिल की है। भारत में बिकने वाली हर 5 में से 2 इलेक्ट्रिक कारें इन्हीं राज्यों से आती हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

इन राज्यों के लोग खरीद रहे हर 5 में से 2 इलेक्ट्रिक कारें, हथिया ली 35% मार्केट

भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। जहां साल 2020 में सिर्फ 3,252 इलेक्ट्रिक कारें बिकी थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा करीब 1.7 लाख यूनिट तक पहुंच गया। लेकिन, इस तेज ग्रोथ के बीच एक दिलचस्प बात सामने आती है। देश में बिकने वाली हर 5 में से करीब 2 इलेक्ट्रिक कारें सिर्फ कुछ चुनिंदा राज्यों से आती हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

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साउथ इंडिया बना EV का पावरहाउस

बीते 5 सालों में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु ने मिलकर भारत की कुल इलेक्ट्रिक कार बिक्री में 30 से 35 फीसदी तक की हिस्सेदारी लगातार बनाए रखी है। खास बात यह है कि यह दबदबा नया नहीं है। साल 2020 में जब EV मार्केट बिल्कुल शुरुआती दौर में था, तब भी इन तीनों राज्यों की हिस्सेदारी करीब 38 फीसदी थी। जैसे-जैसे देश के अन्य राज्यों में EV अपनाने की रफ्तार बढ़ी, साउथ इंडिया की हिस्सेदारी थोड़ी स्थिर होकर 31–33 फीसदी के आसपास बनी रही।

टॉप राज्यों में महाराष्ट्र भी शामिल

अब तस्वीर और भी साफ हो जाती है जब हम टॉप राज्यों को देखते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल, ये तीन राज्य मिलकर भारत की कुल चार-पहिया EV रजिस्ट्रेशन का करीब 40 फीसदी योगदान देते हैं।

शहरों की बनावट EV के लिए बनी वरदान

साउथ इंडिया की बढ़त के पीछे सबसे बड़ा कारण वहां के शहरों की भौगोलिक बनावट और ड्राइविंग पैटर्न है। बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में रोजाना सफर आमतौर पर छोटा और तय रूट्स पर होता है। हाईवे ड्राइविंग कम और शहर के अंदर चलना ज्यादा होता है। इससे EV में सबसे बड़ी चिंता रेंज एंग्जायटी काफी हद तक खत्म हो जाती है।

केरल की बात करें तो वहां शहर और कस्बे हाईवे के साथ लंबे स्ट्रेच में फैले हुए हैं, जिससे पूरा राज्य एक बड़े अर्बन ज़ोन जैसा लगता है। इससे EV चलाना ज्यादा सहज महसूस होता है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ने बढ़ाया भरोसा

दक्षिण भारत में चार्जिंग नेटवर्क भी तेजी से विकसित हुआ है। पब्लिक और प्राइवेट दोनों स्तरों पर चार्जिंग कॉरिडोर बने हैं, जिससे इंटर-सिटी ट्रैवल आसान हुआ है। घर पर चार्ज करने वालों को भी एक्स्ट्रा कॉन्फिडेंस मिला है। खासकर बेंगलुरु में EV टैक्सी फ्लीट्स और टेक-सेवी शुरुआती ग्राहकों ने इलेक्ट्रिक कारों को तेजी से नॉर्मल बना दिया।

घर पर चार्जिंग बनी गेम चेंजर

साउथ इंडिया में वाहन स्वामित्व ज्यादा है और बड़ी संख्या में लोग सैलरी क्लास से हैं, तय समय और तय दूरी का सफर करते हैं। अपार्टमेंट या इंडिपेंडेंट घरों में रहते हैं, जहां चार्जिंग आसान है। एक बार रात में घर पर चार्जिंग की आदत बन जाए, तो पब्लिक चार्जर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

सब्सिडी से ज्यादा अहम हुआ अनुभव

पहले जहां राज्य सरकार की सब्सिडी EV खरीद का बड़ा कारण थी, अब उसका असर कम होता जा रहा है। आजकल ज्यादातर राज्यों में सब्सिडी का अंतर सिर्फ 10,000 रुपये से 30,000 रुपये के आसपास है।

अब खरीदार ज्यादा ध्यान डेली की रोजमर्रा की उपयोगिता, चार्जिंग की सुविधा, कुल खर्च (Total Cost of Ownership) पर दे रहे हैं और इन्हीं पैमानों पर साउथ इंडिया के राज्य सबसे आगे दिखते हैं।

आगे क्या बदलेगा?

देशभर में EV की हिस्सेदारी बढ़ रही है। 2024 में जहां चार-पहिया EV की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर करीब 4 फीसदी हो गई। जैसे-जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में चार्जिंग सुविधा बढ़ेगी, वैसे-वैसे 10 लाख से 25 लाख की रेंज में ज्यादा EV ऑप्शन आएंगे। EV और पेट्रोल कार की लागत में बराबरी होगी, तो उत्तर और पश्चिम भारत के राज्य भी तेजी से पकड़ बनाएंगे। हालांकि फिलहाल, EV क्रांति की कमान साउथ इंडिया के हाथ में ही है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक
अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर ऑटो सेक्शन से जुड़े हुए हैं। सर्वेश्वर को पत्रकारिता में 7 साल से ज्यादा का अनुभव है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़ी खबरों व एनालिसिस में उन्हें गहरी समझ और अनुभव है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय (हरिद्वार) से पत्रकारिता में मास्टर के बाद इन्होंने साल 2019 में ईटीवी भारत से पत्रकारिता जगत में अपना कदम रखा। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी के साथ काम किया। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर लेखन के साथ-साथ बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान इन्होंने गोंदिया (महाराष्ट्र) में 2 महीने से ज्यादा समय तक सोशल वेलफेयर के लिए काम किया। इस दौरान उन्होंने कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और स्कूल के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। सर्वेश्वर को बचपन से क्रिकेट खेलना और डांस पसंद है।

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