
भारत में बिक्री बढ़ाने टेस्ला का नया प्लान, लैम्बोर्गिनी के एक्स-हेड को हायर किया; पिछले महीने 40 यूनिट बिकीं
एलन मस्क की टेस्ला भारतीय बाजार में बड़ा स्कोप देख रही है। कंपनी ने पिछले महीने यानी सितंबर में 40 यूनिट बेचीं। ऐसे में इस बाजार को कंपनी बहुत बड़ा बनाना चाहती है। इस वजह से कंपनी ने भारतीय बाजार के लिए एक कंट्री हेड को अपॉइंट किया है।
एलन मस्क की टेस्ला भारतीय बाजार में बड़ा स्कोप देख रही है। कंपनी ने पिछले महीने यानी सितंबर में 40 यूनिट बेचीं। ऐसे में इस बाजार को कंपनी बहुत बड़ा बनाना चाहती है। इस वजह से कंपनी ने भारतीय बाजार के लिए एक कंट्री हेड को अपॉइंट किया है, जो दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में बिक्री की धीमी शुरुआत के बाद बाजार के प्रति अपने नजरिए में बदलाव का संकेत है। मामले से जुड़े लोगों ने बाताया कि कंपनी ने शरद अग्रवाल को हायर किया है, जो पहले लैंबॉर्गिनी इंडिया के हेड थे। अग्रवाल इस सप्ताह से काम शुरू करेंगे। खास बात ये है कि उन्हें एक ऐसे बाजार में टेस्ला की कोशिशों को फिर से शुरू करने का काम सौंपा जाएगा जो अब तक उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है।






वह टेस्ला के लिए जमीनी स्तर पर लीडर भी होंगे, जबकि पिछली व्यवस्था में लोकल कर्मचारियों की एक छोटी टीम को चीन और अन्य क्षेत्रीय केंद्रों में एक एग्जीक्यूटिव टीम द्वारा दूर से मैनेज किया जाता था। टेस्ला की दक्षिण पूर्व एशिया की डायरेक्टर, इसाबेल फैन ने जुलाई और अगस्त में मुंबई और नई दिल्ली में टेस्ला के दो भारतीय स्टोर लॉन्च की देखरेख की थी। पिछले कंट्री हेड, प्रशांत मेनन, जिन्होंने मई में इस्तीफा दे दिया था। वो भारत और अमेरिका से काम कर रहे थे।
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लोगों ने बताया कि अग्रवाल को लाने का फैसला भारत में ज्यादा घरेलू रणनीति तैयार करने की दिशा में एक कदम के तौर पर लिया गया था। टेस्ला के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। अग्रवाल से भी टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका। हाई-एंड गाड़ियों की सेल्स का एक्सपीरियंस रखने वाले लीडर को लाकर, टेस्ला बड़े पैमाने पर बाजार में बिक्री बढ़ाने के बजाय लग्जरी खरीदारों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। अग्रवाल के सामने चुनौती यह होगी कि वे शुरुआती उत्सुकता को सार्थक बिक्री में बदलें। साथ ही, भारत के संरक्षणवादी टैरिफ और धीमी EV अपनाने की दर से भी निपटें।
भारत में टेस्ला का लॉन्च अब तक अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने सितंबर में बताया था कि अमेरिकी EV निर्माता को जुलाई के मिड में बिक्री शुरू होने के बाद से सिर्फ 600 से ज्यादा ऑर्डर मिले थे। यह लगभग उतनी ही गाड़ियों की संख्या है जितनी वह हर 4 घंटे में दुनियाभर में डिलीवर करती है। एक जानकार व्यक्ति के अनुसार, अक्टूबर तक यह ऑर्डर बढ़कर 800 से ज्यादा गाड़ियों तक पहुंच गया था। धीमी प्रतिक्रिया इस बात पर जोर देती है कि टेस्ला को एक ऐसे बाजार में कितनी मुश्किल लड़ाई लड़नी पड़ रही है जहां हाई इम्पोर्ट टैरिफ ने एंट्री-लेवल मॉडल Y की कीमत 6 मिलियन रुपए ($67,575) से ऊपर कर दी है।
ये JATO डायनामिक के अनुसार भारत में ज्यादातर EV बिक्री के लिए 2.2 मिलियन रुपए की रेंज से कहीं ज्यादा है। EV भारत की कुल कार बिक्री का सिर्फ 5% से थोड़ा ज्यादा हिस्सा हैं। एक जानकार व्यक्ति ने बताया कि टेस्ला देश में अपने ब्रांड और प्रोडक्ट्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मार्केटिंग के प्रयासों को बढ़ाने की योजना बना रही है। उसने नेशनल कैपिटल रीजन के बिजी मॉल्स में पॉप-अप स्टोर लगाए हैं, जिसमें गुरुग्राम जिले का एक स्टोर भी शामिल है। लगभग एक साल पहले लेम्बोर्गिनी छोड़ने से पहले, अग्रवाल ने लगभग एक दशक तक फॉक्सवैगन AG यूनिट लेम्बोर्गिनी के भारत बिजनेस को लीड किया था। यहां उन्होंने ब्रांड को देश के सुपर-लक्जरी मार्केट लीडर के तौर पर स्थापित करने में मदद की।

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Narendra Jijhontiyaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




