इस इलेक्ट्रिक कार को खरीदने की मची लूट! वेटिंग पीरियड 8 महीने के पार; 450 km+ है रेंज
टाटा पंच EV की डिलीवरी के लिए ग्राहकों को 8 महीने से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ रहा है। गाड़ियां बनाने की रफ्तार बढ़ने का बाद भी शोरूम्स पर आने वाली बुकिंग्स का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है।

टाटा मोटर्स के पास इन दिनों एक ऐसी परेशानी खड़ी हो गई है, जिसे हर कार कंपनी अपने लिए खुशकिस्मती मानेगी। मार्केट में कंपनी की इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि सप्लाई संभालना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में लॉन्च हुई टाटा पंच EV की डिलीवरी के लिए ग्राहकों को 8 महीने से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ रहा है। कंपनी ने अपनी गाड़ियां बनाने की रफ्तार काफी बढ़ा दी है, लेकिन शोरूम्स पर आने वाली बुकिंग्स का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आइइ जानते हैं पूरी खबर के बारे में विस्तार से।
19% लोगों की पसंद बनी ईवी
टाटा मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्र के अनुसार, फरवरी के मुकाबले अब EV की मांग साढ़े तीन गुना तक बढ़ चुकी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने रिकॉर्ड 34,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची हैं। यह पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। कमाल की बात यह है कि टाटा की कुल कार बिक्री में 19 पर्सेंट हिस्सा EV का और 27 पर्सेंट हिस्सा CNG मॉडल का रहा। यानी कंपनी की करीब आधी गाड़ियां बिना पेट्रोल-डीजल के बिक रही हैं।
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468 किमी का मिलता है रेंज
इस पूरे तूफान के केंद्र में टाटा पंच EV है। कंपनी ने 2026 मॉडल को बेहद किफायती कीमत में उतारा है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 9.69 लाख रुपये रखी गई है। इसमें 30 kWh और 40 kWh के दो बैटरी ऑप्शन मिलते हैं। बड़ी बैटरी के साथ यह कार एक बार चार्ज करने पर 468 किलोमीटर तक चलती है। फास्ट चार्जर से 26 मिनट में 20 से 80 फीसदी तक चार्ज हो जाती है। कम कीमत और शानदार रेंज के इसी कॉम्बिनेशन ने ग्राहकों का दिल जीत लिया है।
लगातार बढ़ा रही प्रोडक्शन
मांग को पूरा करने के लिए टाटा ने अपना प्रोडक्शन 9,000 यूनिट से बढ़ाकर 15,000 यूनिट प्रति महीना से ज्यादा कर दिया है। बता दें कि जून और जुलाई के महीनों में कंपनी ने लगातार 15,000 से ज्यादा EV की डिलीवरी की है। कंपनी को उम्मीद है कि पूरे साल में उनकी EV बिक्री में 70 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी। इसके बावजूद कारों की डिलीवरी पीछे छूट रही है। दरअसल, मार्केट में नई गाड़ियां खरीदने वालों की भीड़ सप्लाई से कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ रही है।
8 महीने का लंबा वेटिंग पीरियड
कंपनी के लिए इतनी भारी डिमांड भले ही राहत की बात हो, ग्राहकों के लिए 8 महीने का लंबा वेटिंग पीरियड बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। इतने लंबे वक्त में लोन के ब्याज बदल सकते हैं, कार की कीमतें बढ़ सकती हैं और मार्केट में दूसरे ऑप्शन भी आ सकते हैं। महिंद्रा, एमजी और मारुति जैसी कंपनियां भी नए इलेक्ट्रिक मॉडल ला रही हैं। अब टाटा मोटर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे गाड़ियों का प्रोडक्शन और बढ़ाकर ग्राहकों को जल्द से जल्द डिलीवरी सौंप सकें।


