क्या ई-रिक्शा की तरह ई-कार और टू-व्हीलर की बैटरी भी हो जाएगी दूसरे फोन से बंद? जानिए एक्सपर्ट की राय
इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके मन में अब ये बात आने लगी हैं कि कहीं उनके व्हीकल या उसकी बैटरी को तो हैक नहीं किया जा सकता। अक्सर इस तरह की चीजें फिल्मों और वेब सीरीज में कई बार देखी जा चुकी हैं। ऐसे में इस करीब से समझना भी जरूरी हो जाता है।

सोचिए... आप अपनी कार से कहीं जा रहे हैं और अचानक ही वो बंद हो जाए, या फिर वो किसी स्मार्टफोन की तरह हैंग हो जाए। यानी कार आपकी कमांड को रिस्पॉन्स देना बंद कर दे, तब क्या होगा? वैसे इस सवाल के कोई मायने नहीं है, लेकिन ई-रिक्शा की बैटरी हैक करने वाले मामले ने लोगों को थोड़ा डराया जरूर है। खासकर, जो लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके मन में अब ये बात आने लगी हैं कि कहीं उनके व्हीकल या उसकी बैटरी को तो हैक नहीं किया जा सकता। अक्सर इस तरह की चीजें फिल्मों और वेब सीरीज में कई बार देखी जा चुकी हैं।
ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए हमने प्रौद्योगिकी और नए मीडिया के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय, बालेंदु शर्मा दाधीच से बातचीत की। वो दुबई स्थित एल्गो टेक्नोलॉजीज में CEO हैं। साथ ही, माइक्रोसॉफ्ट भारत और माइक्रोसॉफ्ट एशिया में निदेशक पद पर कार्य कर चुके हैं। इतना ही नहीं, AI को समझाने के लिए वो 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यंत्रबुद्धि' किताब भी लिख चुके हैं। चलिए इस मामले पर उनका क्या कहना है, जानते हैं।
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पहला सवाल: ई-रिक्शा की बैटरी को हैक करने का मामला सामने आया है, जिसमें स्मार्टफोन ऐप से उसे बंद किया जा सकता था। क्या ऐसा इलेक्ट्रिक कार या इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में भी संभव है?
जवाब: तकनीकी तौर पर यह संभव है, लेकिन बड़ी कंपनियों की इलेक्ट्रिक कार या टू-व्हीलर में ऐसा होना बहुत मुश्किल है। ये कनेक्टिविटी ब्लूटूथ आधारित है। ब्लूटूथ पिन या पास-की युक्त भी हो सकता है और उसके बिना भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कई ई-रिक्शा में सस्ते, चीन में बने बैटरी सिस्टम लगे होते हैं, जिनमें इस पहलू पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया होता। ऐसे वाहनों की बैटरियाँ निशाना बनाई जा सकती हैं। इसके उलट, जानी-मानी कंपनियों की गाड़ियों में कई स्तर की सुरक्षा (एन्क्रिप्शन) होती है और बिना ओटीपी, पासवर्ड या फिंगरप्रिंट जैसी पहचान के कोई भी अनजान शख्स ऐप से गाड़ी को कंट्रोल नहीं कर सकता।
दूसरा सवाल: इन दिनों इलेक्ट्रिक और ICE व्हीकल में AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने लगा है। ये टेक्नोलॉजी कितनी सेफ होती है? क्या इसे हैक किया जा सकता है?
जवाब: कोई भी डिजिटल तकनीक ऐसी नहीं है, किसी भी तरह हैक न किया जा सके। एआई से युक्त कनेक्टेड गाड़ियां भी इसका अपवाद नहीं हैं। आम इस्तेमाल के लिए ये सुरक्षित हैं। लेकिन अगर उनके सॉफ्टवेयर में कोई खामी रह जाए, तो शातिर हैकर उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं। ऐसा तभी होगा जब सॉफ्टवेयर में कोई खामी हो या किसी 'बग' की वजह से उसकी साइबर सुरक्षा में सेंध लगाना संभव हो।
तीसरा सवाल: जो लोग कम टेक फ्रेंडली होते हैं, उन्हें इस तरह की चीजों से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब: जरूरत न होने पर फोन का ब्लूटूथ और हॉटस्पॉट बंद रखें, ताकि कोई अजनबी उसका फायदा न उठा सके। अगर गाड़ी में पहले से ही कोई (डिफॉल्ट) पास-की या पिन है (जैसे 0000 या 12345 जो फैक्टरी से ही लगा हुआ आया है) तो उसे तुरंत बदल लें। इसके लिए आधिकारिक ऐप्प का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि गाड़ी की सर्विसिंग के समय कोई व्यक्ति छेड़छाड़ न कर ले। ब्लूटूथ रिसीवर को हमेशा के लिए हटवाया भी जा सकता है।
चौथा सवाल: यदि कोई व्हीकल टेक्नोलॉजी की मदद से हैक हो जाता है, तब सबसे पहला कदम क्या उठाना चाहिए?
जवाब: गाड़ी को किसी सुरक्षित जगह पर रोकें। अगर डिजिटल सिस्टम काम न करे, तो मैनुअल चाबी से गाड़ी बंद करें या बैटरी का कट-ऑफ स्विच गिरा दें। फोन का ब्लूटूथ और मोबाइल डेटा बंद कर दें, ताकि हैकिंग वहीं रुक जाए। गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश न करें बल्कि हेल्पलाइन से मदद लें।
सरकार कर रही नए नियम लागू करने की तैयारी
सरकार भी अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की बैटरी के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए नए नियम लागू कर सकती है। अधिकारियों ने बताया कि नए नियमों से यह पक्का किया जाएगा कि इम्पोर्टेड इलेक्ट्रिक रिक्शा और इलेक्ट्रिक स्कूटर (e3W और e2W) में साइबर सिक्योरिटी सिस्टम हों, क्योंकि ये अब तक बिना किसी नियम-कानून के चल रहे थे। साथ ही, ऐसे मोबाइल ऐप्स पर भी रोक लग सकती है जिनका इस्तेमाल इम्पोर्टेड चीनी बैटरी वाले मौजूदा इलेक्ट्रिक e2W और e3W में गड़बड़ी करने के लिए किया जा सकता है। हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने सुरक्षा कमियों को दूर करने पर चर्चा की है।
इम्पोर्टेड गाड़ियों पर भी लागू होंगे नियम
EV बैटरी के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं। इम्पोर्टेड ई-रिक्शा और ई-स्कूटर के लिए साइबर सिक्योरिटी नियम भी तैयार किए जा रहे हैं। एक सीनियर अधिकारी ने ET को बताया, "सॉफ्टवेयर की सुरक्षा कमियों को दूर किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि e2W और e3W में गड़बड़ी करने वाले मोबाइल ऐप्स के डाउनलोड पर भी रोक लगने की उम्मीद है। इन सॉफ्टवेयर्स को ब्लॉक करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि यह माना गया कि पहले से बिक चुके हर e2W और e3W को अलग-अलग ठीक नहीं किया जा सकता। नए नियम देश में बिकने वाली पूरी तरह से इम्पोर्टेड गाड़ियों पर भी लागू होंगे।
लेखक के बारे में
Narendra Jijhontiyaनरेंद्र जिझोतिया देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी लेखनी के लिए चर्चित नाम बन चुके हैं। गाड़ियों का रिव्यू, फर्स्ट राइडिंग इम्प्रेशन, कम्पेरिजन, सेल्स एनालिसिस, यूटिलिटी (DIY, How To Do) जैसे विषयों पर उनकी शानदार पकड़ है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट को लेकर वो लगातार सुर्खियों में रहते हैं। ऑटो के लॉन्च इवेंट में अपने अलग एंगल के लिए भी उन्हें जाना जाता है। वे लाइव हिन्दुस्तान के साथ असिस्टेंट न्यूज एडिटर के तौर पर पिछले 4 सालों से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पत्रकारिता पूरी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ (रायपुर) में बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर की। 18 साल के लंबे करियर के दौरान वे बंसल न्यूज (भोपाल), दैनिक भास्कर डिजिटल (भोपाल) समेत 5 संस्थानों में काम कर चुके हैं। वे स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई सेक्शन में काम कर चुके हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में यूरेका अवॉर्ड, हाईफाइव अवॉर्ड, बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं, लाइव हिन्दुस्तान में डिजी स्टार अवॉर्ड का सम्मान मिल चुका है। वे टीवी जर्नलिज्म के दौरान हॉकी मैच में लाइव कॉमेंट्री भी कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट खेलना, सिगिंग, साइकिलिंग पसंद है।
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