ADAS सेफ्टी वाली कार होंगी सस्ती, ये 2 कंपनी साथ बना रहीं टेक्नोलॉजी; इससे एक्सीडेंट में कमी आई
इस पार्टनरशिप के तहत, बॉश, क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन राइड हार्डवेयर पर बेस्ड इन-कार कंप्यूटर डेवलप करेगा। ये कंप्यूटर आज के जमाने की उन ADAS सुविधाओं को ऑपरेट करेंगे, जिन्हें OEM अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा सकते हैं।

इन दिनों ऑटो मैन्युफैक्चरर्स अपनी ज्यादातर कारों में सेफ्टी के लिए कई शानदार फीचर्स दे रहे हैं। इसमें एक फीचर ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम है। दरअसल, ADAS के अंदर कई अलग-अलग सेफ्टी फीचर्स का कॉम्बिनेशन होता है। हालांकि, ये फीचर ज्यादातर कारों के टॉप वैरिएंट में ही मिलता है। साथ ही, ये कार की कीमत में भी इजाफा कर देता है। ऐसे में अब क्वालकॉम (Qualcomm) और बॉश (Bosch) ने इस टेक्नोलॉजी को सस्ता बनाने के लिए हाथ मिलाया है। अपने डिजिटल कॉकपिट कंप्यूटरों की सफलता के बाद ये दोनों कंपनियां व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए मिलकर ADAS सॉल्युशन डेवलप करेंगी।






इस पार्टनरशिप के तहत, बॉश, क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन राइड हार्डवेयर पर बेस्ड इन-कार कंप्यूटर डेवलप करेगा। ये कंप्यूटर आज के जमाने की उन ADAS सुविधाओं को ऑपरेट करेंगे, जिन्हें OEM अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा सकते हैं। कार कंपनी, एक ही स्नैपड्रैगन राइड फ्लैक्स SoC पर बेस्ड, खास तौर से तैयार किए गए कम्बाइंड कॉकपिट और ADAS हार्डवेयर सॉल्युशन का सिलेक्शन भी कर सकते हैं। इससे उन्हें अपनी लागत को कम करने और अपने सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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बॉश के अनुसार, उसका स्केलेबल और मॉड्यूलर ADAS इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म इतनी हाई बैंडविड्थ और कंप्यूटिंग कैपेसिटी प्रदान करता है कि तेज सपीड से चलती कार में भी सटीक 'एनवायरमेंट मॉडलिंग' से जुड़े कार्यों को सुचारू रूप से चलाया जा सके, जिससे ड्राइवर और पैसेंजर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कंपनी का यह भी कहना है कि उसके सॉल्युशन सेफ्टी और सिक्योरिटी रिक्वायरमेंट को पूरा करते हैं।
OEMs के लिए उनकी जरूरतों और टारगेट मार्केट के आधार पर, अलग प्रकार के कॉन्फिगरेशन डेवलप किए जा रहे हैं। इन कैपेसिटी का विस्तार, स्पीड/डिस्टेंस कंट्रोल और लेन-कीपिंग जैसे शुरुआती स्तर के ADAS वर्किंग से लेकर, एडवांस्ड ऑटोमेटेड ड्राइविंग सिस्टम तक है। कंपनियों का दावा है कि उन्हें पूर्वी एशियाई OEMs से पहले ही कई महत्वपूर्ण डिजाइन अनुबंध मिल चुके हैं। इन नए प्लेटफॉर्म पर बेस्ड पहले व्हीकल 2028 तक बाजारों में आने की उम्मीद है।
कंपनियों का कहना है कि ADAS, ऑटोमेटेड ड्राइविंग, डिजिटल कॉकपिट सॉल्युशन, इंफोटेनमेंट, वॉइस असिस्टेंस और पर्सनलाइजेशन जैसी सुविधाओं को एक ही कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेटेड करने से कार मैन्युफैक्चरर्स को अपनी टेक्नोलॉजी स्ट्रक्चर की मुश्किलों को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, ग्राहकों को भी ADAS और असिस्टेंस ड्राइविंग फीचर्स अधिक किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगी। यह घोषणा ठीक उस समय हुई है जब दोनों कंपनियों ने अपना 10 मिलियनवां इन-कार कंप्यूटर शिप किया है। यह साझेदारी 2021 में शुरू हुई थी, और 2023 में इसने एक मिलियन का मील का पत्थर पार कर लिया। ये तीन साल से भी कम समय में 10 मिलियन तक पहुंच गई।
भारत में ADAS को लेकर ARAI का प्लान
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने पुणे के पास देश का पहला खास ADAS टेस्ट सिटी लॉन्च किया है। तालेगांव के पास तकवे में 20 एकड़ में फैली यह फैसिलिटी, कंट्रोल्ड माहौल में भारतीय सड़कों के हालात को फिर से बनाती है। इसका मकसद ऑटोमेकर्स को खास तौर पर भारतीय हालात के लिए ADAS टेक्नोलॉजी को टेस्ट, वैलिडेट और कैलिब्रेट करने देना है। इस पहल को ऑफिशियली द ADAS शो के तीसरे एडिशन के दौरान शुरू किया गया, जिसमें सरकारी अधिकारियों, ग्लोबल OEMs, सप्लायर्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों ने हिस्सा लिया। इस फैसिलिटी में सिम्युलेटेड शहरी माहौल, मुश्किल चौराहे, लेन में बदलाव और टेस्टिंग इक्विपमेंट शामिल हैं, जिन्हें रियल वर्ल्ड के ड्राइविंग हालात को कॉपी करने के लिए डिजाइन किया गया है। आने वाले दिनों में ये सभी गाड़ियों में आम हो जाएंगे।
ARAI के डायरेक्टर डॉ. रेजी मथाई ने भारत को अपने ADAS को लेकर कहा, "मैं कह सकता हूं कि इस टेक्नोलॉजी को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। ADAS एक ऐसी चीज है जिस पर हम सीरियसली विचार कर रहे हैं क्योंकि यह भारत में सड़क हादसों और मौतों की समस्या को हल करने में मदद कर सकता है। अगर आप देखें कि पिछले 4 या 5 सालों में चीजें कैसे बदली हैं, तो हम सोच रहे हैं कि देश में ADAS फीचर्स कैसे लाए जाएं। हमारा एक फायदा यह है कि भारत यूनाइटेड नेशंस लेवल पर रेगुलेशन डिस्कशन में हिस्सा लेता है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि दूसरे देश टेक्नोलॉजी को कैसे अपना रहे हैं और भारत के लिए उनमें से कितनी चीजें अपनाई जा सकती हैं।"
लेखक के बारे में
Narendra Jijhontiyaनरेंद्र जिझोतिया देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी लेखनी के लिए चर्चित नाम बन चुके हैं। गाड़ियों का रिव्यू, फर्स्ट राइडिंग इम्प्रेशन, कम्पेरिजन, सेल्स एनालिसिस, यूटिलिटी (DIY, How To Do) जैसे विषयों पर उनकी शानदार पकड़ है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट को लेकर वो लगातार सुर्खियों में रहते हैं। ऑटो के लॉन्च इवेंट में अपने अलग एंगल के लिए भी उन्हें जाना जाता है। वे लाइव हिन्दुस्तान के साथ असिस्टेंट न्यूज एडिटर के तौर पर पिछले 4 सालों से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पत्रकारिता पूरी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ (रायपुर) में बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर की। 18 साल के लंबे करियर के दौरान वे बंसल न्यूज (भोपाल), दैनिक भास्कर डिजिटल (भोपाल) समेत 5 संस्थानों में काम कर चुके हैं। वे स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई सेक्शन में काम कर चुके हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में यूरेका अवॉर्ड, हाईफाइव अवॉर्ड, बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं, लाइव हिन्दुस्तान में डिजी स्टार अवॉर्ड का सम्मान मिल चुका है। वे टीवी जर्नलिज्म के दौरान हॉकी मैच में लाइव कॉमेंट्री भी कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट खेलना, सिगिंग, साइकिलिंग पसंद है।
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