कैसे होता है FASTag स्कैम? सेफ रहने के लिए अपनाएं ये तरीका, वरना खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट
मार्केट में FASTag एनुअल पास के नाम पर बड़ा स्कैम चल रहा है। NHAI ने इसको लेकर चेतावनी जारी की है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि यह स्कैम कैसे काम करता है और हमें इससे कैसे सुरक्षित रहना है?

अगर आप FASTag का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। नेशनल हाईवे अथॉर्टी ऑफ इंडिया (National Highways Authority of India -NHAI) ने लोगों को सावधान करते हुए बताया है कि इंटरनेट पर FASTag अनुअल पास (Annual Pass) के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स चल रही हैं, जो लोगों को ठग रही हैं। इन नकली साइट्स के जरिए लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैं, लेकिन बदले में कोई असली पास नहीं दिया जाता। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।






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क्या है पूरा मामला?
हाल ही में कई शिकायतें सामने आईं कि कुछ वेबसाइट्स खुद को NHAI की आधिकारिक साइट बताकर FASTag Annual Pass बेच रही हैं। ये वेबसाइट्स देखने में बिल्कुल असली सरकारी पोर्टल जैसी लगती हैं। प्रोफेशनल डिजाइन और लोगो का इस्तेमाल करती हैं। गूगल सर्च एंड पेड विज्ञापनों के जरिए ऊपर दिखाई देती हैं और लोग इन्हें असली समझकर भुगतान कर देते हैं और धोकाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
कैसे काम करता है यह स्कैम?
1- ठग लोग NHAI जैसी दिखने वाली वेबसाइट बनाते हैं।
2- सर्च इंजन में पेड ऐड देकर उसे ऊपर दिखाते हैं।
3- यूजर से मोबाइल नंबर, गाड़ी नंबर और बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं।
4- पेमेंट गेटवे असली जैसा दिखता है, लेकिन पैसा सीधे ठगों के खाते में चला जाता है।
5- भुगतान के बाद या तो कोई कन्फर्मेशन नहीं मिलता या नकली रसीद भेज दी जाती है।
कई मामलों में वेबसाइट बाद में गायब भी हो जाती है।
NHAI ने क्या कहा?
NHAI ने स्पष्ट किया है कि FASTag सेवाएं केवल अधिकृत बैंकों, पेमेंट ऐप्स और आधिकारिक चैनलों के जरिए ही उपलब्ध हैं। किसी भी अनजान या संदिग्ध वेबसाइट से भुगतान न करें। सरकारी सेवा के नाम पर चल रहे विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें। यह एडवाइजरी गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre -I4C) के जरिए जारी की गई है।
कैसे रहें सुरक्षित?
हमेशा वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें और स्पॉनसर्ड या पेड ऐड लिंक पर क्लिक करने से बचें। OTP, कार्ड डिटेल्स या पर्सनल जानकारी किसी से साझा न करें और अगर वेबसाइट संदिग्ध लगे तो तुरंत बाहर निकल जाएं। किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
FASTag जैसी डिजिटल सुविधाएं हमारी यात्रा आसान बनाती हैं, लेकिन ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचना भी उतना ही जरूरी है। NHAI की इस चेतावनी का मकसद यही है कि लोग जागरूक रहें और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही FASTag सेवाओं का उपयोग करें।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक
अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर ऑटो सेक्शन से जुड़े हुए हैं। सर्वेश्वर को पत्रकारिता में 7 साल से ज्यादा का अनुभव है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़ी खबरों व एनालिसिस में उन्हें गहरी समझ और अनुभव है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय (हरिद्वार) से पत्रकारिता में मास्टर के बाद इन्होंने साल 2019 में ईटीवी भारत से पत्रकारिता जगत में अपना कदम रखा। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी के साथ काम किया। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर लेखन के साथ-साथ बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान इन्होंने गोंदिया (महाराष्ट्र) में 2 महीने से ज्यादा समय तक सोशल वेलफेयर के लिए काम किया। इस दौरान उन्होंने कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और स्कूल के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। सर्वेश्वर को बचपन से क्रिकेट खेलना और डांस पसंद है।
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