
बड़ी खोज! 10 महीने, 100 ट्रायल फेल, फिर भी नहीं मानी हार; भारत को मिला क्लीन एनर्जी का ब्रह्मास्त्र
MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के शोधकर्ताओं ने क्लीन एनर्जी की दिशा में एक बड़ी खोज की है, जो भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाने की दिशा में ब्रह्मास्त्र साबित हो सकता है। आइए पूरी कहानी जानते हैं।
भारत के क्लीन एनर्जी भविष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजन के सुरक्षित, आसान और किफायती परिवहन के लिए एक नई तकनीक विकसित की है, जो भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाने की दिशा में ब्रह्मास्त्र साबित हो सकता है। यह खोज भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मजबूती देने के साथ-साथ देश को कार्बन-फ्री अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।






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MIT-WPU की रिसर्च टीम ने लिक्विड ऑर्गेनिक हाइड्रोजन कैरियर (LOHC) सिस्टम तैयार किया है, जिसकी मदद से हाइड्रोजन को एक स्थिर और सुरक्षित लिक्विड रूप में बदला जा सकता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें आग लगने या विस्फोट का खतरा बेहद कम होता है और हाइड्रोजन को सामान्य तापमान व दबाव पर आसानी से स्टोर और ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। LOHC तकनीक से हाइड्रोजन को किसी भी आम इंडस्ट्रियल लिक्विड की तरह मौजूदा टैंकरों और पाइपलाइनों से ले जाया जा सकता है, जिससे लागत और जोखिम दोनों कम हो जाते हैं।

महीनों की मेहनत के बाद मिली सफलता
इस रिसर्च के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर डॉ. राजीब कुमार सिंहराय ने बताया कि शुरुआत के करीब 50 दिनों तक कोई ठोस नतीजा नहीं मिला, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। लगभग 10 महीनों में 100 से ज्यादा प्रयोगों के बाद यह बड़ी सफलता हासिल हुई। उन्होंने कहा कि यह सफर मुश्किल जरूर था, लेकिन इससे साबित हुआ कि लगातार मेहनत और सही वैज्ञानिक सोच से असंभव भी संभव हो सकता है।
उद्योग और यूनिवर्सिटी की पार्टनरशिप से बना नया समाधान
इस इनोवेशन की शुरुआत तब हुई, जब ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड (OCPL) एक जटिल समस्या का समाधान लेकर MIT-WPU पहुंची। इस समस्या का हल देश के कई बड़े संस्थानों में भी उपलब्ध नहीं था। दुनिया में इसका कोई तय तरीका मौजूद न होने के कारण, रिसर्च टीम ने पूरी प्रक्रिया को शून्य से तैयार किया।

OCPL के फाउंडर सिद्धार्थ मयूर ने बताया कि यह तकनीक हाइड्रोजन के सुरक्षित परिवहन की दिशा में एक बड़ा और व्यावहारिक कदम है। कंपनी ने इस इनोवेशन के लिए इंटरनेशनल पेटेंट की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और भविष्य में इसे एक कमर्शियल प्रोडक्ट के रूप में लाने की तैयारी है।
हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट की बड़ी समस्या का समाधान
हाइड्रोजन भले ही सबसे क्लीन एनर्जी में से एक हो, लेकिन इसकी अत्यधिक ज्वलनशील प्रकृति और ट्रांसपोर्ट की कठिन शर्तों के कारण इसका बड़े पैमाने पर उपयोग अब तक सीमित था। फिलहाल, हाइड्रोजन को या तो बहुत ज्यादा दबाव वाले सिलेंडरों में रखा जाता है या फिर माइनस 253 डिग्री सेल्सियस पर लिक्विड किया जाता है, जो महंगा और जोखिम भरा है। लेकिन, इस रिसर्च ने इसे बेहद आसान और किफायती कर दिया है।
2-स्टेप केमिकल प्रोसेस
MIT-WPU की LOHC तकनीक इस समस्या को दो-स्टेप केमिकल प्रोसेस से हल करती है। पहले चरण में हाइड्रोजन को एक खास ऑर्गेनिक लिक्विड से जोड़ा जाता है, जिससे वह पूरी तरह सुरक्षित तरल बन जाता है। दूसरे चरण में जरूरत की जगह पर हाइड्रोजन को वापस रिलीज कर लिया जाता है और लिक्विड कैरियर को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक से हाइड्रोजन को मौजूदा फ्यूल टैंकर, स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन के जरिए आसानी से ले जाया जा सकता है, जिससे लागत और जोखिम दोनों कम हो जाते हैं।
टेस्टिंग में मिले शानदार नतीजे
लैब टेस्ट के दौरान MIT-WPU की टीम ने महज 2 घंटे में हाइड्रोजन स्टोरेज की प्रक्रिया पूरी कर ली, जबकि वैश्विक स्तर पर यही प्रक्रिया करीब 18 घंटे लेती है। इतना ही नहीं, जहां आमतौर पर 170 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, वहां यह प्रक्रिया सिर्फ 130 डिग्री सेल्सियस पर पूरी हुई। सिर्फ 15.6 लीटर कैरियर लिक्विड में करीब 11,000 लीटर हाइड्रोजन स्टोर करने में सफलता मिली और डी-हाइड्रोजनेशन में 86% हाइड्रोजन वापस हासिल किया गया।
भारत के लिए क्यों है यह खोज खास?
रिसर्च एडवाइजर प्रोफेसर दत्ता डांडगे के मुताबिक, यह तकनीक भारत में क्लीन एनर्जी लॉजिस्टिक्स को पूरी तरह बदल सकती है। हाइड्रोजन को आम इंडस्ट्रियल लिक्विड की तरह ले जाने से सुरक्षा और सरकारी नियमों से जुड़ी कई पुरानी दिक्कतें खत्म होंगी।
MIT-WPU की अत्याधुनिक हाइड्रोजन लैब में हुई यह रिसर्च अब इंडस्ट्री लेवल पर इस्तेमाल के लिए तैयार की जा रही है। प्रोजेक्ट फेलो और पीएचडी छात्र निशांत पाटिल ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह इनोवेशन भारत के क्लीन एनर्जी भविष्य को नई दिशा देगा।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




