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मर्सिडीज खरीदी तो जेब होगी ढीली! इस तारीख से 2% तक बढ़ेंगी कीमतें, जानें बढ़ोतरी की असली वजह

मर्सिडीज खरीदी तो जेब होगी ढीली! इस तारीख से 2% तक बढ़ेंगी कीमतें, जानें बढ़ोतरी की असली वजह

संक्षेप:

जर्मन लग्जरी कार ब्रांड मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) ने भारत में अपनी पूरी पैसेंजर कार रेंज की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से सभी मॉडल महंगे हो जाएंगे।

Dec 12, 2025 03:36 pm ISTAshutosh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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Mercedes-Benz: जर्मन लग्जरी कार ब्रांड मर्सिडीज-बेंज ने भारत में अपनी पूरी पैसेंजर कार रेंज की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। कंपनी के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से सभी मॉडल महंगे हो जाएंगे। बता दें कि कीमतों में 2 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी लागू होगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही BMW ने भी इसी तरह कीमत बढ़ाने के संकेत दिए थे। लगातार कमजोर हो रहे भारतीय रुपये और यूरो के मुकाबले बढ़ते अंतर ने दोनों कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

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क्या है कीमतों में बढ़ोतरी की वजह

मर्सिडीज का कहना है कि Euro-INR एक्सचेंज रेट इस साल ज्यादातर समय 100 रुपये से ऊपर रहा। इसी वजह से कंपनी की लागत बढ़ गई है जिसका असर कीमतों पर डालना जरूरी हो गया। यही नहीं, मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर रुपये में मजबूती जल्द नहीं आती तो आगे चलकर हर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है ताकि मौजूदा फॉरेक्स लेवल तक बैलेंस बनाया जा सके।

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क्या रहे फैक्टर्स

कंपनी ने सिर्फ फॉरेक्स रेट ही नहीं बल्कि बढ़ती इनपुट कॉस्ट, महंगे कमोडिटी प्राइसेज, बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स खर्च और इंफ्लेशन जैसे कारणों को भी जिम्मेदार बताया है। मर्सिडीज का कहना है कि इन सभी फैक्टर्स के चलते प्राइस हाइक जरूरी हो गई थी। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले BMW इंडिया के प्रेसिडेंट और CEO हरदीप सिंह ब्रार ने भी यही कहा था कि यूरो के मुकाबले कमजोर रूपया प्राइसिंग और प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा असर डालता है। हालांकि कंपनी ने अभी तक नए प्राइस लिस्ट का खुलासा नहीं किया है।

लग्जरी कारें बेचती है कंपनी

भारत में मर्सिडीज-बेंज कई तरह की लग्जरी कारें बेचती है। इनमें कुछ लोकली मैन्युफैक्चर, कुछ लोकली असेंबल और कुछ पूरी तरह से CBU (Completely Built Unit) के रूप में आयात की जाती हैं। फॉरेक्स रेट में लगातार उतार-चढ़ाव का असर स्थानीय असेंबली में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स पर भी पड़ता है। जबकि CBU इम्पोर्ट की लागत तो सीधे ही बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी अब लगभग सभी ब्रांड्स के लिए मजबूरी बनती जा रही है।

Ashutosh Kumar

लेखक के बारे में

Ashutosh Kumar
अभी लाइव हिंदुस्तान के लिए खबरें लिखने के साथ समय-समय पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते रहते हैं। आशुतोष को पत्रकारिता से जुड़े हुए करीब 2 साल हो गए हैं। राजनीति, बिजनेस, क्रिकेट, धर्म और साहित्य में गहरी रुचि है। लाइव हिंदुस्तान के बिजनेस, ऑटो, टेक, क्रिकेट, करियर, एस्ट्रोलॉजी और इंटरनेशनल सेक्शन में काम कर चुके हैं। आशुतोष ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। राजनेताओं और लेखकों के साथ साक्षात्कार करना और मौजूदा पॉलिटिकल एक्टिविटी पर नजरें बनाए रखना सबसे पसंदीदा विषय है। और पढ़ें

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