2 दिन बाद आएगी देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल मारुति कार, पेट्रोल-डीजल बिना दौड़ेगी; इसलिए हो रही चर्चा?
मारुति ने ये साफ नहीं किया है कि फ्लेक्स फ्यूल वाली इस कार का क्या नाम होगा। फिर भी इस बात की पूरी उम्मीद है कि ये कंपनी की सबसे पॉपुलर और मोस्ट सेलिंग हैचबैक वैगनार का फ्लेक्स फ्यूल वर्जन हो सकती है। पिछले साल सुजुकी फ्रोंक्स SUV का फ्लेक्स फ्यूल वाला मॉडल भी दिखा चुकी था।

देश का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। खासकर, ईवी और हाइब्रिड सेगमेंट में हमें कई गुना तेजी से ग्रोथ मिल रही है। वहीं, ग्रीन मोबलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई कदम भी उठाए जा रहे हैं। दरअसल, 4 जून को देश की सबसे बड़ी कार कंपनी यानी मारुति सुजुकी इंडिया पहली फ्लेक्स फ्यूल सपोर्ट वाली पैसेंजर कार लॉन्च करने जा रही है। यानी ये पेट्रोल या डीजल की जगह इथेनॉल से तैयार फ्यूल पर चलेगी।कंपनी ये कार दिल्ली के एक इवेंट में लॉन्च करेगी। खास बात ये है कि 5 जून को वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे रहता है। इससे ठीक एक दिन पहले कंपनी ग्रीन मोबिलिटी से जुड़ी ये कार लेकर आ रही है।
फिलहाल, कंपनी ने ये साफ नहीं किया है कि फ्लेक्स फ्यूल वाली इस कार का क्या नाम होगा। फिर भी इस बात की पूरी उम्मीद है कि ये कंपनी की सबसे पॉपुलर और मोस्ट सेलिंग हैचबैक वैगनार का फ्लेक्स फ्यूल वर्जन हो सकती है। इतना ही नहीं, पिछले साल सुजुकी ने टोक्यो में जापान मोबिलिटी शो 2025 में फ्रोंक्स सब-4 मीटर कूप SUV का फ्लेक्स फ्यूल वाला मॉडल दिखाया था। उम्मीद है कि कंपनी की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार 100% इथेनॉल (E100) पर चलेगी। चलिए इस कार के बारे में डिटेल से समझते हैं।
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फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या है?
फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल (FFV) का कॉन्सेप्ट शायद फ्यूचर की बात लगती हो, लेकिन इसकी टेक्नोलॉजी बेहद प्रेक्टिकल है। एक फ्लेक्स-फ्यूल कार में एक इंटरनल कम्बशन इंजन होता है जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग ब्लेंड पर चलने में कैपेबल होता है। भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियां E20 (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का ब्लेंड) पर चलने के लिए ट्यून की गई होती हैं। मारुति की यह नई पेशकश इससे कहीं ज्यादा हायर ब्लेंड पर, यहां तक कि E100 (जो 100% शुद्ध इथेनॉल है) पर भी आसानी से चलने के लिए डिजाइन की गई है।
इसे प्रेक्टिकल बनाने के लिए इंजीनियर्स को इसके इंटरनली सिस्टम को पूरी तरह से बदलना पड़ा। चूंकि इथेनॉल, पेट्रोल की तुलना में रासायनिक रूप से ज्यादा संक्षारक होता है और स्वाभाविक रूप से नमी सोखता है, इसलिए एक आम फ्यूल टैंक खराब हो सकता है। मारुति के फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप में पूरी तरह से नए सिरे से डिजाइन किए गए इंजेक्टर, मजबूत फ्यूल लाइनें, टिकाऊ सील और एक खास तौर से कैलिब्रेटेड इंजन मैनेजमेंट सिस्टम होने की संभावना है, ताकि यह इथेनॉल की अनोखी खूबियों को बिना किसी दिक्कत के संभाल सके।
मारुति सुजुकी देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार लॉन्च करके ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में एक बहुत बड़े वैचारिक बदलाव की शुरुआत कर देगी। ऐतिहासिक रूप से पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियों (ग्रीन मोबिलिटी) पर होने वाली चर्चाओं में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) का ही दबदबा रहा है। हालांकि, गडकरी ने बार-बार बताया है कि भारत अपनी पर्यावरणीय और आर्थिक कमजोरियों को ठीक करने के लिए किसी एक जादुई उपाय पर निर्भर नहीं रह सकता।
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के कॉन्फ्रेंस में मंत्री के हालिया बयानों के अनुसार, भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 87% आयात करता है, जिससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम बिल बनता है। उन्होंने कहा, "हमें पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए, क्योंकि इन फ्यूल का 87% हिस्सा हमारे देश में आयात किया जाता है। ये न केवल प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि आयात भी बढ़ाते हैं।
पहला, फ्यूल सोर्स स्थानीय कृषि खेतों की तरफ जाने से भारत तीन बड़े आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करता है। पहला कि यह नेशनल एनर्जी सेफ्टी को मजबूत करता है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था को उन अस्थिर जियो-पॉलिटिकल संकटों से बचाता है जो अक्सर ग्लोबल तेल सप्लाई में बाधा डालते हैं और स्थानीय ईंधन की कीमतें बढ़ा देते हैं।
दूसरा, यह घरेलू किसानों को जबरदस्त आर्थिक बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इथेनॉल पूरी तरह से देश में ही उगाए गए गन्ने के शीरे, मक्का, टूटे चावल और कृषि कचरे से बनाया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि ईंधन पर खर्च किया गया पैसा सीधे भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जाए, ना कि विदेशों में बैठे विदेशी तेल कार्टेल के पास।
तीसरा, यह बदलाव परिवहन सेक्टर में बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाता है, क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में काफी साफ जलता है। यह सीधे तौर पर उन दम घोंटने वाले निकास उत्सर्जन को कम करता है, जो लगातार भारत के बड़े महानगरों को परेशान करते हैं। खासकर देश की राजधानी दिल्ली भी कई सालों से इससे जूझ रही है।
मारुति वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल
मारुति वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल का प्रोटोटाइप पहले भी दिखा चुकी है। इस फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप को E20 यानी 20% इथेनॉल के मिक्सचर वाला पेट्रोल और E85 यानी 85% इथेनॉल मिक्सचर वाले पेट्रोल पर चलाया जा सकता है। कंपनी ने मारुति वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप के बारे में कहा था कि कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी पर लंबे वक्त तक काम करने के बाद इसे मारुति वैगनआर में लेकर आई है। हालांकि, इसके माइलेज या दूसरी डिटेल सामने नहीं आई है।
मारुति फ्रोंक्स फ्लेक्स फ्यूल
मारुति सुजुकी फ्रोंक्स E85 FFV भी पेश कर चुकी है। ये 85% इथेनॉल वाले पेट्रोल को सपोर्ट करेगी। फ्रोंक्स फ्लेक्स-फ्यूल में 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन का एक रिवाइज्ड वर्जन इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसा कि वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल कॉन्सेप्ट में देखा गया है। इंजन के स्पेसिफिकेशन अभी उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, यह पुष्टि हो चुकी है कि यह E85 मानकों के अनुरूप होगा। E85 मॉडल बेंजीन जैसे विषाक्त उत्सर्जन को कम करने के लिए जाने जाते हैं। आम तौर पर, E85-अनुरूप कारों में ईंधन टैंक, ईंधन लाइनों, होज, ईंधन पंप, इंजेक्टर, सील और गास्केट के लिए इथेनॉल-प्रतिरोधी सामग्री की आवश्यकता होती है।
E85 फ्यूल की ऑक्टेन रेटिंग 100-110 होती है, जो टर्बोचार्ज्ड सेटअप में हायर कमप्रेशन अनुपात और अधिक बूस्ट की अनुमति देती है। स्वच्छ दहन के साथ, इंजन का घिसाव कम होता है। प्राकृतिक रूप से एस्पिरेटेड इंजनों में उपयोग किए जाने पर E85 फ्यूल के साथ प्रदर्शन लाभ अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि, एक सुचारू टॉर्क वितरण संभव है। एक्स्ट्रा पार्ट्स और बदलावों के साथ, E85 मॉडल आमतौर पर अपने केवल पेट्रोल समकक्षों की तुलना में महंगे होते हैं। हालांकि, इनसे हर महीने पेट्रोल की तुलना में बचत होती है।
लेखक के बारे में
Narendra Jijhontiyaनरेंद्र जिझोतिया देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी लेखनी के लिए चर्चित नाम बन चुके हैं। गाड़ियों का रिव्यू, फर्स्ट राइडिंग इम्प्रेशन, कम्पेरिजन, सेल्स एनालिसिस, यूटिलिटी (DIY, How To Do) जैसे विषयों पर उनकी शानदार पकड़ है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट को लेकर वो लगातार सुर्खियों में रहते हैं। ऑटो के लॉन्च इवेंट में अपने अलग एंगल के लिए भी उन्हें जाना जाता है। वे लाइव हिन्दुस्तान के साथ असिस्टेंट न्यूज एडिटर के तौर पर पिछले 4 सालों से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पत्रकारिता पूरी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ (रायपुर) में बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर की। 18 साल के लंबे करियर के दौरान वे बंसल न्यूज (भोपाल), दैनिक भास्कर डिजिटल (भोपाल) समेत 5 संस्थानों में काम कर चुके हैं। वे स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई सेक्शन में काम कर चुके हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में यूरेका अवॉर्ड, हाईफाइव अवॉर्ड, बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं, लाइव हिन्दुस्तान में डिजी स्टार अवॉर्ड का सम्मान मिल चुका है। वे टीवी जर्नलिज्म के दौरान हॉकी मैच में लाइव कॉमेंट्री भी कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट खेलना, सिगिंग, साइकिलिंग पसंद है।
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