
चारों खाने चित्त! कंपनी के 4 मॉडल और सब फिसड्डी, नवंबर की सेल 253 यूनिट पर सिमटी; सीधे नंबर-14 पर पहुंची
जीप के पास वर्तमान में 4 मॉडल हैं। इसके बावजूद भी इसकी बिक्री नवंबर 2025 में 300 यूनिट के आंकड़े को नहीं पार कर पाई। नवंबर 2025 में जीप (Jeep) के बिक्री आंकड़े ने कंपनी की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय ऑटो मार्केट में जहां हर महीने हजारों-लाखों गाड़ियां बिक रही हैं, वहीं जीप इंडिया (Jeep India) के लिए नवंबर 2025 कुछ खास अच्छा नहीं रहा। कंपनी के पोर्टफोलियो में भले ही दमदार SUV मौजूद हों, लेकिन बिक्री के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। जी हां, क्योंकि नवंबर 2025 में जीप (Jeep) की कुल बिक्री सिर्फ 253 यूनिट पर सिमट गई। नवंबर 2025 में जीप इंडिया ने कुल 253 गाड़ियां बेचीं। यह आंकड़ा न सिर्फ बड़े ब्रांड्स से काफी पीछे है, बल्कि मिड-साइज SUV सेगमेंट में भी जीप (Jeep) की कमजोर पकड़ को दिखाता है।






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जीप की मॉडल-वाइज बिक्री
जीप के मॉडल-वाइज बिक्री की बात करें तो इसमें जीप कंपास (Jeep Compass) की बिक्री 157 यूनिट रही। वहीं, जीप मरेडियन (Jeep Meridian) की सेल 63 यूनिट रही। इसके अलावा जीप रैंगलर (Jeep Wrangler) ने 19 यूनिट और जीप ग्रैंड चेरोकी (Jeep Grand Cherokee) की 14 यूनिट सेल हुई। स्पष्ट है कि जीप (Jeep) की बिक्री का बड़ा हिस्सा अब भी कंपास (Compass) पर टिका हुआ है, जबकि बाकी मॉडल्स सीमित ग्राहकों तक ही सिमट गए हैं।
सिर्फ 4 मॉडल, फिर भी संघर्ष जारी
जीप (Jeep) इंडिया के पास फिलहाल केवल 4 कार मॉडल हैं और ये सभी SUV सेगमेंट में आते हैं। इसके बावजूद बिक्री का 300 यूनिट से नीचे रहना कंपनी के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। खासकर तब, जब इसी सेगमेंट में टाटा (Tata), महिंद्रा (Mahindra), हुंडई (Hyundai) और मारुति (Maruti) जैसे ब्रांड हजारों यूनिट्स बेच रहे हैं।
नवंबर 2025: भारत में कार बिक्री
| रैंक | कंपनी (OEM) | बिक्री Nov-25 | बिक्री Nov-24 | YoY ग्रोथ % | बिक्री Oct-25 | MoM ग्रोथ % | मार्केट शेयर Nov-25 | मार्केट शेयर Nov-24 | शेयर में बदलाव |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मारुति सुजुकी | 1,70,971 | 1,41,312 | 21.0% | 1,76,318 | -3.0% | 41.0% | 40.2% | +0.8% |
| 2 | टाटा मोटर्स | 57,436 | 47,063 | 22.0% | 61,134 | -6.0% | 13.8% | 13.4% | +0.4% |
| 3 | महिंद्रा | 56,336 | 46,222 | 21.9% | 71,624 | -21.3% | 13.5% | 13.1% | +0.3% |
| 4 | हुंडई | 50,340 | 48,246 | 4.3% | 53,792 | -6.4% | 12.1% | 13.7% | -1.7% |
| 5 | टोयोटा | 30,085 | 25,183 | 19.5% | 40,257 | -25.3% | 7.2% | 7.2% | 0.0% |
| 6 | किआ | 25,489 | 20,600 | 23.7% | 29,556 | -13.8% | 6.1% | 5.9% | +0.2% |
| 7 | एमजी मोटर | 5,754 | 6,019 | -4.4% | 6,397 | -10.1% | 1.4% | 1.7% | -0.3% |
| 8 | स्कोडा | 5,491 | 2,886 | 90.3% | 8,252 | -33.5% | 1.3% | 0.8% | +0.5% |
| 9 | होंडा | 5,204 | 5,005 | 4.0% | 6,394 | -18.6% | 1.2% | 1.4% | -0.2% |
| 10 | रेनो | 3,662 | 2,811 | 30.3% | 4,672 | -21.6% | 0.9% | 0.8% | +0.1% |
| 11 | फॉक्सवैगन | 3,342 | 3,033 | 10.2% | 4,048 | -17.4% | 0.8% | 0.9% | -0.1% |
| 12 | निसान | 1,908 | 2,342 | -18.5% | 2,615 | -27.0% | 0.5% | 0.7% | -0.2% |
| 13 | सिट्रोएन | 1,224 | 509 | 140.5% | 1,426 | -14.2% | 0.3% | 0.1% | +0.1% |
| 14 | जीप | 253 | 361 | -29.9% | 329 | -23.1% | 0.1% | 0.1% | 0.0% |
| कुल बिक्री | 4,16,898 | 3,51,912 | 18.5% | 4,32,714 | -3.7% | 100% | 100% | — |
पिछले 6 महीनों का ट्रेंड क्या कहता है?
| मॉडल | Jun 2025 | Jul 2025 | Aug 2025 | Sep 2025 | Oct 2025 | Nov 2025 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| कंपास | 129 | 129 | 97 | 140 | 170 | 157 |
| मेरेडियन | 107 | 96 | 75 | 110 | 120 | 63 |
| रैंगलर | 21 | 20 | 32 | 47 | 34 | 19 |
| ग्रैंड चेरोकी | 5 | 6 | 6 | 3 | 5 | 14 |
| टोटल सेल | 262 | 251 | 210 | 300 | 329 | 253 |
अगर जीप (Jeep) की पिछले 6 महीनों की बिक्री ट्रेंड पर नजर डालें, तो तस्वीर ज्यादा उम्मीद जगाने वाली नहीं है। हर महीने बिक्री सीमित दायरे में ही घूमती नजर आती है। कंपास (Compass) की बिक्री में हल्का उतार-चढ़ाव जरूर दिखता है, लेकिन कोई बड़ा उछाल नहीं देखने को मिला। मेरेडियन (Meridian) और ग्रैंड चेरोकी (Grand Cherokee) जैसी प्रीमियम SUVs की बिक्री लगातार कम बनी हुई है। रैंगलर (Wrangler) जैसे लाइफस्टाइल SUV की डिमांड भी निच मार्केट तक ही सीमित है। कुल मिलाकर जीप (Jeep) की मासिक बिक्री पिछले 6 महीनों से स्थिर, लेकिन कम स्तर पर बनी हुई है।
कमजोर बिक्री के पीछे क्या कारण?
जीप (Jeep) की कम बिक्री के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। इसमें सीमित मॉडल लाइन-अप, ज्यादा कीमत और महंगा मेंटेनेंस है। इसके अलावा नेटवर्क और सर्विस सेंटर्स की कमी भी इसकी बड़ी वजह है। नई और अपडेटेड SUVs की कमी और भारतीय ग्राहकों का अब फीचर-लोडेड और किफायती विकल्पों की ओर झुकाव भी एक वजह हो सकती है।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




