ईरान युद्ध का असर: भारतीय ऑटो कंपनियों ने रोकी मिडिल ईस्ट को गाड़ियों की शिपमेंट, बढ़ गई चिंता

Mar 06, 2026 06:07 am ISTSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के ऑटो सेक्टर पर भी दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। यही वजह है कि भारत की कई बड़ी ऑटो कंपनियों ने फिलहाल मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के कुछ देशों में गाड़ियों की शिपमेंट टाल दी है। 

ईरान युद्ध का असर: भारतीय ऑटो कंपनियों ने रोकी मिडिल ईस्ट को गाड़ियों की शिपमेंट, बढ़ गई चिंता

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के ऑटो सेक्टर पर भी दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। यही वजह है कि भारत की कई बड़ी ऑटो कंपनियों ने फिलहाल मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के कुछ देशों में गाड़ियों की शिपमेंट टाल दी है। जानकारों के मुताबिक, हालात सामान्य होने तक कंपनियां इंतजार कर रही हैं, ताकि बढ़े हुए शिपिंग खर्च और युद्ध से जुड़े जोखिमों से बचा जा सके। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

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बड़ी कंपनियों ने रोकी गाड़ियों की सप्लाई

इस स्थिति का असर भारत की कई बड़ी ऑटो कंपनियों पर पड़ा है। इनमें टाटा (Tata Motors), मारुति (Maruti Suzuki India) , हुंडई (Hyundai Motor India), फॉक्सवैगन ग्रुप (Volkswagen Group) जैसी कंपनियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों ने मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) के लिए कारों और कमर्शियल व्हीकल्स की शिपमेंट फिलहाल रोक दी है। इसका मुख्य कारण समुद्री रास्तों पर खतरा और तेजी से बढ़ता फ्रेट चार्ज है।

होरमुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा संकट

मिडिल ईस्ट में व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता Strait of Hormuz फिलहाल सबसे बड़ा चिंता का कारण बना हुआ है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला हो सकता है। ऐसे में कई शिपिंग कंपनियां इस रूट से जाने से बच रही हैं। अगर जहाजों को अफ्रीका के रास्ते भेजा जाता है तो शिपिंग लागत कई गुना बढ़ सकती है, जिससे ऑटो कंपनियों की लागत और मुनाफा दोनों प्रभावित होंगे।

शिपिंग लागत में भारी उछाल

सूत्रों के मुताबिक, युद्ध की वजह से कंटेनर शिपिंग पर अतिरिक्त 2000 डॉलर तक का इमरजेंसी सरचार्ज लग सकता है। इसके अलावा युद्ध जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी महंगा हो गया है। आमतौर पर ऑटो कंपनियों की कुल आय में फ्रेट खर्च लगभग 1% से 3% तक होता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह खर्च और बढ़ सकता है।

दोपहिया कंपनियों पर भी असर

इस संकट का असर सिर्फ कार कंपनियों तक सीमित नहीं है। भारत की बड़ी दोपहिया कंपनी Bajaj Auto ने भी खाड़ी देशों के लिए अपनी शिपमेंट फिलहाल रोक दी है। बताया जा रहा है कि कंपनी के कुल एक्सपोर्ट में लगभग 3% हिस्सा गल्फ देशों से आता है। इसके अलावा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी कंटेनर की कमी और जहाजों के डॉकिंग में परेशानी की खबर है।

एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है बड़ा असर

ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए बहुत बड़ा बाजार है। मारुति (Maruti Suzuki India) के कुल एक्सपोर्ट में करीब 12.5% हिस्सा मिडिल ईस्ट का है। वहीं, हुंडई (Hyundai Motor India) के लिए यह आंकड़ा लगभग 40% तक है। अगर युद्ध लंबा चलता है तो कंपनियों की बिक्री और मुनाफे दोनों पर असर पड़ सकता है।

शेयर बाजार में भी दिखा असर

इस तनाव का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। ऑटो सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स NSE Nifty Auto Index युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 3.9% तक गिर चुका है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात लंबे समय तक खराब रहे तो एक्सपोर्ट और प्रॉफिट दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध ने भारत के ऑटो एक्सपोर्ट को अस्थायी झटका दिया है। फिलहाल कंपनियां 2–3 हफ्ते तक शिपमेंट रोककर हालात पर नजर रख रही हैं। लेकिन, अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारतीय ऑटो कंपनियों की बिक्री, लागत और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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