हाइड्रोजन फ्यूल से पूरी तरह बदलेगी ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री, सरकार देशभर में 10 रूट पर कर रही ट्रायल
आने वाले समय में हमें हाइड्रोजन फ्यूल पर चलने वाली बसें दिखेंगी। नियन मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री का है और सरकार देशभर में 10 रूट्स पर इसे फ्यूल की तरह इस्तेमाल करने के लिए ट्रायल भी कर रही है।

E20, E85 और E100 के बाद अब सरकार का फोकस हाइड्रोजन को फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने पर है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार यूनियन मिनिस्टर नितिन गडकरी ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री का है और सरकार देशभर में 10 रूट्स पर इसे फ्यूल की तरह इस्तेमाल करने के लिए ट्रायल भी कर रही है। गांधीनगर में आयोजित प्रवास 5.0 और भारत प्रवास अवॉर्ड्स कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने बताया कि फिलहाल ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडप्पल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और एनएच-16 पर विशाखापत्तनम-बय्यावरम रूट्स पर हाइड्रोजन वाहनों का परीक्षण किया जा रहा है।
हाइड्रोजन ही है भविष्य का ईंधन
गडकरी ने कहा कि सड़क परिवहन मंत्रालय 10 अलग-अलग रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रायल चला रहा है और उन्हें पूरा विश्वास है कि भविष्य में ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में हाइड्रोजन की बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है और भारत कम लागत और बेहतर टेक्नोलॉजी के दम पर दुनिया में लीडर बन सकता है।
बस मैन्युफैक्चरर से की बेहतर टेक्नॉलजी अपनाने की अपील
गडकरी ने कहा कि बस मैन्युफैक्चरर और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर ऐसी बसें तैयार करें, जो वर्ल्डक्लास टेक्नोलॉजी से लैस हों और पैसेंजर्स को ज्यादा कंफर्टेबल ट्रैवल एक्सपीरियंस दें। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरर्स की जिम्मेदारी है कि वे सही कीमत पर बेहतर क्वॉलिटी और अधिक फीचर्स वाली बसें बाजार में उपलब्ध कराएं।
हर साल 3 लाख बसों की जरूरत, बनती हैं सिर्फ 70-80 हजार
गडकरी ने बस प्रोडक्शन की कैपेसिटी को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल करीब 3 लाख बसों की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा समय में मैन्युफैक्चरर केवल 70 से 80 हजार बसें ही बना पा रहे हैं। उन्होंने इंडस्ट्री से मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को करीब तीन गुना बढ़ाने की अपील की ताकि देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इलेक्ट्रिक बसों की कीमत भी होनी चाहिए कम
उन्होंने इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनियों से भी कहा कि लिथियम-आयन बैटरियों की लागत में आई कमी का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया जाए। गडकरी ने बताया कि फिलहाल चार्जिंग के लिए बिजली की लागत करीब 20 रुपये प्रति यूनिट पड़ रही है, जो काफी ज्यादा है। सरकार इस लागत को कम करने पर काम कर रही है, ताकि बस, ट्रक और कार जैसे इलेक्ट्रिक वीइकल्स का संचालन और सस्ता हो सके।
बस बॉडी निर्माताओं को बड़ी राहत
गडकरी ने बताया कि सरकार ने पिछले साल सितंबर में बसों को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए नया बस बॉडी कोड लागू किया था। अब बस बॉडी बनाने वाली इंडस्ट्री को राहत देने के लिए टेस्टिंग शुल्क में 50 फीसदी की कटौती करने का फैसला लिया गया है। साथ ही, मंजूरी मिलने का समय भी 16 हफ्ते से घटाकर 6 हफ्ते कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि देशभर में 600 से ज्यादा बस बॉडी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में करीब 75 हजार लोग काम करते हैं और इस फैसले से उन्हें सीधा फायदा मिलेगा।
निजी बसपोर्ट और ग्रीन एक्सप्रेसवे पर भी सरकार का फोकस
गडकरी ने कहा कि सरकार निजी बसपोर्ट डिवेलप करने के लिए भी काम कर रही है। इसके अलावा देशभर में बन रहे ग्रीन एक्सप्रेसवे सफर का समय कम करेंगे, जिससे ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री की लागत घटेगी और कारोबारियों की इनकम और प्रॉफिट में भी बढ़ोतरी होगी।


