
फाइन ₹1,000, वसूली ₹1,200? ट्रैफिक चालान और छूट पर हाईकोर्ट ने उठाए बड़े सवाल, तर्क सुनकर आप भी चौंक जाएंगे
तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस नीति पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें पुराने ट्रैफिक चालानों पर भारी डिस्काउंट देकर उन्हें निपटाने का मौका दिया जाता है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की स्कीमें जुर्माने का डर कम कर देती हैं।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस नीति पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें पुराने ट्रैफिक चालानों पर भारी डिस्काउंट देकर उन्हें निपटाने का मौका दिया जाता है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की स्कीमें जुर्माने का डर कम कर देती हैं और लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने लगते हैं। यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक नागरिक ने न सिर्फ अपने चालान को चुनौती दी, बल्कि पूरे फाइन सिस्टम पर सवाल उठाए। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।





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ट्रिपल राइडिंग पर 1,235 का चालान
याचिकाकर्ता वी. राघवेंद्र चार्य, जो तारनाका के निवासी हैं, जिनको ट्रिपल राइडिंग पर 1,235 का ई-चालान मिला था। इसमें 1,200 जुर्माना, 35 यूजर चार्ज शामिल थे। चार्य का दावा था कि चालान में कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि किस सेक्शन/कानून के तहत उन्हें यह जुर्माना दिया गया है।
कानून क्या कहता है?
सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (Central Motor Vehicles Rules) के रूल 167 और 167-A के मुताबिक हर चालान में संबंधित कानूनी सेक्शन का उल्लेख करना अनिवार्य है। चार्य ने कहा कि ट्रिपल राइडिंग पर जुर्माना 100 रुपये–300 रुपये होना चाहिए, जैसा कि सेक्शन 128 + 177 में दिया गया है, ये 1,200 कैसे हो गया?
उनका यह भी कहना था कि 2019 में मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए जुर्माना बढ़ोतरी वाले संशोधन तेलंगाना ने अभी अपनाए ही नहीं, इसलिए उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। सरकार का जवाब, लेकिन कोर्ट ने दो बड़ी गलतियां पकड़ लीं। सरकार ने कहा कि चार्य को सेक्शन 184 (डेंजरस ड्राइविंग) के तहत बुक किया गया था, जिसमें जुर्माना 1,000 रुपये है। उन्होंने माना कि ई-चालान पोर्टल पर अभी सेक्शन नहीं दिखते, लेकिन टेक्निकल अपग्रेड चल रहा है।
लेकिन कोर्ट ने दो बड़ी खामियां बताईं
1- चालान में कोई सेक्शन/रूल नहीं लिखा हुआ, जो सीधे नियमों का उल्लंघन है।
2- अगर सेक्शन 184 लागू था, तो फाइन 1,000 ही होना चाहिए, लेकिन 1,200 वसूले गए।
इससे एक्सेस कलेक्शन (अतिरिक्त वसूली) का सवाल उठा। सबसे बड़ा मुद्दा हाईकोर्ट द्वारा डिस्काउंट सिस्टम की आलोचना है। कोर्ट ने सबसे सख्त टिप्पणी ट्रैफिक चालानों पर मिलने वाले डिस्काउंट पर की। कोर्ट ने कहा कि जुर्माने लगाने के बाद छूट देना कानून के डर को खत्म कर देता है और लोगों को बार-बार नियम तोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि साल के अंत में बड़ी छूट देने से यह पूरा सिस्टम सड़क सुरक्षा नहीं, बल्कि कमाई का तरीका लगता है।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट ने तेलंगाना पुलिस और हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस से जानकारी मांगी कि फाइन कैसे तय होता है? चालानों में सेक्शन क्यों नहीं दिखते? ई-चालान सिस्टम कैसे काम करता है और डिस्काउंट स्कीम का आधार क्या है?
इस मामले पर अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। अगर हाई कोर्ट सख्त रुख अपनाती है, तो हर चालान में कानूनी सेक्शन अनिवार्य होगा। अधिक वसूली पर रोक लग सकती है और डिस्काउंट स्कीमें बंद हो सकती हैं। इसके साथ ही ट्रैफिक नियमों का पालन और सख्त होगा और चालान सिस्टम ज्यादा पारदर्शी व जिम्मेदार बनेगा।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




