E20 पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी: 5% तक घट सकता है कुछ गाड़ियों का माइलेज, पर ये होंगे बड़े फायदे
पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को E20 फ्यूल से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। सरकार ने साफ कर दिया है कि इथेनॉल मिले पेट्रोल से कुछ गाड़ियों का माइलेज 3 से 5 पर्सेंट तक कम हो सकता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को एफएक्यू (FAQ) दस्तावेज जारी कर नए E20 फ्यूल से जुड़े लोगों के मन में उठ रहे कई सवालों के जवाब दिए। सरकार ने साफ कर दिया है कि 20 पर्सेंट इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से कुछ गाड़ियों का माइलेज 3 से 5 पर्सेंट तक कम हो सकता है। इस नए फ्यूल को लेकर सरकार का कहना है कि सिर्फ माइलेज ही सब कुछ नहीं होता। इस पेट्रोल से पर्यावरण को बहुत फायदा होगा और गाड़ियों का पिकअप भी बेहतर होगा। इसके साथ ही सरकार ने यह भी खुलकर बताया कि आखिर यह नया पेट्रोल शुद्ध पेट्रोल या कम इथेनॉल वाले पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं मिल पा रहा है।
क्यों आ रही ज्यादा लागत?
बता दें कि लोग और विपक्षी नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं कि जब इसमें 20 पर्सेंट इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो यह पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है? सरकार ने बताया कि वह देश के किसानों को उनकी फसल का सही और अच्छा दाम दे रही है। मिसाल के तौर पर, मक्के से बनने वाले इथेनॉल को सरकार 71.86 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है। इसमें अभी टैक्स, गाड़ी का भाड़ा और रखने का खर्चा अलग से जुड़ेगा। यही वजह है कि जब दुनिया में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होता है, तो शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले E20 फ्यूल बनाना थोड़ा महंगा पड़ता है।
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कब दिखेगा असली फायदा?
सरकार के अनुसार, इस इथेनॉल का असली फायदा तब समझ आएगा जब दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छुएंगे। अगर ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है, तो इथेनॉल वाला पेट्रोल शुद्ध पेट्रोल से बहुत सस्ता पड़ेगा। भारत में 20 पर्सेंट इथेनॉल मिलाए जाने की वजह से ही हमारा मार्केट दुनिया में तेल के घटते-बढ़ते दामों के झटकों से बचा हुआ है। इसी कारण से दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम उतने ज्यादा नहीं बढ़े हैं।
माइलेज की मामूली कमी
मंत्रालय ने कहा कि भले ही माइलेज में थोड़ी बहुत कमी आए, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं। E20 पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग बहुत अच्छी होती है, जिससे इंजन में खटखट की आवाज नहीं आती और वह साफ रहता है। इसे डालने से गाड़ी को बेहतर पिकअप मिलेगा और गाड़ी एकदम स्मूथ चलेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इससे पॉल्यूशन बहुत कम होगा। साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कार्बन गैसों में करीब 40% पर्सेंट तक की कमी आएगी। आसान शब्दों में कहें तो यह पेट्रोल पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा साफ और बेहतर है।
लंबी तैयारी के बाद हुआ फैसला
सरकार ने उन बातों को भी गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि इस फैसले को बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में लागू कर दिया गया। सरकार ने बताया कि इसकी तैयारी पिछले 25 साल से चल रही थी। साल 2001 में इसके छोटे-छोटे टेस्ट शुरू हुए थे। वहीं, 2013 में इसकी पॉलिसी बनी और 2021 से इस काम में भारी पैसा लगाया गया। इस ईंधन को मार्केट में उतारने से पहले गाड़ी बनाने वाली कंपनियों, जांच एजेंसियों, तेल कंपनियों और खाद्य विभाग समेत हर छोटे-बड़े संगठन से पूरी बातचीत की गई थी।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumarदेश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।
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