
पुरानी बाइक और कार मालिकों के लिए बड़ा झटका! सरकार ने बढ़ा दी फिटनेस टेस्ट फीस, जानें आपकी गाड़ी का कितना लगेगा?
भारत में अब पुरानी गाड़ियों को चलाना काफी महंगा पड़ सकता है। जी हां, क्योंकि सरकार ने 15 से 20 साल की पुरानी गाड़ियों की फिटनेस टेस्ट फीस बढ़ा दी है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा, जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं। आइए फिटनेस टेस्ट की नई फीस पर एक नजर डालते हैं।
भारत में पुरानी गाड़ियों को हटाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठा दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई नियमावली 11 नवंबर की अधिसूचना के बाद लागू हो चुकी है। अब 20 साल से ज्यादा पुरानी कार, बाइक, बस या ट्रक को सड़क पर रखने के लिए जेब और भी ढीली करनी पड़ेगी। आइए इसे जरा विस्तार से समझते हैं।





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नए फिटनेस टेस्ट नियम के 3 नए स्लैब
MoRTH ने फिटनेस टेस्ट के लिए वाहनों को 3 प्रमुख टाइम पीरियड में बांटा है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कमर्शियल वाहनों पर कड़े नियम अब 10 साल से ही लागू होंगे, जबकि पहले यह 15 साल के बाद लागू होता था, यानी ट्रक, बस, टैक्सी और अन्य कमर्शियल गाड़ियां अब जल्दी महंगी पड़ने लगेंगी।
वहीं, LMV (कारें/जीप/SUV) मालिकों के लिए नई फिटनेस फीस तय की गई है। 20 साल पार कर चुकी कारों के लिए फिटनेस टेस्ट फीस में बड़ा उछाल आया है। जहां पहले 10,000 रुपये में काम हो जाता था, वहां अब 15,000 रुपये भरने पड़ेंगे।
सबसे बड़ा झटका भारी वाहनों को
20 साल पार कर चुके भारी वाहनों के लिए फीस में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। हैवी कमर्शियल व्हीकल्स (20+ साल) पर पहले 3,500 रुपये फीस लगती थी, जिसके लिए अब 25,000 रुपये तक चुकाने पड़ेंगे। इतना ही नहीं, मीडियम कमर्शियल व्हीकल (20+ साल) के लिए अब 20,000 रुपये तक देने पड़ेंगे। इसके अलावा लाइट कॉमर्शियल व्हीकल (20+ साल) पर नई फीस 15,000 रुपये तय की गई है।
टू-व्हीलर के लिए नई फीस
20 साल पुरानी दो-पहिया गाड़ियों पर भी अब फिटनेस टेस्ट महंगा पड़ेगा। जहां पहले 600 रुपये में ये काम हो जाता था, वहीं, अब इसके लिए पूरे 2,000 रुपये भरने पड़ेंगे। यह लगभग चार गुना की बढ़ोतरी है।
क्यों बढ़ाई गई फिटनेस टेस्ट फीस?
सरकार द्वारा फिटनेस टेस्ट फीस बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण पुरानी गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण है। इसके अलावा कम सेफ्टी फीचर्स हैं, जो पुराने मॉडल में बेहद सीमित होते थे। इसके अलावा मुख्य कारणो में पुराने कॉमर्शियल व्हीकल्स से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं भी हैं। साथ ही सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी को बढ़ावा देना चाहती है।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




