सरकार ने EV के लिए ₹10900 करोड़ दिए, लेकिन बजट खत्म होने तक ही मिलेगा सब्सिडी का फायदा
FY26 में कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल रिटेल सेल्स 24.6% बढ़कर 2.45 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि e2W बिक्री 21.8% बढ़कर 1.40 मिलियन यूनिट हो गई, जो एक साल पहले 1.15 मिलियन यूनिट थी। केंद्र सरकार के इस कदम से कंपनी और ग्राहक, दोनों को कुछ समय के लिए राहत मिली है।

देश के अंदर इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट आगे तो बढ़ रहा है, लेकिन इसकी स्पीड खरगोश की ना होकर कुछआ चाल है। इस सेगमेंट के आगे बढ़ने की एक अहम वजह ग्राहकों को व्हीकल पर मिलने वाली सब्सिडी भी है। क्रेंद सराकर द्वार और कुछ राज्यों द्वारा इलेक्ट्रिक व्हीकल पर मिलने वाली सब्सिडी ने लोगों के लिए इनकी खरीद आसान बनाई है। अब सरकार ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से सप्लाई रिस्क का हवाला देते हुए सब्सिडी को आगे तक बढ़ा दिया है। यानी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए सब्सिडी जुलाई 2026 तक और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए इसे मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।






दरअसल, FY26 में कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल रिटेल सेल्स 24.6% बढ़कर 2.45 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि e2W बिक्री 21.8% बढ़कर 1.40 मिलियन यूनिट हो गई, जो एक साल पहले 1.15 मिलियन यूनिट थी। केंद्र सरकार के इस कदम से कंपनी और ग्राहक, दोनों को कुछ समय के लिए राहत मिली है। हालांकि, इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या यह किसी रुकावट से बचने के लिए एक अस्थायी सहारा है? या फिर, EV को अपनाने की प्रक्रिया को सही रास्ते पर बनाए रखने का एक खास प्रयास है?
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10,900 करोड़ रुपए का बजट दिया
सरकार ने 10,900 करोड़ रुपए की PM E-DRIVE योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को आगे बढ़ाया है, लेकिन यह सब्सिडी सभी के लिए एक जैसी नहीं है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए मिलने वाले इंसेंटिव को तीन महीने के लिए बढ़ाया गया है, जबकि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ई-रिक्शा और ई-कार्ट) के लिए मिलने वाली सब्सिडी को दो साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च, 2028 तक कर दिया गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस पॉलिसी में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, बल्कि यह तो इस योजना के मूल स्वरूप को ही आगे बढ़ाना है।
सब्सिडी पर एनालिस्ट की राय
'सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस' के एनर्जी, रिसोर्स एंड सस्टेनेबिलिटी डिपार्टमेंट के फेलो श्यामशीष दास ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, "इस डेवलपमेंट को पॉलिसी के फोकस में बदलाव के तौर पर देखने के बजाय, PM E-DRIVE योजना के तहत उठाया गया एक सामान्य कदम माना जाना चाहिए। यह एक सीमित बजट वाला कार्यक्रम है। इसमें सब्सिडी तभी तक मिलती है जब तक इसके लिए आवंटित बजट खत्म नहीं हो जाता। बजट खत्म होने के बाद, कोई भी व्हीकल इस सब्सिडी का हकदार नहीं रह जाएगा।"
इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर व्हीकल बनाने वाली कंपनियों, इन्हें खरीदने वालों और फ्लीट ऑपरेटरों पर पड़ेगा। उम्मीद है कि इस डेवलपमेंट से ग्राहकों के लिए इन व्हीकल की कीमतें अफॉर्डेबल बनी रहेंगी। कंपनियों को अपने प्रोडक्शन और निवेश की योजना बनाने में ज्यादा क्लियरिटी मिलेगी। वहीं दूसरी तरफ, एनालिस्ट को इस बात की कोई खास उम्मीद नहीं है कि सिर्फ सब्सिडी की समय-सीमा बढ़ा देने भर से इन व्हीकल की बिक्री में कोई बहुत बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और ऑटोमोटिव सेक्टर के लीडर रजत महाजन ने कहा, “यह कदम बिक्री में कोई बहुत बड़ी तेजी लाने के बजाय, पॉलिसी को और मजबूत बनाने और उसमें एकरूपता बनाए रखने का काम करेगा। समय के साथ-साथ, प्रति वाहन मिलने वाली सब्सिडी में काफी कमी आई है; अब समय आ गया है कि यह इंडस्ट्री अपने दम पर, अपने आर्थिक आधार पर खड़ी हो।”
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को ज्यादा फायदा मिला
केंद्र सरकार का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e2Ws) और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (e3Ws) पर विशेष ध्यान देना भारत के ट्रांसपोर्ट मार्केट के स्ट्रक्चर को ही दर्शाता है। ये सेगमेंट पर्सनल मोबिलिटी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में सबसे ज्यादा हावी हैं। ये पैसेंजर कारों के मुकाबले गाड़ी की शुरुआती कीमत को लेकर कहीं ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसी वजह से ज्यादा कीमत वाले सेगमेंट के मुकाबले यहां सब्सिडी ज्यादा असरदार साबित होती है।
श्यामशीष दास ने कहा कि e2W और e3W, प्राइवेट कारों के उलट, आम लोगों की मोबिलिटी और उनकी रोजी-रोटी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। दूसरी तरफ, प्राइवेट कारों को आज भी ज्यादातर लोग अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए खरीद रहे हैं। इस बात की पुष्टि, इन गाड़ियों को अपनाने से जुड़े डेटा से भी होती है। 13 अप्रैल, 2026 तक, इस योजना के तहत e2W के लिए तय लक्ष्य का लगभग 87% हिस्सा हासिल कर लिया गया था। जबकि e-रिक्शा और e-कार्ट जैसे e3W के मामले में यह आंकड़ा महज 14% के आसपास था।
लेखक के बारे में
Narendra Jijhontiyaनरेंद्र जिझोतिया देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी लेखनी के लिए चर्चित नाम बन चुके हैं। गाड़ियों का रिव्यू, फर्स्ट राइडिंग इम्प्रेशन, कम्पेरिजन, सेल्स एनालिसिस, यूटिलिटी (DIY, How To Do) जैसे विषयों पर उनकी शानदार पकड़ है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट को लेकर वो लगातार सुर्खियों में रहते हैं। ऑटो के लॉन्च इवेंट में अपने अलग एंगल के लिए भी उन्हें जाना जाता है। वे लाइव हिन्दुस्तान के साथ असिस्टेंट न्यूज एडिटर के तौर पर पिछले 4 सालों से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पत्रकारिता पूरी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ (रायपुर) में बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर की। 18 साल के लंबे करियर के दौरान वे बंसल न्यूज (भोपाल), दैनिक भास्कर डिजिटल (भोपाल) समेत 5 संस्थानों में काम कर चुके हैं। वे स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई सेक्शन में काम कर चुके हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में यूरेका अवॉर्ड, हाईफाइव अवॉर्ड, बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं, लाइव हिन्दुस्तान में डिजी स्टार अवॉर्ड का सम्मान मिल चुका है। वे टीवी जर्नलिज्म के दौरान हॉकी मैच में लाइव कॉमेंट्री भी कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट खेलना, सिगिंग, साइकिलिंग पसंद है।
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