
गाड़ी फिटनेस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट से जुड़ी जरूरी खबर, अब इसे बनवाना बेहद मुश्किल; सरकार लागू करने जा रही ये नया नियम
अब वाहन फिटनेस और PUC बनवाना मुश्किल हो सकता है। इसके लिए 10 सेकेंड का वीडियो और जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी। जी हां, क्योंकि सरकार बहुत जल्द इन नियमों में बदलाव कर सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
अगर आप अब तक घर बैठे फिटनेस सर्टिफिकेट या PUC बनवाते आ रहे थे, तो जल्द ही यह रास्ता बंद होने वाला है। केंद्र सरकार सड़क पर चलने वाले वाहनों को लेकर कड़े नियम लाने की तैयारी में है, जिससे फर्जी सर्टिफिकेट और बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर व्हीकल रूल्स में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अब प्राइवेट वाहनों के लिए भी ऑटोमेटेड टेस्टिंग और वीडियो प्रूफ जरूरी होगा।






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अब घर बैठे फिटनेस-पीयूसी नहीं
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब कोई भी निजी वाहन बिना टेस्ट सेंटर जाए फिटनेस या प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं ले सकेगा। हर वाहन को ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन (Automated Test Station -ATS) पर जाकर जांच करानी होगी। ठीक वैसे ही जैसे आज कमर्शियल वाहनों के लिए होता है। इस कदम का मकसद सिस्टम में फैली धांधली खत्म करना और सिर्फ फिट वाहन ही सड़कों पर चलें, यह सुनिश्चित करना है।
देशभर में 160 से ज्यादा ATS
फिलहाल देश में 160 से अधिक ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन काम कर रहे हैं। खासकर 15 साल से पुराने प्राइवेट वाहन अब इन्हीं सेंटरों पर जांच के लिए जाएंगे। ऐसे वाहनों की रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। इसके बाद हर 5 साल में फिटनेस टेस्ट कराना जरूरी रहेगा।
10 सेकेंड का जियो-टैग्ड वीडियो होगा जरूरी
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव वीडियो सबूत होगा। फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने से पहले टेस्ट सेंटर को कम से कम 10 सेकेंड का जियो-टैग्ड वीडियो अपलोड करना होगा। वीडियो में वाहन को आगे, पीछे, दाएं और बाएं से दिखाना जरूरी होगा। नंबर प्लेट, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और वाहन की हालत साफ नजर आनी चाहिए। इससे फर्जी जांच और बैकडेटेड अप्रूवल पर रोक लगेगी।
फेल वाहन को मिलेंगे सिर्फ 180 दिन
अगर कोई वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो मालिक को उसे ठीक कराने के लिए 180 दिन का समय मिलेगा इस अवधि में भी वाहन फिट नहीं हुआ, तो उसे End of Life Vehicle (ELV) घोषित कर दिया जाएगा। वाहन का स्टेटस वाहन (Vahan) पोर्टल पर ELV दिखेगा और वह सड़क पर नहीं चल सकेगा।
अब फीस देकर एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। पहले कई लोग सिर्फ फीस भरकर समय बढ़ा लेते थे, लेकिन अब 180 दिन के बाद कोई एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। वाहन को हर हाल में फिटनेस सर्टिफिकेट लेना ही होगा। सरकार का दावा है कि ATS में गलत रिपोर्टिंग से बचने के लिए कई सेफगार्ड लगाए गए हैं।
सरकार इतना सख्त क्यों हो रही है?
इन बदलावों के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। इसमें बढ़ता वायु प्रदूषण और सड़कों पर चल रहे असुरक्षित और पुराने वाहन हैं। सरकार चाहती है कि या तो वाहन सुरक्षित और प्रदूषण मानकों पर खरा उतरे, या फिर उसे सिस्टम से बाहर कर दिया जाए। सरकार का यह कदम वाहन मालिकों के लिए भले ही थोड़ा झंझट भरा लगे, लेकिन लंबे समय में इससे साफ हवा, सुरक्षित सड़कें और पारदर्शी सिस्टम मिलेगा। आने वाले दिनों में फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट पाना आसान नहीं, बल्कि ईमानदार प्रक्रिया बन जाएगा।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




