E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान, लैब जांच और सड़क टेस्ट में मिला 'क्लीन चिट'; जानिए पूरा मामला
केंद्र सरकार ने संसद में यह साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल तय नियमों के तहत इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के अनुसार, कई संगठनों द्वारा की गई लैब जांच में इसके इस्तेमाल को सही पाया गया।

केंद्र सरकार ने 7 अगस्त को संसद में यह साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल तय नियमों के तहत इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार के अनुसार, सरकारी एजेंसियों, कार कंपनियों और ऑटो इंडस्ट्री के संगठनों द्वारा की गई लैब जांच और गाड़ियों को सड़क पर चलाकर किए गए टेस्ट में इसके इस्तेमाल को सही पाया गया। भारी उद्योग मंत्रालय ने संसद में एक लिखित जवाब में बताया कि इन सभी जांच के दौरान इंजन की मजबूती, गाड़ियों की परफॉर्मेंस और उनके माइलेज की बारीकी से जांच की गई है। इन सभी टेस्ट्स के बाद ही देश में E20 फ्यूल को हरी झंडी दी गई है। आइए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से।
जांच में कौन-कौन शामिल?
संसद में दिए गए अपने जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय ने जानकारी दी कि E20 पेट्रोल की जांच में देश की कई बड़ी और जानी-मानी संस्थाएं शामिल थीं। इनमें ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और प्रमुख कार निर्माता कंपनियां शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर E20 ईंधन की सुरक्षा और असर का गहराई से पता लगाया। हर स्तर पर वैज्ञानिक जांच के बाद ही इस फ्यूल को आम लोगों के इस्तेमाल के लिए मार्केट में उतारने का फैसला लिया गया।
किन बातों पर रखा गया ध्यान?
मंत्रालय के अनुसार, जांच के दौरान गाड़ियों के प्रदर्शन से जुड़े लगभग हर पहलू को परखा गया। इसमें मुख्य रूप से इंजन की मजबूती, गाड़ी चलाने का अनुभव, कड़ाके की ठंड में इंजन चालू होने की क्षमता, जंग से बचाव, पार्ट्स की तालमेल, फ्यूल सिस्टम की मजबूती, धुएं का स्तर और माइलेज जैसे पॉइंट शामिल थे। इन सभी टेस्ट्स के बाद एक्सपर्ट्स ने पाया कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों को चलाने में किसी तरह की कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत नहीं आती है।
कमेटी और रिसर्च का बड़ा रोल
E20 ईंधन के इस्तेमाल और गाड़ियों पर इसके असर को जांचने के लिए 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने एथेनॉल मिलाने से गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स और माइलेज पर पड़ने वाले असर की पूरी जांच की। इस पूरी रिपोर्ट को IOCL, ARAI और SIAM द्वारा की गई रिसर्च से मजबूती मिली। पेट्रोल-डीजल बेचने वाली कंपनियों से लेकर पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों तक, सभी ने E20 को धीरे-धीरे मार्केट में लाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है।
पुरानी गाड़ियों पर पड़ेगा बुरा असर?
आम लोगों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ था कि क्या पुरानी गाड़ियों में E20 पेट्रोल डालने से इंजन खराब हो जाएगा? इस पर सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। मंत्रालय ने कहा कि लैब और जमीनी टेस्ट्स में पुरानी यानी 'लीगेसी' गाड़ियों पर E20 पेट्रोल का कोई बड़ा या खराब असर देखने को नहीं मिला है। सामान्य तरीके से चलाने पर गाड़ियों के पार्ट्स, परफॉर्मेंस या लाइफ को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।



