इलेक्ट्रिक कारों का क्रेज हुआ कम, कंपनियों को अरबों का लगा झटका; जानिए क्या है बड़ी वजह
साल 2026 की शुरुआत इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के लिए कुछ खास अच्छी नहीं रही। बता दें कि जनवरी 2026 में दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर करीब 3 पर्सेंट घटकर लगभग 12 लाख यूनिट रह गई।

साल 2026 की शुरुआत इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) के लिए कुछ खास अच्छी नहीं रही। बता दें कि जनवरी 2026 में दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर करीब 3 पर्सेंट घटकर लगभग 12 लाख यूनिट रह गई। इसमें बैटरी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड दोनों गाड़ियां शामिल हैं। यह जानकारी कंसल्टेंसी फर्म बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस के आंकड़ों और रायटर्स की रिपोर्ट से सामने आई है। EV बिक्री में यह गिरावट खासतौर पर चीन और नॉर्थ अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में कमजोर मांग की वजह से देखने को मिली है। बता दें कि यहां नीतियों में बदलाव और सब्सिडी कम होने का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है।
क्या है डिमांड घटने की वजह
दरअसल, कई बड़े EV बाजारों में सरकारें अब पहले जैसी रियायतें नहीं दे रही हैं। चीन और यूरोपीय यूनियन दोनों ने ही कुछ ऐसे नियमों और इंसेंटिव्स को या तो वापस लिया है या ढीला किया है, जिनकी वजह से पहले इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही थी। इसका नतीजा यह हुआ कि साल की शुरुआत में ही EV की डिमांड ठंडी पड़ गई। इसी बीच हाइब्रिड गाड़ियों की मांग बढ़ने लगी है, क्योंकि लोग पेट्रोल-डीजल और पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार के बीच का एक आसान और सस्ता ऑप्शन तलाश रहे हैं।
चीन में करीब 20% घट गया रजिस्ट्रेशन
अगर चीन की बात करें तो यहां जनवरी में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन करीब 20 पर्सेंट गिरकर 6 लाख यूनिट से नीचे आ गई। यह आंकड़ा पिछले करीब दो साल में सबसे कम मासिक बिक्री माना जा रहा है। इसकी बड़ी वजह सरकारी सब्सिडी में कटौती और नई खरीद टैक्स नीति है, जिससे ग्राहकों का रुझान कम हुआ। वहीं, नॉर्थ अमेरिका में हालात और भी ज्यादा खराब रहे। यहां EV रजिस्ट्रेशन में 33 पर्सेंट की भारी गिरावट दर्ज की गई।
सिर्फ यूरोप में EV बिक्री में बढ़ोतरी
यूरोप एकमात्र ऐसा बड़ा एरिया रहा जहां EV बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली। जनवरी में यहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन करीब 24 पर्सेंट बढ़कर 3.20 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई। हालांकि, यह भी पिछले एक साल में सबसे धीमी ग्रोथ मानी जा रही है। वहीं, बाकी दुनिया के बाजारों में तस्वीर थोड़ी बेहतर रही। थाईलैंड जैसे देशों में सरकारी इंसेंटिव और दक्षिण कोरिया व ब्राजील जैसे बाजारों में बढ़ती मांग के चलते EV रजिस्ट्रेशन करीब 92 पर्सेंट उछलकर लगभग 1.90 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
कमजोर मांग का असर कंपनियों पर भी
कमजोर मांग का असर कंपनियों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका पर ज्यादा निर्भर बड़ी ऑटो कंपनियों को बीते एक साल में करीब 55 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा है। अब कई चीनी EV कंपनियां साउथईस्ट एशिया जैसे बाजारों में एक्सपोर्ट बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं, जहां अभी भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग मजबूत बनी हुई है।
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumarदेश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।
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