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दिल्ली की जहरीली हवा को साफ बनाने एक्सपर्ट ने दी EV खरीदने की सलाह, पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य भी सुधरेगा

दिल्ली की जहरीली हवा को साफ बनाने एक्सपर्ट ने दी EV खरीदने की सलाह, पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य भी सुधरेगा

संक्षेप:

दिल्ली में सर्दी की शुरूआत होते ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। कई जगहों पर तो AQI का लेवल 450 से सुरक्षात्मक सीमा से बहुत ज्यादा हो गया है। राजधानी में वायु प्रदूषण मुख्य रूप से वाहनों के उत्सर्जन से होता है। वाहन वायु गुणवत्ता खराब करने के लिए 40% जिम्मेदार होते हैं।

Nov 27, 2025 05:09 pm ISTNarendra Jijhontiya लाइव हिन्दुस्तान
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दिल्ली में सर्दी की शुरूआत होते ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। कई जगहों पर तो AQI का लेवल 450 से सुरक्षात्मक सीमा से बहुत ज्यादा हो गया है। राजधानी में वायु प्रदूषण मुख्य रूप से वाहनों के उत्सर्जन से होता है। वाहन वायु गुणवत्ता खराब करने के लिए 40% जिम्मेदार होते हैं। कई उपायों के बावजूद प्राइवेट गाड़ियों के खरीदने और शहर में गाड़ियों की कतारों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना लगभग 1,800 गाड़ियां जुड़ने का मतलब है कि यातायात PM2.5 उत्सर्जन का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। यातायात दिल्ली के कुल PM2.5 भार के लगभग आधे के लिए जिम्मेदार है। एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि खराब होती हवा की क्वालिटी ट्रेंड को बदलने और जनता की रक्षा के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों, स्वच्छ ईंधन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार की तत्काल जरूरत है।

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स्टेटिक के सीईओ और फाउंडर अक्षित बंसल ने बढ़ते वायु प्रदूषण पर कहा, “दिल्ली जैसे बड़े शहर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन हैं। ये कुल प्रदूषण के 40% से ज्यादा के लिए जिम्मेदार हैं। यह एक बड़ी समस्या है जो पूरी इंडस्ट्री को प्रभावित कर रही है और हर दिन लाखों लोगों के जीवन पर असर डाल रही है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करना उत्सर्जन को रोकने का एक शक्तिशाली उपाय है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में वाहनों की कीमतें बहुत बड़ी भूमिका अदा करती है। उपभोक्ताओं को इस बदलाव के लिए इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल और डीजल वाहनों की तरह ही सस्ती मिलने चाहिए। EV को अपनाने के लिए उपभोक्ता का व्यवहार बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे एक ऐसे स्थायी यातायात का जरिया बनता है जो जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण को लाभ पहुंचाता है। सरकारों और इंडस्ट्री को मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण के लिए साझेदारी करनी चाहिए। सही प्रोत्साहन, तकनीकी इनोवेशन और उपभोक्ता जागरूकता के साथ भारत एक स्वच्छ और हरित परिवहन भविष्य की ओर अपनी यात्रा को तेज कर सकता है।”

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इंडियन ऑटो LPG संगठन के जनरल डॉयरेक्टर सुयश गुप्ता ने कहा, “दिल्ली को बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, खासकर सर्दियों के महीनों में, जब स्मॉग से सेहत को गंभीर खतरा होता है तो लोगों की समस्या बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए एक विधिवत रणनीति की ज़रूरत है जो स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने, सख़्त उत्सर्जन नियम लागू करने और लोगों को टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए बढ़ावा देने पर फोकस करे। ऑटो LPG शहरी ट्रांसपोर्ट के लिए सबसे प्रैक्टिकल, सस्ता और तैयार समाधान है, क्योंकि यह गाड़ी मालिकों के लिए रनिंग कॉस्ट कम करते हुए नुकसानदायक उत्सर्जन को काफी कम करता है। इसीलिए यह दिल्ली की प्रदूषण रणनीति में केंद्र में होना चाहिए। इसके अलावा मौजूदा पेट्रोल और डीज़ल गाड़ियों को LPG में बदलना एक प्रैक्टिकल और गाड़ी मालिक के लिए अच्छा तरीका है जो मालिकों के निवेश को बचाते हुए जीवनपर्यंत उत्सर्जन को कम करता है।”

ऑटो LPG पहले से ही दुनिया भर में जानी-मानी है और 70 देशों में लगभग 30 मिलियन गाड़ियों में इसका इस्तेमाल होता है। भारत ने पहले ही सैकड़ों शहरों में लगभग 1,500 ऑटो LPG डिस्पेंसिंग स्टेशनों के साथ एक मजबूत बेस बना लिया है। इससे तेज़ी से इसे बढ़ाना मुमकिन और सस्ता हो गया है। ऑटो LPG को बढ़ावा देने से शहरों में उत्सर्जन कम होगा, दिल्ली के लोगों पर सेहत का बोझ कम होगा, और वायु की गुणवत्ता अच्छी होगी जिससे सस्ता यातायात सुनिश्चित होगा।

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BizDateUp के मैनेजिंग डॉयरेक्टर जीत चंदन ने कहा, “हर साल की तरह दिल्ली एक बार फिर खराब वायु की गुणवत्ता से जूझ रही है, ऐसे में स्वच्छ यातायात के बारे में बातचीत नीति और निवेश दोनों पर चर्चा का केंद्र बन रही है। वेंचर कैपिटलिस्ट आज EVs को सिर्फ़ एक सस्टेनेबिलिटी ट्रेंड से कहीं ज़्यादा मानते हैं। वे EVs को बड़े क्लाइमेट-टेक मूवमेंट के एक हाई-ग्रोथ कंपोनेंट के तौर पर देखते हैं जो एनवायरनमेंटल और फाइनेंशियल दोनों तरह से फ़ायदा दे सकता है। शहरी वायु प्रदूषण और उत्सर्जन में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की भूमिका ने EVs को भारत की डीकार्बोनाइज़ेशन यात्रा में एक अहम ज़रिया बना दिया है। इसे पॉलिसी इंसेंटिव और बढ़ती कंज्यूमर अवेयरनेस का सपोर्ट मिला है।”

वेंचर इकोसिस्टम में एडवांस्ड बैटरी इनोवेशन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन और स्मार्ट मोबिलिटी सॉफ्टवेयर तक पूरे EV वैल्यू चेन के निर्माण की ओर एक स्पष्ट बदलाव है। यह वह सेक्टर है जहाँ लॉन्गटर्म प्रभाव और प्रोफीडिलिटी मिलता हैं। बिज़डेटअप में हमारे पोर्टफोलियो का लगभग 60% इस इकोसिस्टम पर आधारित है, जो इस विश्वास को दर्शाता है कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट का भविष्य भारत के अपने इनोवेशन लैंडस्केप (नवाचार परिदृश्य) से उभरने वाली स्केलेबल और जलवायु-लचीली टेक्नोलॉजी में निहित है।

दिल्ली लगातार खराब हवा की समस्या से जूझ रही है, ऐसे में पॉलिसी बनाने वालों, इंडस्ट्री और नागरिकों के लिए मिलकर काम करना बहुत ज़रूरी हो गया है। स्वच्छ फ्यूल, सस्टेनेबल मोबिलिटी और ज़िम्मेदार कंस्ट्रक्शन की तरफ़ तेज़ी से बदलाव लाना राजधानी के लिए एक स्वस्थ और हरित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए जरूरी होगा।

Narendra Jijhontiya

लेखक के बारे में

Narendra Jijhontiya
नरेंद्र जिझोतिया साल 2022 से 'लाइव हिंदुस्तान' के ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। नरेंद्र ने पत्रकारिता की शुरुआत 2008 में जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के साथ की। साल 2014 में दैनिक भास्कर से डिजिटल जर्नलिज्म की पारी शुरू की। अपने 16 साल से लंबे जर्नलिज्म सफर के दौरान वे 5 मीडिया ऑर्गेनाइजेशन में काम कर चुके हैं। इस दौरान स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई अलग-अलग सेक्शन में काम किया है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट के बूते वो लगातार डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। और पढ़ें

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