इथेनॉल के नए नियमों से असमंजस में लोग: पेट्रोल कार लेकर रिस्क लें या सीधे EV पर शिफ्ट हो जाएं?
पेट्रोल गाड़ियों और माइलेज को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अब लोग तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) का रुख कर रहे हैं। इससे मार्केट में ईवी की डिमांड और वेटिंग पीरियड अचानक काफी बढ़ गया है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में 100 पर्सेंट इथेनॉल यानी E100 ईंधन के नियमों को हरी झंडी दे दी है। एक तरफ सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए E100 और पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने के मानकों को मंजूरी दे रही है। दूसरी तरफ इस बड़े बदलाव ने आम खरीदारों के मन में भारी असमंजस पैदा कर दिया है। भविष्य की पेट्रोल गाड़ियों और माइलेज को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अब लोग तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) का रुख कर रहे हैं। इससे मार्केट में ईवी की डिमांड अचानक काफी बढ़ गया है। आइए समझते हैं कि ईंधन का यह बदलता गणित कैसे आपकी जेब, गाड़ी और फैसले को प्रभावित करने वाला है।
लोगों में भारी असमंजस
समस्या यह है कि इस बड़े बदलाव के बीच सरकार ने आगे का कोई ऐसा साफ रोडमैप नहीं दिया है जिससे आम ग्राहक समझ सके कि उसे क्या करना चाहिए। किसी को नहीं पता कि देश की आम गाड़ियां सीधे E30 पेट्रोल पर जाएंगी या उनके लिए क्या व्यवस्था होगी। जबकि E100 तो पूरी तरह से फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए होगा। इसी असमंजस के कारण लोग नई पेट्रोल गाड़ी खरीदने से डर रहे हैं। एक हालिया 'लोकल सर्कल्स' सर्वे के अनुसार, लगभग 43 पर्सेंट लोग जो अगले एक साल में गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे थे, वे अब अपना फैसला टालने या बदलने की सोच रहे हैं। ऑटो टुडे में छपी एक खबर के अनुसार, 311 जिलों के 28,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए इस सर्वे से साफ है कि ग्राहकों के मन में भविष्य के ईंधन को लेकर गहरी चिंता है।
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गाड़ी मालिकों को क्या दिक्कत है?
अब सवाल यह उठता है कि ऊंचे इथेनॉल वाले पेट्रोल से आम गाड़ी मालिकों को आखिर दिक्कत क्या है? दरअसल, आज शोरूम में बिकने वाली ज्यादातर पेट्रोल गाड़ियां केवल E20 ईंधन के लिए ही सर्टिफाइड हैं। यानी उनका इंजन और पार्ट्स सिर्फ 20 पर्सेंट इथेनॉल झेलने के लिए बने हैं। अगर भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़कर 25 या 30 फीसदी हो जाती है, तो ये मौजूदा गाड़ियां उसके लिए तकनीकी रूप से तैयार नहीं हैं। कार कंपनियों को इनमें नए बदलाव करने होंगे। जबकि अभी तक सरकार या कंपनियों ने यह साफ नहीं किया है कि आज की E20 गाड़ियों का भविष्य क्या होगा।
इथेनॉल से क्या पड़ेगा फर्क?
ज्यादा इथेनॉल वाला पेट्रोल आपकी जेब और गाड़ी दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। पहली बात तो यह कि इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले कम एनर्जी होती है। इससे गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि इथेनॉल काफी जंग लगाने वाला होता है। पेट्रोल में इसकी मात्रा बढ़ने से गाड़ी की फ्यूल लाइन्स, सील, गैस्केट और प्लास्टिक या रबर के पुर्जे जल्दी खराब हो सकते हैं। इसके अलावा, इंजन के परफॉर्मेंस और पिकअप पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। इससे गाड़ी की लाइफ कम होने का खतरा रहता है। जबकि गडकरी जी द्वारा घोषित E100 ईंधन का मजा केवल वही लोग ले पाएंगे जो विशेष रूप से बनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां खरीदेंगे।
क्यों बढ़ी EVs की डिमांड?
ईंधन के इस बदलते खेल और नए-नए नियमों के बीच अब इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) आम लोगों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता बनकर उभर रही हैं। ईवी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि पेट्रोल की नीति में क्या बदलाव हो रहे हैं, उसमें कितना इथेनॉल मिलाया जा रहा है या E100 कब आ रहा है। यही वजह है कि डीलरशिप्स पर अब इलेक्ट्रिक कारों को लेकर पूछताछ अचानक बहुत बढ़ गई है। कई पॉपुलर ईवी मॉडल्स पर वेटिंग पीरियड बढ़कर एक महीने या उससे भी ज्यादा हो गया है क्योंकि लोग भविष्य के किसी भी झंझट से पूरी तरह बचना चाहते हैं।
क्या है समझदारी भरा फैसला?
कुल मिलाकर देखें तो प्रदूषण मुक्त भारत के लिए नितिन गडकरी का E100 का फैसला गेम-चेंजर जरूर है। हालांकि, जब तक सरकार यह साफ नहीं करती कि आम E20 पेट्रोल गाड़ियों का क्या होगा, तब तक ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना ही सबसे समझदारी भरा और 'फ्यूचर-प्रूफ' विकल्प लग रहा है। सालों बाद ऐसा पहली बार हो रहा है जब लोग पर्यावरण बचाने या कम रनिंग कॉस्ट के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की अनिश्चितता से बचकर केवल 'मानसिक शांति' पाने के लिए ईवी का रुख कर रहे हैं।
(फोटो क्रेडिट- Google Gemini)
लेखक के बारे में
Ashutosh Kumarदेश-दुनिया की खबरों में रुचि पत्रकारिता में खींच लाई। IIMC, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत 2022 में ‘लाइव हिंदुस्तान’ से हुई। बीते करीब 4 सालों से आशुतोष बिजनेस और ऑटो सेक्शन में काम कर रहे हैं। राजनीति, बिजनेस और धर्म में खास रुचि है। लाइव हिंदुस्तान में बिजनेस, टेक, ऑटो, स्पोर्ट्स, एस्ट्रोलॉजी, करियर और न्यूज सेक्शन में लगातार काम करने का अनुभव है। लाइव हिंदुस्तान के लिए बिहार चुनाव 2025 का ग्राउंड पर जाकर पूरा वीडियो कवरेज किया है। बड़े नेताओं और लेखकों के साथ 50 से ज्यादा इंटरव्यू लेने का अनुभव भी रखते हैं। आशुतोष को उनकी रिपोर्टिंग के लिए संस्थान की ओर से प्रतिष्ठित ‘Digi journo of the Quarter’ अवार्ड भी मिल चुका है।
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