खुशखबरी! घट सकती है कारों की कीमत, इस डील के बाद लग जाएगी लोगों की लॉटरी
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बातचीत अब अपने आखिरी चरण में पहुंचती दिख रही है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय कार खरीदारों को मिल सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बातचीत अब अपने आखिरी चरण में पहुंचती दिख रही है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय कार खरीदारों को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम इम्पोर्ट टैक्स में बड़ी कटौती करने जा रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
110% से 40% तक गिर सकता है इम्पोर्ट टैक्स
फिलहाल भारत में पूरी तरह इम्पोर्ट होकर आने वाली कारों पर 70% से लेकर 110% तक टैक्स लगता है। यही वजह है कि BMW, मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन और रेनो जैसी यूरोपीय ब्रांड्स की कारें भारत में काफी महंगी हो जाती हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित इंडिया-EU FTA (India–EU FTA) के तहत इन कारों पर टैक्स सीधे 40% तक घटाया जा सकता है। खास बात यह है कि यह कटौती उन कारों पर लागू होगी, जिनकी इम्पोर्ट कीमत 15,000 यूरो (करीब 15–16 लाख) से ज्यादा है।
आगे चलकर टैक्स 10% तक आने की संभावना
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शुरुआत में सीमित संख्या में कारों को इस रियायत का फायदा मिलेगा, लेकिन समय के साथ टैक्स को और कम किया जा सकता है। भविष्य में यह दर 10% तक भी लाई जा सकती है, जिससे यूरोपीय कार कंपनियों के लिए भारतीय बाजार और ज्यादा आकर्षक बन जाएगा।
मंगलवार को हो सकता है बड़ा ऐलान
भारत और EU के बीच इस मेगा ट्रेड डील का ऐलान मंगलवार को किया जा सकता है। इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है, क्योंकि इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार काफी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर ऐसे समय में जब भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
भारत के ऑटो सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन अब तक यह विदेशी कंपनियों के लिए काफी हद तक बंद रहा है। भारी टैक्स के कारण टेस्ला (Tesla) जैसी कंपनियां भी भारत में एंट्री को लेकर हिचकिचाती रही हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक, हर साल करीब 2 लाख पेट्रोल और डीजल कारों पर 40% ड्यूटी लागू की जा सकती है। इसे भारत की ऑटो इंडस्ट्री को खोलने की अब तक की सबसे आक्रामक पहल माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक कारों को फिलहाल राहत नहीं
हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को इस टैक्स कटौती से फिलहाल बाहर रखा जाएगा। अगले 5 साल तक EVs पर मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर बना रहेगा, ताकि टाटा मोटर्स (Tata Motors) और महिंद्रा (Mahindra) जैसी घरेलू कंपनियों के निवेश को सुरक्षित रखा जा सके। इसके बाद EVs को भी धीरे-धीरे इसी टैक्स रिडक्शन पाथ पर लाया जा सकता है।
यूरोपीय कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
कम टैक्स का सीधा फायदा फॉक्सवैगन (Volkswagen), रेनो (Renault), स्कोडा (Skoda), मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) और BMW जैसी कंपनियों को मिलेगा। इससे वे भारत में ज्यादा मॉडल्स लॉन्च कर पाएंगी और उन्हें ज्यादा किफायती कीमतों पर बेच सकेंगी। कंपनियां बिना बड़ी फैक्ट्री लगाए पहले मार्केट टेस्ट कर सकेंगी, जो अब तक मुश्किल था।
भारतीय बाजार में अब भी देसी कंपनियों का दबदबा
फिलहाल यूरोपीय कार कंपनियों की भारत के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में हिस्सेदारी 4% से भी कम है। बाजार पर मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki), टाटा मोटर्स (Tata Motors) और महिंद्रा (Mahindra) का दबदबा है, जिनका कुल शेयर करीब दो-तिहाई है। लेकिन, 2030 तक भारतीय कार बाजार के 60 लाख यूनिट सालाना तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में रेनो (Renault) और फॉक्सवैगन (Volkswagen) जैसी कंपनियां पहले से ही अपनी अगली रणनीति पर काम कर रही हैं।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर India–EU FTA लागू होता है, तो आने वाले समय में भारतीय ग्राहकों को ज्यादा विकल्प, बेहतर टेक्नोलॉजी और शायद पहले से कम कीमतों पर प्रीमियम और ग्लोबल कारें देखने को मिल सकती हैं। कुल मिलाकर यह डील भारत के ऑटो सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक
अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर ऑटो सेक्शन से जुड़े हुए हैं। सर्वेश्वर को पत्रकारिता में 7 साल से ज्यादा का अनुभव है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़ी खबरों व एनालिसिस में उन्हें गहरी समझ और अनुभव है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय (हरिद्वार) से पत्रकारिता में मास्टर के बाद इन्होंने साल 2019 में ईटीवी भारत से पत्रकारिता जगत में अपना कदम रखा। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी के साथ काम किया। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर लेखन के साथ-साथ बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान इन्होंने गोंदिया (महाराष्ट्र) में 2 महीने से ज्यादा समय तक सोशल वेलफेयर के लिए काम किया। इस दौरान उन्होंने कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय और स्कूल के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। सर्वेश्वर को बचपन से क्रिकेट खेलना और डांस पसंद है।
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