एक बार फिर झटका देने की तैयारी में ये कंपनी, इस साल चौथी बार कार होंगी महंगी; अभी खरीदने में ही फायदा
कंपनी ने अभी तक अगले संशोधन की सीमा को अंतिम रूप नहीं दिया है। यह उनके स्थानीयकरण स्तर और इम्पोर्ट कम्पोनेंट के संपर्क के आधार पर, विभिन्न मॉडलों में भिन्न होने की उम्मीद है। मुद्रा का अवमूल्यन दबाव के मुख्य स्रोतों में से एक रहा है।

ग्लोबल मार्केट कमजोर होता रुपया और कमोडिटी लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर कारों की कीमतों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अभी भी कई कंपनियां अपनी कारों को महंगा करने में लगी हुई हैं। दरअसल, BMW ग्रुप इंडिया अक्टूबर से कारों की कीमतों में एक और बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। कंपनी के ऊपर परिचालन पर दबाव बना हुआ है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह इस कैलेंडर ईयर में कंपनी का चौथी बार प्राइस हाइक होगा।
BMW ने जनवरी में कीमतों में 3% तक की वृद्धि की थी। इसके बाद अप्रैल और जुलाई में 2% तक की बढ़ोतरी की। अप्रैल और जुलाई की बढ़ोतरी स्थानीय स्तर पर प्रोड्यूस और पूरी तरह से निर्मित BMW और मिनी व्हीकल पर लागू होती है। BMW ग्रुप इंडिया को इस साल 20,000 से अधिक कारें बेचने की उम्मीद है। वो लक्ष्य पूरा करने की राह पर है। नई 7 सीरीज और i7 का शुरुआती आवंटन लगभग बिक चुका है, जबकि i5 को भी जोरदार प्रतिक्रिया मिली है।
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जबकि तीन राउंड में घोषित अधिकतम वृद्धि 7% तक है, वास्तविक संचयी वृद्धि सभी मॉडलों में अलग-अलग है। BMW ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप सिंह बराड़ ने कहा कि कीमतें अब तक लगभग 4-5% बढ़ी हैं। बरार ने ऑटोकार इंडिया को बताया, "हमने अब तक कीमतों में लगभग 4-5% की बढ़ोतरी की है, और एक और बढ़ोतरी होने वाली है।" "विदेशी मुद्रा, वस्तुओं और अन्य लागतों के दबाव के कारण हमारे लिए कीमतें बढ़ती रहेंगी।"
कंपनी ने अभी तक अगले संशोधन की सीमा को अंतिम रूप नहीं दिया है। यह उनके स्थानीयकरण स्तर और इम्पोर्ट कम्पोनेंट के संपर्क के आधार पर, विभिन्न मॉडलों में भिन्न होने की उम्मीद है। मुद्रा का अवमूल्यन दबाव के मुख्य स्रोतों में से एक रहा है। BMW को तांबे की कीमतों में वृद्धि समेत हायर लॉजिस्टिक और मटीरियल कॉस्ट का भी सामना करना पड़ता है। कंपनी ने जुलाई में बढ़ोतरी की घोषणा करते समय रुपये के अवमूल्यन और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का हवाला दिया।
BMW ने स्थानीय उत्पादन के माध्यम से प्रभाव को सीमित करने की मांग की है। भारत में इसकी लगभग 95% बिक्री इसके चेन्नई प्लांट में उत्पादित वाहनों से होती है, शेष 5% आयात के साथ आती है। बरार के अनुसार, अधिकांश घरेलू स्तर पर उत्पादित मॉडलों में स्थानीयकरण 50% के करीब है। इसका बेनिफिट नई 7 सीरीज और i7 की कीमत में दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित BMW 740 M स्पोर्ट और i7 की कीमत 1.95 करोड़ रुपए है, जबकि इम्पोर्टेड i7 M70 एक्सड्राइव की कीमत 2.65 करोड़ रुपए है।
बराड़ ने कहा कि स्थानीयकरण ने कंपनी को कीमत में भारी वृद्धि के बिना नए डिजाइन, प्रौद्योगिकी और अतिरिक्त उपकरण पेश करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा, "स्थानीयकरण का नतीजा यह है कि तमाम कोशिशों और तमाम कोशिशों के बावजूद हमें कीमतें नहीं बढ़ानी पड़ीं।" तीन संशोधनों के बावजूद मांग मजबूत बनी हुई है। बराड़ ने कहा कि BMW इंडिया मजबूत दोहरे अंक की दर से बढ़ रही है, भले ही व्यापक लक्जरी कार बाजार स्थिर बना हुआ है या मामूली गिरावट आई है।


