
भारतीय कार इंडस्ट्री को बड़ा झटका! इस देश ने अचानक 50% तक बढ़ाया टैक्स, करीब 8,000 करोड़ के कार एक्सपोर्ट पर खतरा
भारत की कार इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। जी हां, क्योंकि मेक्सिकोसरकार ने कार आयात पर टैरिफ 20% से बढ़ाकर 50% करने का फैसला लिया है, जिससे भारत में बनी करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8,000 करोड़) की कारों के एक्सपोर्ट पर खतरा मंडराने लगा है।
भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है। जी हां, क्योंकि मेक्सिको सरकार ने कार आयात पर टैरिफ 20% से बढ़ाकर 50% करने का फैसला लिया है, जो अगले साल से लागू होगा। यह फैसला उन देशों पर लागू होगा, जिनके साथ मेक्सिको का कोई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement -FTA) नहीं है और दुर्भाग्य से भारत भी इसी लिस्ट में शामिल है। इस एक फैसले से भारत में बनी करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8,000 करोड़) की कारों के एक्सपोर्ट पर खतरा मंडराने लगा है। भारत, चीन, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत कई एशियाई देशों के निर्यात पर मेक्सिको के इस टैरिफ का असर पड़ेगा।
भारत कार एक्सपोर्ट को सीधा झटका
दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब के बाद मेक्सिको आज भारत का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट मार्केट है। भारत से मेक्सिको भेजी जाने वाली कारों में बड़ा योगदान स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन (लगभग 50%) का है। इसके बाद हुंडई (Hyundai), निसान (Nissan) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki)का नंबर आता है।
खास बात यह है कि भारत से एक्सपोर्ट होने वाली कारें ज्यादातर छोटी और 1.0-लीटर से कम पेट्रोल इंजन वाली हैं, जो किफायती और फ्यूल एफिशिएंट होती हैं। ये कारें मेक्सिको की घरेलू इंडस्ट्री से सीधे मुकाबले में नहीं आतीं, क्योंकि वहां की फैक्ट्रियां ज्यादातर बड़ी और हाई-स्पेक कारें बनाती हैं, जो अमेरिका जैसे मार्केट के लिए होती हैं।
50% टैरिफ से भारत का प्राइस एडवांटेज खत्म
अब टैरिफ में 30 प्रतिशत पॉइंट की सीधी बढ़ोतरी ने भारत की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ लो प्राइसिंग को कमजोर कर दिया है। इसका असर कारों की लैंडेड कॉस्ट पर पड़ेगा, जिससे रिटेल डिमांड गिर सकती है। इससे कंपनियों को या तो नुकसान सहना पड़ेगा या फिर एक्सपोर्ट घटाना पड़ेगा। हालांकि, दोनों ही विकल्प ऑटो कंपनियों के लिए मुश्किल हैं, खासकर ऐसे समय में जब मार्जिन पहले से दबाव में हैं।
इंडस्ट्री की चिंता और सरकार से उम्मीद
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने पहले ही भारत सरकार से अपील की थी कि वह मेक्सिको से बातचीत करे और मौजूदा टैरिफ स्ट्रक्चर को बनाए रखने की कोशिश करे। इंडस्ट्री का तर्क साफ था कि भारत की कारें मेक्सिको की कुल कार बिक्री का सिर्फ 6–7% हिस्सा हैं, जो स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए खतरा नहीं हैं। अब जबकि टैरिफ बढ़ोतरी कन्फर्म हो चुकी है, सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या भारत सरकार दोबारा कूटनीतिक बातचीत करेगी या ऑटो इंडस्ट्री को नए ट्रेड माहौल में खुद को ढालना पड़ेगा।

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Sarveshwar Pathakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




