
कॉलोनी में न शुद्ध पेयजल की आपूर्ति न नए नलकूप को चालू कराने की किसी को फिक्र। सालभर से खुदी पड़ी सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। गड्ढों से भरी सड़क स्ट्रीट लाइटों के अभाव में रात के समय खतरनाक हो जाती है।

समस्याओं के अंतहीन फांस में उलझे ठठेरी बाजार (रामनगर) के लोगों में मायूसी छाई हुई है। कारण कि, किला मार्ग से कुछ ही दूर स्थित इस मोहल्ले में ‘दर्द के जखीरे’ जैसे हालात हैं। लटकते और घरों से सटे खींचे गए बिजली के तार कब किसे झटका मार दें, कहां नहीं जा सकता।

छोटी कोइरान मोहल्ला विकास की किरणें देखने को तरस रहा है। यह इलाका मुख्य सड़क से लगभग छह फीट नीचे है। इस नाते जलनिकासी ठप है। टूटी सड़कें, दूषित जलापूर्ति और सीवर का उफान हजारों परिवारों को बीमारियों की ओर धकेल रहा है।

अरिहंत नगर कॉलोनी फेज-2 के निवासी ‘सांसत’ में जी रहे हैं। एक ओर चोरी की बढ़ती घटनाओं ने निवासियों की रातों की नींद छीन ली है, तो दूसरी ओर शराब के ठेके के कारण महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।

वाराणसी। इंद्रपुरी कॉलोनी को उपेक्षा का पर्याय कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बांस-बल्ली के सहारे बिजली तार हर पल मौत का भय दिखाते हैं। अधूरे सीवर और जीर्ण-शीर्ण सड़कें बारिश में घरों को डुबो रही हैं। प्रदूषित जलापूर्ति हो रही है।

बलिया। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के एक बयान पर घमासान मच गया है। उनके खिलाफ जगह जगह प्रदर्शन होने लगे हैं।

कफ सिरप के मास्टरमाइंड को सोनभद्र पुलिस ने रविवार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। वह विदेश भागने की फिराक में था। मास्टरमाइंड भोला प्रसाद जायसवाल ड्रग माफिया शुभम जायसवाल का पिता है।

काशी की वॉलीबॉल प्रतिभाएं अब नेशनल चैंपियनशिप की मेजबानी करने को तैयार हैं। लेकिन सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ी सिंथेटिक कोर्ट की जगह पत्थरों पर खेल रहे हैं। फिटनेस के लिए जिम बंद है, अभ्यास के बाद बैठने को एक कुर्सी भी नहीं है।

भारत की बेटियों ने भले ही विश्व कप जीतकर देश का मान बढ़ाया हो, लेकिन काशी की महिला क्रिकेट प्रतिभाएं बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। जिस ‘हुनर’ ने देश को विश्व विजेता बनाया हैं(

पंचक्रोशी बाजार की बदहाली व्यापारियों और आमजन के लिए असहनीय होती जा रही है। बाजार न केवल अतिक्रमण और 5000 बाइकों के जाम से जूझ रहा है, बल्कि हेरोइन की खुलेआम बिक्री और लगातार चोरियों से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

भरलाई क्षेत्र इन दिनों बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी झेल रहा है। दुर्गा विहार, विवेकपुरम और त्रिलोक नगर में पानी का पाइप न बिछने से हजारों लोग पानी के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर हैं। कहीं पाइप बिछाने के बाद टूटी सड़क और गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।

टेंगरा मोड़ को दुर्घटनाओं का ‘हब’ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। वाहनों की तेज रफ्तार, हर मोड़ पर वाहनों और ठेले वालों का अतिक्रमण हादसों का कारण बन रहा है।

बनारस समेत पूरे पूर्वांचल को दवाओं का ऑक्सीजन पहुंचाने वाली सप्तसागर मंडी की ही पिछले दिनों सांसें ऊपर-नीचे होती दिखीं जब ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल कर दी। यह आक्रोश पुलिसिया चालान के खिलाफ था जो वर्षों से उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ‘छीन’ रहा है।

सोनकर बस्ती मोहल्ला (तरना) के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में त्रस्त हो चुके हैं। यहां की रानी की पोखरी कूड़ाघर में तब्दील होती जा रही है। अतिक्रमण का भी दर्द है। हफ्तों तक कूड़ा न उठने से गलियां और खाली प्लॉट दुर्गंध के ‘तालाब’ जैसे बन गए हैं।

बुनियादी सुविधाएं न होने से जलालत भरी जिंदगी जीना तो भीटी दक्षिणी मोहल्ला (रामनगर) के लोगों की नियति बन गई है। यहां न तो रास्ता है और न ही जलनिकासी की सुविधा। दूसरों के प्लॉटों से होकर आना जाना और जलजमाव में रहने की मजबूरी हो गई है।

खिलाड़ी मेडल जीतता है तो तालियां पूरे देश में बजती हैं। मगर खिलाड़ी के पीछे एक गुमनाम विशेषज्ञ की मेहनत और विशेषज्ञता भी छिपी होती है। ये हैं स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट जो चोटिल खिलाड़ी को दोबारा दौड़ने की ताकत देते हैं।

तरना बाजार की दुर्दशा वर्षों की उपेक्षा की कहानी है। सीवर लाइन न होने से सड़कें नरक बनी हैं। पानी की पाइप लाइन नहीं है। कूड़े से दुर्गंध फैल रही है। बीमारियां फैलने का अंदेशा है। स्पीड ब्रेकर न होने से दुर्घटनाएं आम हैं। बंदरों का उपद्रव बढ़ता ही जा रहा है।

तरना वार्ड की शिव विहार कॉलोनी कॉलोनी प्रशासन की अनदेखी की शिकार है। सीवर लाइन अधूरी है। घरों का गंदा पानी क्षतिग्रस्त सड़कों पर जलजमाव पैदा कर रहा है। कूड़ा गाड़ी के रेाज न आने से खाली प्लॉट डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं। स्थानीय बाशिंदों के अनुसार स्ट्रीट लाइट, सफाई और फॉगिंग का अभाव है।

महेशपुर स्थित धोबी बस्ती के निवासी काफी समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ध्वस्त सीवर लाइनों के कारण घरों में गंदा पानी जमा है। नलों से दूषित पानी आ रहा है। खतरा बनकर बिजली के तार झूल रहे हैं।

वरुणा किनारे भी कई स्थानों पर लोक आस्था के महापर्व छठ की धूम दिखती है। व्रती महिलाओं और उनके परिजनों की आस्था के आलोक में चार दिवसीय पूजन के सभी विधान पूरी तन्मयता के साथ पूरे किए जाते हैं। वरुणा के मशीनीबीर घाट पर इस बार भी व्रतियों की वेदियां और उनके परिजनों की चहल-पहल शुरू हो चुकी है।