
एक ने हिंदी के कई साहित्यकारों को सांप्रदायिक कह दिया, तो हंगामा हो गया। आजू-बाजू खड़े हिंदी के सोशल साहित्यिक ‘सूरमा’ अपने-अपने हरबे-हथियार लेकर कूद पड़े…

बंगाल और मछली का संबंध कितना मजबूत है, इसका अंदाजा वहां चल रहे चुनाव प्रचार में भी देखने को मिला। राज्य की बिधाननगर सीट से भाजपा उम्मीदवार शारद्वत मुखर्जी चैत्र नवरात्र के दौरान मछली हाथ में लटकाकर वोट मांगते हुए कैमरे में कैद हो गए…

भारत में कवियों, लेखकों व पत्रकारों के खिलाफ अक्सर एफआईआर दर्ज कराई जाती है, जिनमें आस्था को ठेस पहुंचाने या सामाजिक विभेद पैदा करने के आरोप लगाए जाते हैं। यहां तक कि राजनेताओं के खिलाफ बोलने पर भी उत्पीड़न की कार्रवाई कर दी जाती है…

महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले संशोधन विधेयकों का यही हश्र होना था। संसद का यह विशेष सत्र संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक की मंजूरी के लिए बुलाया गया था, लेकिन विपक्ष को मना पाने में सत्ता पक्ष नाकाम रहा…

महिला आरक्षण देने के तरीके और परिसीमन पर सहमति न बनना आश्चर्यजनक नहीं, पर चिंताजनक जरूर है। संविधान में संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, पर यह अभी केंद्र मेंं सत्तारूढ़ गठबंधन के पास नहीं है….

चार धाम यात्रा की रविवार 19 अप्रैल से शुरुआत हो रही है। अक्षय तृतीया के पावन मौके पर यमुनोत्री व गंगोत्री के कपाट खुल जाएंगे और 22 अप्रैल से केदारनाथ व 23 अप्रैल से बद्रीनाथ धाम श्रद्धालु जा सकेंगे…

भारतीय संसद तीन दिवसीय सत्र में एक ऐसे युगांतकारी विधेयक पर चर्चा कर रही है, जो हमारे विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल सीटों का आरक्षण नहीं है…

किसी भी देश या समाज के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली पाठ्य-पुस्तकें वस्तुतः उसके समाज का आईना होती हैं। जब विकास, आधुनिकता और नए परिवर्तनों के कारण समाज बदलते हैं, तब नई किताबों की जरूरत होती है…

बिहार में भारतीय जनता पार्टी के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है। ‘1 अणे मार्ग’ भाजपा का पुराना सपना रहा है। वह हिंदी पट्टी के तमाम राज्यों में सत्ता के शीर्ष पर पहुंच चुकी है, पर बिहार अब तक अपवाद था। सबसे बड़ा दल होने के बावजूद यहां उसकी भूमिका ‘जूनियर पार्टनर’ की ही थी…

तमिलनाडु विधानसभा का 23 अप्रैल को होने वाला मतदान रोमांचक चरण में प्रवेश कर रहा है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच टीवीके रूपी एक तीसरा पहलवान आ गया है, जो दोनों द्रविड़ पहलवानों के चुनावी रथ…

आधुनिक बिहार के इतिहास में 24 नवंबर, 2005 सिर्फ सत्ता-परिवर्तन की तारीख नहीं है, बल्कि यह एक राज्य की खोई हुई गरिमा की पुनर्स्थापना का प्रस्थान-बिंदु है।बिहारवासियों के दिल में बसे नीतीश कुमार…

हिंदी, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगू आदि भाषाओं में दलित लेखकों द्वारा रचे जा रहे साहित्य की एक विशेषता यह है कि लेखक अपनी रचनाएं अप्रैल में ही प्रकाशित कराना चाहते हैं। यह संयोग ही है कि दलितों में मुक्ति चेतना…

पश्चिम एशिया में फिर तनाव की स्थिति बन गई है। पाकिस्तान में हुई शांति-वार्ता विफल रही है और अब दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट साफ तौर पर दिखाई दे रही है। हालांकि, चौथे दिन का सीजफायर जारी है, लेकिन जिस तरह का अविश्वास का माहौल बना है…

मतदाता सूची ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल है। उत्तर प्रदेश में लगभग ढाई करोड़ वोट इस प्रक्रिया के कारण कट गए हैं। पूरे देश में सर्वाधिक संख्या में वोट कटने का रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश के नाम है…

अमेरिका-ईरान वार्ता नाकाम होने के बाद दुनिया में आर्थिक तनाव का का पारा फिर चढ़ने लगा है। विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में फिर उछाल का दौर शुरू हो गया है, तो सोमवार को भारतीय शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुआ है…

अमेरिका-ईरान की वार्ता के बेनतीजा निकलने से एक बार फिर दुनिया उसी मुहाने पर आ खड़ी हुई, जहां वह 8 अप्रैल से पहले थी। इन दोनों में से एक ने भी अस्थायी युद्ध-विराम का पालन नहीं किया, तो आग फिर से भड़क सकती है…

अविश्वास के माहौल में हुई बातचीत का यही हश्र होता है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बेशक दुनिया की निगाह बनी हुई थी, लेकिन इन दोनों देशों में जिस तरह के गहरे मतभेद हैं, उनको देखते हुए महज एक बैठक में सहमति बनने की संभावना भी नहीं थी। इस्लामाबाद में यही हुआ है…

किसी को तीन पुस्तकों पर तीन सम्मान मिल चुके हैं। किसी को चार पुस्तकों पर चार। किसी-किसी को तो एक ही किताब पर दो-दो पुरस्कार मिल चुके हैं और किसी को एक ही रचना पर तीन सम्मान। इन दिनों जितने लेखक हैं, उनसे ज्यादा सम्मान हैं…

दादा सुरीली आवाज के मालिक थे, तो पिता भी सुर के अमीर हुए और पोते को भी मौसीकी विरासत में बेहिसाब मिली। दुनिया में हुनर का यह सिलसिला कुदरती है, पर इंसान कुदरत की कितनी सुनता है? इंसान अपना दिमाग लगाता है…

यह इंसानी फितरत है कि वह बनना तो राम चाहता है, मगर रावण भी उसे कुछ कम आकर्षित नहीं करता। आदर्श और आकर्षण के इसी द्वंद्व के बीच जीवन चलता है। ज्यादातर लोग इस द्वंद्व से पार नहीं पा पाते और जो इसे जीत लेते हैं…