Yogini Ekadashi 2026: आज भी है योगिनी एकादशी? जानें किसके लिए व्रत और किसे करना है पारण
Yogini Ekadashi Vrat 2026: इस बार योगिनी एकादशी की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है। इसकी वजह स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में व्रत की अलग-अलग तिथि है। जानें 11 जुलाई को किसके लिए योगिनी एकादशी का व्रत है, किसे द्वादशी में पारण करना है और दोनों परंपराओं में क्या अंतर माना जाता है।

Yogini Ekadashi Vrat 2026: योगिनी एकादशी को लेकर इस बार लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर 11 जुलाई को भी एकादशी क्यों बताई जा रही है। दरअसल, इसकी वजह स्मार्त और वैष्णव परंपरा में व्रत की अलग-अलग तिथि है। हिंदू पंचांग में कई बार तिथि और सूर्योदय के नियमों के कारण दोनों परंपराओं में व्रत की तारीख अलग हो जाती है। इसी कारण इस बार भी कुछ श्रद्धालु आज योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, जबकि कुछ लोग आज द्वादशी में व्रत का पारण कर रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया और अलग-अलग पंचांगों में दो तरह की जानकारी देखने को मिल रही है।
किसके लिए आज है पारण?
स्मार्त परंपरा के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा गया था। ऐसे में जिन श्रद्धालुओं ने 10 जुलाई को व्रत रखा था, वे 11 जुलाई को द्वादशी तिथि में पारण करेंगे। पंचांग के अनुसार पारण का शुभ समय सुबह 5:21 बजे से 9:59 बजे तक है। कुछ पंचांग हरिवासर समाप्त होने के बाद दोपहर 1:24 बजे से 4:09 बजे तक भी पारण का समय बताते हैं। श्रद्धालु जिस पंचांग और परंपरा का पालन करते हैं, उसके अनुसार पारण कर सकते हैं। मान्यता है कि तय समय के भीतर पारण करने से व्रत का पूरा फल मिलता है।
आज किसके लिए है योगिनी एकादशी?
वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं। इसलिए आज भी कई विष्णु मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा रहा है। इस दिन कई लोग फलाहार करते हैं और पूरे दिन भगवान विष्णु की भक्ति में समय बिताते हैं। वैष्णव परंपरा के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालु 12 जुलाई को द्वादशी तिथि में पारण करेंगे।
12 जुलाई को पारण का समय
वैष्णव योगिनी एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 12 जुलाई को पारण का समय सुबह 5:22 बजे से 8:09 बजे तक माना गया है। हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना शुभ माना जाता है। अगर किसी कारण तय समय में पारण नहीं हो पाता है, तो अपने गुरु या परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर माना जाता है।
योगिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने पर व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। इसलिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस एकादशी का पालन करते हैं। इस बार स्मार्त और वैष्णव परंपरा की अलग-अलग तिथि के कारण व्रत और पारण दोनों को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
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न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
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व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
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