योगिनी एकादशी की तारीख को लेकर है कन्फ्यूजन? जानें किस दिन रखें व्रत
इस बार योगिनी एकादशी की तिथि 10 और 11 जुलाई दोनों दिन पड़ने से व्रत की तारीख को लेकर भ्रम बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्मार्त परंपरा के लोग 10 जुलाई को, जबकि वैष्णव परंपरा के अनुयायी 11 जुलाई को व्रत रखेंगे। जानें योगिनी एकादशी की सही तिथि, पूजा विधि, महत्व और पारण का समय।

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी को लेकर इस बार लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल इसकी तारीख को लेकर है। सोशल मीडिया से लेकर गूगल सर्च तक लोग जानना चाहते हैं कि योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा जाए या 11 जुलाई को। इसकी वजह एकादशी तिथि का दो दिनों में पड़ना है। ऐसे में अगर आप भी भगवान विष्णु का व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं तो पहले सही तारीख जान लेना जरूरी है।
धार्मिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह शुरू होगी और 11 जुलाई की सुबह तक रहेगी। तिथि के दो दिनों में रहने के कारण कई लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, व्रत की तारीख का फैसला सिर्फ तिथि से नहीं, बल्कि उदया तिथि और परंपरा के आधार पर भी किया जाता है। यही कारण है कि अलग-अलग पंचांगों में दोनों दिन का उल्लेख मिल रहा है।
किस दिन रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्मार्त परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं वैष्णव परंपरा के अनुयायी 11 जुलाई, शनिवार को गौण (वैष्णव) योगिनी एकादशी का व्रत करेंगे। इसलिए अगर आप किसी विशेष परंपरा का पालन करते हैं तो उसी के अनुसार व्रत रखना उचित माना जाता है।
क्या है योगिनी एकादशी का महत्व?
सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कई धार्मिक ग्रंथों में भी योगिनी एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है।
ऐसे करें पूजा
योगिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
व्रत के दिन सात्विक भोजन करें या अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखें। क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के समय तुलसी दल अर्पित करना न भूलें।
पारण कब करें?
10 जुलाई को व्रत रखने वाले श्रद्धालु द्वादशी तिथि में 11 जुलाई को पारण करेंगे। वहीं 11 जुलाई को गौण (वैष्णव) एकादशी रखने वाले श्रद्धालु 12 जुलाई को पारण करेंगे। पारण का समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Yogesh Joshiयोगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
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एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
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व्यक्तिगत रुचियां
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