Yogini Ekadashi: घर पर भगवान विष्णु का एकादशी पर अभिषेक कैसे करें? जानें सरल विधि
How to perform abhishekam to lord vishnu: एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की अभिषेक करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि घर पर भगवान विष्णु का एकादशी पर अभिषेक कैसे करें।

Ekadashi par vishnu ji ki puja kaise karen: हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस बार योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई 2026, गुरुवार को है। एकादशी तिथि जगत पालन हार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और आराधना करना अत्यंत शुभ और पुण्य दायक माना जाता है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के अभिषेक का खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्री हरि का अभिषेक करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। आइए जानते हैं कि योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु का अभिषेक कैसे करें:
एकादशी पर भगवान विष्णु का अभिषेक कैसे करें:
1.सबसे पहले लगाएं भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी का ध्यान: भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का ध्यान लगाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का मन ही मन में जाप करें।
2.पंचामृत से करें भगवान विष्णु का अभिषेक: अब पंचामृत तैयार करने के लिए पूजन सामग्री दूध, दही, शहद, घी और शक्कर का मिश्रण बनाएं और उससे भगवान विष्णु का स्नान करें।
3.जल से कराएं अभिषेक: पंचामृत से अभिषेक करने के बाद श्री हरि का स्वच्छ जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
4.विष्णु जी का श्रृंगार करें: अब भगवान विष्णु का श्रृंगार करें। अब प्रभु को पीले रंग के या साफ वस्त्र पहनाएं और रोली, चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें।
5.भगवान विष्णु को लगाएं भोग: अंत में ऋतुफल और मिठाई का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल को अवश्य शामिल करें। मान्यता है कि तुलसी दल के बिना भोग अधूरा होता है।
भगवान विष्णु का अभिषेक करने से क्या फल मिलता है:
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की कृपा से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
एकादशी तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में पूजन का महत्व
हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त में पूजन का विशेष महत्व है। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का समय होता है, जो आमतौर पर सुबह 4 बजे से 5.30 बजे के बीच होता है। ब्रह्म मुहूर्त को 'सृष्टिकर्ता का समय' या 'अमृत वेला' कहा जाता है। मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में किए गए पूजा-पाठ और अभिषेक का फल अधिक होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान


