पुखराज पहनते वक्त कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए? इन 2 रत्नों के साथ गलती से भी ना पहनें
रत्नशास्त्र के अनुसार पुखराज को पहनते वक्त सही मंत्र का बोला जाना जरूरी है। साथ ही इस इसके साथ कुछ रत्नों को पहनने से भी बचना चाहिए।

रत्नशास्त्र की दुनिया में कुछ रत्नों को बहुत ही पावरफुल माना जाता है जोकि बहुत ही असरदार होते हैं। इन्हीं में से एक है पुखराज। पुखराज को येलो सफायर के नाम से भी जाना जाता है। इसका संबंध गुरु यानी जूपिटर से माना जाचा है। मान्यता है कि इस रत्न को धारण करने से भाग्य खुलता है और फिर करियर से लेकर शादी और आर्थिक स्थिति से जुड़ी दिक्कतें दूर होने लगती हैं। हालांकि पुखराज को पहन लेना ही काफी नहीं होती है। इसे सही दिन, सही विधि और मंत्र के साथ धारण करने से ये ज्यादा असरदार होता है। साथ ही कुछ ऐसे रत्न भी हैं जिनके साथ पुखराज को ना पहनने की भी सलाह दी जाती है। जानिए इनके बारे में।
पुखराज पहनते वक्त पढ़ें ये मंत्र
रत्नशास्त्र मान्यता है कि पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन ही पहनना शुभ होता है। इसे धारण करने से पहले कच्चे दूध और गंगाजल से साफ कर लेना सही होता है। पहनते वक्त भगवान विष्णु या फिर बृहस्पति का ध्यान करना सही माना जाता है। इसे हमेशा दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना सही माना जाता है। पुखराज धारण करते वक्त इन 2 मंत्रों का जाप करना चाहिए। इनमें से किसी भी एक मंत्र को 108 बार जाप करते हुए पुखराज पहनें।
1. ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
2.ॐ बुं बृहस्पतये नमः
इन रत्नों के साथ ना पहनें पुखराज
हीरा या फिर ओपल
इन दोनों ही रत्नों का संबंध शुक्र ग्रह से जुड़ा माना जाता है। वहीं पुखराज गुरु का रत्न है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों ग्रहों की एनर्जी काफी अलग मानी जाती है। ऐसे में पुखराज के साथ इन्हें ना पहनने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इन्हें साथ में पहनने से शादीशुदा जिंदगी, सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।
नीलम
पुखराज के साथ नीलम भी नहीं पहनना चाहिए। रत्नशास्त्र के अनुसार नीलम का संबंध शनि ग्रह से है। वैसे तो गुरु और शनि पूरी तरह से एक-दूसरे के विरोधी नहीं माने जाते हैं लेकिन इन दोनों ही रत्नों की प्रकृति बहुत ही अलग होती है। पुखराज को शांत और सात्विक एनर्जी वाला माना जाता है। वहीं नीलम को काफी पावरफुल रत्न माना जाता है।
इन रत्नों के साथ पहन सकते हैं पुखराज
अब बात की जाए कि आखिर पुखराज के साथ क्या पहना जा सकता है तो इसके साथ माणिक्य, मूंगा और मोती पहनना शुभ माना जाता है। इन सभी रत्नों का संबंध उन ग्रहों से है जो गुरु के अनुकूल माने जाते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है। ऐसे में किसी भी रत्न को साथ पहनने से पहले एक बार जानकार ज्योतिषी को जरूर दिखाएं।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
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