रत्न शास्त्र: पुखराज सूट नहीं कर रहा है? पहनते समय की गई ये 3 मामूली गलतियां हो सकती हैं वजह
Pukhraj Side Effects: पुखराज को अगर सही तरीके से ना पहना जाए तो ये फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। कई बार लोग कहते हैं कि अरे हमें तो पुखराज सूट ही नहीं किया। आइए जानते हैं कि इसके पीछे की असली वजह क्या हो सकती है?

रत्न शास्त्र की दुनिया में पुखराज को अनमोल रत्न कहा जाता है। इसका संबंध गुरु ग्रह से होता है। मान्यता है कि इसे सही तरीके से पहना जाए तो करियर से लेकर नौकरी और रिश्तों में सही बैलेंस बनता है। वहीं सारे अटके हुए काम भी पूरे होने लगते हैं। हालांकि पुखराज पहनते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। कई बार लोग जल्दबाजी में ऐसी गलतियां कर जाते हैं कि इससे उन्हें इसका पूरा-पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं कि इसके दूसरे क्या फायदे हैं और इसे पहनने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पुखराज पहनने के फायदे
पुखराज पहनने से गुरु ग्रह की स्थिति हमारी कुंडली में मजबूत होती है। जिनकी कुंडली में गुरु यानी बृहस्पति (Jupiter) कमजोर होता है उन्हें इस रत्न को पहनने की सलाह दी जाती है। इसे पहनने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है और साथ में सोच भी काफी पॉजिटिव होती है।
पुखराज पहनते वक्त ना करें ये गलतियां
1.बिना कुंडली दिखाए पुखराज पहनना
पुखराज ही नहीं कोई भी रत्न पहनने से पहले एक जानकार ज्योतिषी को दिखाना बहुत ही जरूरी है। कई लोग शौक के तौर पर कोई भी रत्न धारण कर लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि रत्नों का प्रभाव हम पर काफी ज्यादा होता है। वहीं पुखराज की गिनती तो पावरफुल रत्नों में होती है। इसे बिना किसी की सलाह के धारण करना ही नहीं चाहिए। अगर ये गलती की जाती है तो पुखराज नुकसान पहुंचाएगा।
2.गलत दिन पुखराज धारण करना
कई लोग पुखराज पहनते वक्त सही नियम का पालन नहीं करते हैं। अंगूठी में पुखराज जड़वाने के बाद तुरंत बाद ही इसे धारण करने से इसका प्रभाव कम ही होगा। रत्न और ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन शुद्धीकरण के बाद ही धारण करना चाहिए। कई लोग इसे किसी भी दिन धारण कर लेते हैं जोकि सही तरीका नहीं है। पुखराज को पहनने से पहले इसके धारण करने के सारे नियम एक बार अच्छी तरह से समझ लें।
3.नकली पुखराज लेना
पुखराज कीमती रत्नों में से एक है। ये कई तरह के होते हैं और कुछ की कीमत लाख के ऊपर भी जाती है। ये रत्ती के साथ-साथ क्वालिटी पर डिपेंड करता है वहीं बाजार में आजकल नकली और हल्की क्वालिटी वाले पुखराज भी खूब बिकते हैं। अगर ऐसा रत्न लेकर उससे लाभ पाने की उम्मीद करना गलत है। जब भी कोई रत्न लें तो उसे भरोसेमंद दुकान से ही लें। रत्न को खरीदने से पहले उसकी क्वालिटी जरूर चेक करवाएं।
रखें इन बातों का ध्यान
पुखराज की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। गंगाजल और दूध से शुद्धीकरण करने के बाद ही इसे पहनें। साथ ही कोशिश करें कि एक बार पहनने के बाद इसे बार-बार ना उतारें। इससे इसके शुभ प्रभाव कम होते हैं। साथ ही ये समझना भी जरूर है कि किसी भी पत्न का प्रभाव लोगों की कुंडली और ग्रहों की स्थिति पर काफी हद तक डिपेंड करती है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न शास्त्र
फेंगशुई
हस्तरेखा शास्त्र


