गणेश जी की पूजा में तुलसी दल क्यों नहीं चढ़ाते? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

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गणेश जी की पूजा में तुलसी दल क्यों वर्जित है? जानें माता तुलसी और विघ्नहर्ता गणेश जी की पौराणिक कथा, शाप का प्रसंग और दूर्वा अर्पित करने का धार्मिक महत्व।

Why Tulsi Not Offered to Ganesha
गणेश पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते?

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाले इस पर्व में भक्त बप्पा को उनकी पसंद की कई चीजें अर्पित करते हैं। दूर्वा, मोदक और लाल फूल से गणेश जी की पूजा की जाती है। लेकिन एक चीज ऐसी है, जिसे उनकी पूजा में चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता और वह है तुलसी दल। आइए जानते हैं आखिर क्यों गणेश जी की पूजा में तुलसी दल वर्जित है।

गंगा किनारे तप कर रहे थे भगवान गणेश

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। उसी समय धर्मात्मज की कन्या तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थयात्रा पर निकली थीं। अलग-अलग तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए देवी तुलसी गंगा तट पर पहुंचीं। वहां उन्होंने भगवान गणेश को तपस्या में लीन देखा। कथा में गणेश जी के दिव्य रूप का भी वर्णन मिलता है। वे रत्नों से सजे सिंहासन पर बैठे थे और उनके शरीर पर चंदन लगा हुआ था।

गणेश जी के रूप पर मोहित हो गईं तुलसी

भगवान गणेश के रूप को देखकर तुलसी उनके प्रति आकर्षित हो गईं। उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जाग उठी। विवाह की इच्छा लेकर तुलसी ने उनकी तपस्या भंग कर दी। तप से उठने के बाद गणेश जी ने तुलसी को समझाया कि उनका ध्यान भंग करना उचित नहीं था। उन्होंने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए तुलसी के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

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तुलसी ने गणेश जी को दे दिया शाप

गणेश जी द्वारा विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने से तुलसी बेहद दुखी हुईं और आवेश में आकर उन्होंने गणेश जी को दो विवाह होने का शाप दे दिया। तुलसी की बात सुनकर भगवान गणेश भी क्रोधित हो गए। उन्होंने तुलसी को शाप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा और उन्हें राक्षस की पत्नी बनना पड़ेगा। अपना भविष्य सुनकर तुलसी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी।

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शंखचूर से विवाह का दिया शाप

तुलसी के माफी मांगने पर भगवान गणेश ने बताया कि उनका विवाह शंखचूर नामक असुर से होगा। इसके साथ ही उन्होंने तुलसी के भविष्य के बारे में एक और बात कही। गणेश जी ने कहा कि आगे चलकर तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होंगी। कलियुग में उनका विशेष महत्व होगा और उन्हें जीवन तथा मोक्ष देने वाली पवित्र वनस्पति के रूप में सम्मान मिलेगा।

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तभी से गणेश पूजा में तुलसी वर्जित

कथा के अंत में भगवान गणेश ने कहा कि तुलसी भले ही भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होंगी, लेकिन उनकी पूजा में तुलसी दल चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा। धार्मिक परंपरा में इसी प्रसंग को गणेश पूजा में तुलसी के निषेध से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए गणेश चतुर्थी हो या सामान्य दिनों में गणेश जी की पूजा, भक्त तुलसी की जगह उन्हें दूर्वा अर्पित करते हैं। मान्यता है कि दूर्वा गणेश जी को विशेष प्रिय है।

गणेश जी की पूजा के ये धार्मिक नियम हमें शास्त्रों की मर्यादा और पौराणिक परंपराओं का सम्मान करने की सीख देते हैं। जब भी आप बप्पा की पूजा करें, तो तुलसी के स्थान पर केवल ताजा दूर्वा अर्पित करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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