एकादशी के दिन घर में झाड़ू पोछा क्यों नहीं करना चाहिए? जानिए इससे लगने वाले दोष के बारे में

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एकादशी के दिन घर में झाड़ू पोछा क्यों नहीं करना चाहिए? जानें जीव हिंसा से लगने वाले दोष और इस दिन की अन्य जरूरी सावधानियां।

Ekadashi no sweeping
एकादशी में सफाई क्यों नहीं

एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। कल 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी के दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस दिन शरीर और मन को शुद्ध रखने के साथ-साथ घर के कामों में भी कुछ खास सावधानियां बताई गई हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण नियम है, इस दिन झाड़ू-पोछा नहीं करना। कई लोग इसके पीछे की वजह नहीं जानते और अनजाने में नियम तोड़ देते हैं। शास्त्रों में इसका अपना धार्मिक आधार है।

एकादशी के दिन की पवित्रता

एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन मन, वचन और कर्म तीनों को शुद्ध रखने पर जोर दिया जाता है। व्रत के साथ अहिंसा का भाव भी बहुत महत्वपूर्ण है। छोटे-छोटे जीवों की रक्षा करना भी धर्म का हिस्सा माना जाता है। घर की सफाई रोज की जरूरत है, लेकिन एकादशी जैसे पावन दिन पर कुछ कामों को टालने की सलाह दी जाती है। इससे दिन की पवित्रता बनी रहती है और व्रत का फल बढ़ता है।

झाड़ू-पोछा क्यों ना करें?

एकादशी के दिन घर में झाड़ू लगाने या पोछा लगाने से परहेज करने की बात कही गई है। मुख्य वजह यह है कि झाड़ू करते समय चींटी, कीड़े-मकोड़े जैसे सूक्ष्म जीव दबकर मर सकते हैं। इस दिन अहिंसा का विशेष महत्व होता है। अनजाने में हुई जीव हिंसा भी दोष लगाने वाली मानी जाती है। इसलिए सफाई का काम एक दिन पहले कर लेना या अगले दिन के लिए छोड़ देना बेहतर माना गया है। यह छोटी-सी सावधानी व्रत की शुद्धता बनाए रखने में मदद करती है।

जीव हिंसा से लगने वाला दोष

शास्त्रों में अहिंसा को परम धर्म कहा गया है। एकादशी जैसे दिन पर छोटी जीव हिंसा भी मन की शुद्धता को प्रभावित कर सकती है। चींटी या अन्य सूक्ष्म जीवों की मृत्यु से हिंसा का दोष लगता है। यह दोष व्रत के पुण्य को कम कर सकता है। कई मान्यताओं में कहा गया है कि ऐसे कर्म से मन में अशांति रहती है। इसलिए झाड़ू-पोछा टालकर अहिंसा का पालन करना ज्यादा उचित माना जाता है। भाव शुद्ध रखने से ही व्रत सफल होता है।

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अन्य जरूरी सावधानियां

एकादशी के दिन बाल कटवाने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। अधिक बोलने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ज्यादा बात करने में अनचाहे और अनुचित वचन निकल सकते हैं। मधुर और सीमित वचन बोलना शुभ माना जाता है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से दिन का वातावरण सात्विक बना रहता है। शरीर और वाणी दोनों पर संयम रखना एकादशी के व्रत का हिस्सा है।

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नियम पालन करें

एकादशी से एक दिन पहले घर की अच्छी सफाई कर लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर हल्के हाथों से काम करें, लेकिन झाड़ू-पोछा से बचें। व्रत के दिन ज्यादा से ज्यादा भगवान के नाम का स्मरण करें और शांत रहें। इन नियमों को बोझ की तरह नहीं बल्कि मन की शुद्धि के साधन के रूप में अपनाएं। छोटी सावधानियां भी बड़े पुण्य का कारण बनती हैं। एकादशी का व्रत सही तरीके से रखने पर मन को विशेष शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

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एकादशी के दिन झाड़ू-पोछा ना करने का नियम अहिंसा और शुद्धता पर आधारित है। सूक्ष्म जीवों की रक्षा और मन की शांति के लिए इसका पालन करना चाहिए। सही तैयारी के साथ व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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