दही को जूठा छोड़ने से क्यों किया जाता है मना? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

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थाली में जूठा दही छोड़ना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं, ज्योतिषीय कारण, दही से जुड़े शकुन-अपशकुन और सही नियम।

dahi jutha chhodne ke niyam
दही को जूठा क्यों नहीं छोड़ना चाहिए?

भारतीय परंपरा में दही को केवल भोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि इसे शुभता और समृद्धि से भी जोड़कर देखा गया है। पूजा-पाठ से लेकर मांगलिक कार्यों तक दही का इस्तेमाल कई अवसरों पर किया जाता है। भगवान को भोग लगाने और पंचामृत तैयार करने में भी इसका विशेष स्थान है। यही वजह है कि दही से जुड़ी कई मान्यताएं भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। घर से किसी शुभ काम के लिए निकलते समय दही-चीनी खिलाने की परंपरा इसका एक उदाहरण है। वहीं, दही को गिराना या थाली में जूठा छोड़ना लोक मान्यताओं में शुभ नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं दही से जुड़ी इन धारणाओं और इसके पीछे की धार्मिक मान्यता के बारे में।

धार्मिक परंपरा में दही को क्यों शुभ?

दूध से तैयार होने के कारण दही को सात्विक आहार की श्रेणी में रखा गया है। धार्मिक अनुष्ठानों में पंचामृत तैयार करने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। पूजा-पाठ में पंचामृत अर्पित करने की परंपरा है। भगवान श्रीकृष्ण से भी दही का गहरा संबंध माना जाता है। उनकी बाल लीलाओं में माखन और दही का विशेष उल्लेख मिलता है। इसी वजह से वैष्णव परंपरा में दही को श्रद्धा के साथ देखा जाता है। भारतीय घरों में शुभ अवसरों पर दही का इस्तेमाल आज भी आम है। किसी नए काम, यात्रा, परीक्षा या महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकलने से पहले दही-चीनी खिलाना शुभ संकेत माना जाता है।

दही से जुड़े हैं कई मान्यताएं

दही को लेकर कई तरह की लोक मान्यताएं देखने को मिलती हैं। शुभ अवसर से पहले दही का सेवन करने को सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दही-चीनी खाने से मन शांत रहता है और व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ अपने काम के लिए आगे बढ़ता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में भी दही का संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है। कमजोर चंद्रमा वाले व्यक्ति के लिए दही का सेवन लाभकारी बताया जाता है। वहीं राहु से संबंधित दोषों की शांति के लिए दही और काले तिल का दान करने की बात कही गई है। हालांकि, इन उपायों को धार्मिक और लोक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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रात में दही खाने को लेकर शास्त्रीय मत

दही के सेवन को लेकर धार्मिक परंपराओं में समय का भी ध्यान रखने की बात कही गई है। स्कंद पुराण के काशी खंड में रात के समय दही के सेवन से बचने का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है, 'रात्रौ न दधि भोक्तव्यम्', जिसका सामान्य अर्थ है कि रात में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। धर्म शास्त्रों में भोजन को केवल स्वाद से नहीं, बल्कि समय और दिनचर्या से जोड़कर भी देखा जाता है। इसी कारण दही के सेवन को लेकर कुछ विशेष नियम बनाए गए।

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दही गिरना क्यों माना जाता है अशुभ

लोक मान्यताओं में दही का अचानक गिर जाना शुभ संकेत नहीं माना जाता है। विशेष रूप से किसी महत्वपूर्ण काम के लिए घर से निकलते समय दही गिरने को अपशकुन की श्रेणी में रखा जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, बार-बार दही गिरना घर में आने वाली परेशानी का संकेत माना जाता है। हालांकि ऐसी धारणाएं धार्मिक विश्वास और लोक परंपरा का हिस्सा हैं, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता है। अगर अनजाने में दही गिर जाए, तो इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। परंपरा का पालन करने वाले लोग चंद्र देव का स्मरण कर क्षमा प्रार्थना करें हैं और आगे सावधानी बरतें।

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थाली में जूठा दही छोड़ना क्यों नहीं शुभ?

दही को लेकर एक प्रचलित लोक मान्यता यह भी है कि भोजन के बाद थाली में जूठा दही नहीं छोड़ना चाहिए। दरअसल, दही को शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि थाली में जूठा दही छोड़ने से व्यक्ति की आयु कम होती है। हालांकि, इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। भारतीय संस्कृति में भोजन को अन्नपूर्णा और अन्न के सम्मान से जोड़कर देखा गया है। इसलिए भोजन को व्यर्थ छोड़ने से बचने की सलाह दी जाती है। दही हो या कोई अन्य खाद्य पदार्थ, आवश्यकता के अनुसार भोजन लेना और उसे बर्बाद नहीं करना हमारी परंपरा और व्यवहार, दोनों की दृष्टि से उचित माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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