Hindi Newsधर्म न्यूज़why lord shiva loves bilva patra know origin story
भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय क्यों है? जानिए इसके जन्म की कहानी

भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय क्यों है? जानिए इसके जन्म की कहानी

संक्षेप:

शिव पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। इसे शिवद्रुम भी कहा जाता है। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिशूल और त्रिनेत्र का प्रतीक हैं। भगवान शिव को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है? आइए जानते हैं इसकी कहानी।

Jan 16, 2026 04:08 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

हिंदू धर्म में बेलपत्र (बिल्व पत्र) को भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्र माना जाता है। शिव पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। इसे शिवद्रुम भी कहा जाता है। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिशूल और त्रिनेत्र का प्रतीक हैं। शास्त्रों में बेलपत्र को मोक्षदायी बताया गया है। मान्यता है कि अगर किसी की शवयात्रा बेल वृक्ष की छाया से गुजर जाए, तो उसे मोक्ष मिल जाता है। बेल वृक्ष को सींचने से पितरों को तृप्ति मिलती है। लिंग पुराण के अनुसार, बेल वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखाओं में ऋषि-मुनि और पत्तियों में शिव का वास है। इसलिए बेलपत्र अर्पित करना त्रिदेवों की संयुक्त पूजा के समान फल देता है। लेकिन भगवान शिव को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है? इसका जवाब जानने के लिए बेलपत्र की पौराणिक उत्पत्ति की कहानी जाननी जरूरी है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

बेलपत्र की पौराणिक उत्पत्ति कथा

शिवपुराण और अन्य पुराणों में बेलपत्र की उत्पत्ति की कथा वर्णित है। एक बार देवी पार्वती तपस्या में लीन थीं। तपस्या के दौरान उनके शरीर से पसीने की बूंदें धरती पर गिरीं। उन्हीं बूंदों से बेल वृक्ष की उत्पत्ति हुई। चूंकि बेल वृक्ष माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न हुआ, इसलिए इसमें माता पार्वती के अनेक दिव्य स्वरूपों का वास माना गया है। जड़ में माता गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षिणायनी, पत्तियों में स्वयं पार्वती, फलों में कात्यायनी और फूलों में माता गौरी का रूप निवास करता है। इतना ही नहीं, इस वृक्ष में मां लक्ष्मी की कृपा भी व्याप्त है। इस कारण बेलपत्र को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना गया।

भगवान शिव को बेलपत्र क्यों इतना प्रिय है?

बेलपत्र में माता पार्वती का अंश होने के कारण यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। शिव-पार्वती की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक होने से बेलपत्र चढ़ाने पर शिव-पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। शिवपुराण में कहा गया है कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का प्रतीक हैं। इसे अर्पित करना त्रिदेवों की पूजा के समान फल देता है। जो भक्त श्रद्धा से बेलपत्र चढ़ाता है, उसे पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और कालसर्प दोष से छुटकारा मिलता है। शिव जी को बेलपत्र इसलिए प्रिय है, क्योंकि यह माता पार्वती का अंश है और शिव-पार्वती का प्रेम इस पत्र में समाहित है।

बेलपत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

बेलपत्र पाप नाशक और मोक्षदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बेलपत्र चढ़ाने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। अगर किसी की शवयात्रा बेल वृक्ष की छाया से गुजर जाए, तो उसे मोक्ष प्राप्ति होती है। बेल वृक्ष को सींचने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है। आयुर्वेद में भी बेल वृक्ष को औषधीय माना गया है। बेल का फल पाचन तंत्र को मजबूत करता है, पेट रोगों में लाभकारी है और पत्ते-जड़ भी औषधीय गुणों से युक्त हैं। बेलपत्र चढ़ाने से ग्रह बाधाएं, कालसर्प दोष और शनि-राहु के प्रभाव शांत होते हैं। यह पत्र शिव भक्ति का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।

बेलपत्र चढ़ाने की विधि और लाभ

बेलपत्र चढ़ाने की विधि बहुत सरल है। शिवलिंग पर बेलपत्र उल्टी तरफ (तने की ओर) चढ़ाएं। तीन पत्ते एक साथ चढ़ाने चाहिए। श्रावण मास में रोज बेलपत्र चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। अगर तीर्थ यात्रा ना कर पाएं, तो श्रावण में बेल वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने से समस्त तीर्थों का पुण्य मिलता है। बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं और शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। यह पत्र भक्त को मोक्ष मार्ग पर ले जाता है।

भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए प्रिय है, क्योंकि यह माता पार्वती के पसीने से उत्पन्न हुआ और शिव-पार्वती की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक है। श्रद्धा से बेलपत्र चढ़ाएं तो जीवन में सुख, शांति और मोक्ष प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ ,Choti Diwali Wishes , Rashifal, Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!