
पीपल के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? जानिए इससे जुड़े उपाय व पूजा विधि
हिंदू धर्म में कई ऐसे पेड़-पौधे होते हैं, जिन्हें पूजनीय व पवित्र माना जाता है। इनमें से एक पेड़ है पीपल का। अक्सर आपने देखा होगा कि पीपल के पेड़ की लोग पूजा करते हैं, दीपक जलाते हैं और साथ ही धागा बांधते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पूजा क्यों होती है?
हिंदू धर्म में कई ऐसे पेड़-पौधे होते हैं, जिन्हें पूजनीय व पवित्र माना जाता है। इनमें से एक पेड़ है पीपल का। अक्सर आपने देखा होगा कि पीपल के पेड़ की लोग पूजा करते हैं, दीपक जलाते हैं और साथ ही धागा बांधते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीपल के पेड़ की पूजा क्यों होती है? चलिए आज हम जानेंगे कि पीपल की पूजा क्यों होती है और इससे जुड़े उपाय भी जानेंगे।
हिंदू मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शंकर यानि त्रिदेव का वास होता है। पीपल में पितरों और तीर्थों का भी वास होता है। श्रीमद्भगवद गीता में भगवान ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है। मान्यता है कि इसके जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण और पत्तों में हरि बसते हैं। ऐसे में लोग इसकी नियमित पूजा-अर्चना करते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप शनि की साढ़े साती और ढैया से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो शनिवार के दिन पीपल की पूजा जरूर करें।
पूजा की विधि
- सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद किसी मंदिर जाएं, जहां पीपल हो।
- मंदिर में गणेशजी, शिवजी और माता पार्वती की पूजा करें। इसके बाद पीपल की पूज करें।
- पीपल की जड़ में गाय का दूध, तिल और चंदन मिला हुआ पवित्र जल अर्पित करें।
- जल अर्पित करने के बाद जनेऊ, हार-फूल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
- धूप-दीप जलाएं। आसन पर बैठकर या खड़े होकर इस मंत्र जाप करें।
मंत्र-
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे। अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम:।।
आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्। देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।
ध्यान रखें ये बातें
- मान्यता है कि पीपल पर माता लक्ष्मी की बहन दरिद्रा का वास होता है, इसलिए रविवार को भूलकर भी पीपल की पूजा नहीं करना चाहिए।
-पीपल की पूजा करने वाले व्यक्ति को पीपल के पेड़ को भूलकर भी शनिवार और रविवार के दिन नहीं काटना या कटवाना चाहिए।
- यदि घर के किसी कोने पर कोई पेड़ निकल आए तो उसे वहां से हटवाकर किसी दूसरे स्थान पर लगवा देना चाहिए।
उपाय
- यदि आपकी कुंडली में शनि से संबंधित दोष जैसे ढैय्या या फिर साढ़ेसाती है तो आपको शनिवार के दिन विशेष रूप से पीपल पर जल अर्पित करना चाहिए।
- पीपल की जड़ पर जल चढ़ाने के बाद आपको आटे का चौमुखा दीया बनाएं और उसमें सरसों का तेल और रुई की बाती बनाकर जलाएं। इसके बाद पीपल की सात बार परिक्रमा करें।
- शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का विशेष रूप से सात बार पाठ करना चाहिए। इसे आप शत्रुओं का भय दूर होता है।
- पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करें और रोज उसकी पूजा करें। इससे आपकी हर समस्या खत्म हो जाएगी।
- शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- संध्याकाल में सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल डाल कर दीपक जलाना चाहिए। पीपल वृक्ष में दीपक जलाने से भी लाभ मिल सकता है। सरसों के तेल का प्रयोग करने से विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।
लाभ
- पीपल की पूजा करने से पितरों को शांति मिलती है।
- पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और कुंडली का शनि दोष दूर होता है।
- इसके साथ ही शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के कष्टों को दूर करने के लिए पीपल की पूजा अत्यधिक प्रभावी मानी गई है।
-पीपल पर जल चढ़ाकर परिक्रमा करने से साधक की सुख, संपत्ति और लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





